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Jind News: सर्पदंश के 50 मामले आए, नहीं हुई एक भी मौत
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25जेएनडी16: नागरिक अस्पताल में वर्ल्ड स्नेक बाइट अवेयरनेस वीक की शुरुआत से पहले बैठक करते हुए च
- फोटो : 1
जींद। सर्पदंश के मामलों में समय पर इलाज और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने वर्ल्ड स्नेक बाइट अवेयरनेस वीक की शुरुआत की है। वर्ष 2025-26 में अब तक जिले में सर्पदंश के 50 मामले स्वास्थ्य विभाग के सामने आए हैं। विभाग के अनुसार सभी मरीजों का सफल इलाज किया गया और सर्पदंश से किसी मरीज की मौत नहीं हुई।
अभियान के दौरान चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों, मेडिकल विद्यार्थियों और प्रशिक्षुओं को सर्पदंश के मामलों के प्रारंभिक प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अभियान के तहत नागरिक अस्पताल में कार्यरत आपातकालीन चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसमें सर्पदंश के मरीज की पहचान, तत्काल उपचार, एंटी स्नेक वेनम की डोज और सांप की पहचान से जुड़े जरूरी पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यशालाओं और वेबिनार के माध्यम से विभिन्न प्रजातियों तथा उनके प्रभाव के बारे में भी स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
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एंटी स्नेक बाइट प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ. रवि राणा ने बताया कि जिले के नागरिक अस्पताल के साथ सभी पीएचसी और सीएचसी में सर्पदंश के उपचार के लिए एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है।
सांप के काटने पर तुरंत एंबुलेंस बुलाएं, पीड़ित को शांत रखें और काटे गए अंग को स्थिर रखें। गहने व तंग कपड़े हटा दें और घाव को साफ, सूखी पट्टी से ढकें। घाव को काटकर जहर निकालने या चूसने, कसकर बांधने और पारंपरिक उपचार कराने से बचें। सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश भी न करें।
85 फीसदी सांप जहरीले नहीं, फिर भी झाड़-फूंक में न पड़ें
डॉ. सुधीर ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक कराने का प्रचलन अभी भी है। लोगों को समझाया जा रहा है कि समय गंवाने के बजाय मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं। डॉ. मनोज मलिक ने बताया कि करीब 70 प्रतिशत सांप नॉन-पॉइजनिंग होते हैं। करीब 15 प्रतिशत ऐसे सांप होते हैं, जिनके काटने पर गंभीर खतरा नहीं होता, जबकि करीब 15 प्रतिशत सांप ही बेहद जहरीले होते हैं।
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अभियान के दौरान चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों, मेडिकल विद्यार्थियों और प्रशिक्षुओं को सर्पदंश के मामलों के प्रारंभिक प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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अभियान के तहत नागरिक अस्पताल में कार्यरत आपातकालीन चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसमें सर्पदंश के मरीज की पहचान, तत्काल उपचार, एंटी स्नेक वेनम की डोज और सांप की पहचान से जुड़े जरूरी पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यशालाओं और वेबिनार के माध्यम से विभिन्न प्रजातियों तथा उनके प्रभाव के बारे में भी स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
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एंटी स्नेक बाइट प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ. रवि राणा ने बताया कि जिले के नागरिक अस्पताल के साथ सभी पीएचसी और सीएचसी में सर्पदंश के उपचार के लिए एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है।
सांप के काटने पर तुरंत एंबुलेंस बुलाएं, पीड़ित को शांत रखें और काटे गए अंग को स्थिर रखें। गहने व तंग कपड़े हटा दें और घाव को साफ, सूखी पट्टी से ढकें। घाव को काटकर जहर निकालने या चूसने, कसकर बांधने और पारंपरिक उपचार कराने से बचें। सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश भी न करें।
85 फीसदी सांप जहरीले नहीं, फिर भी झाड़-फूंक में न पड़ें
डॉ. सुधीर ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक कराने का प्रचलन अभी भी है। लोगों को समझाया जा रहा है कि समय गंवाने के बजाय मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं। डॉ. मनोज मलिक ने बताया कि करीब 70 प्रतिशत सांप नॉन-पॉइजनिंग होते हैं। करीब 15 प्रतिशत ऐसे सांप होते हैं, जिनके काटने पर गंभीर खतरा नहीं होता, जबकि करीब 15 प्रतिशत सांप ही बेहद जहरीले होते हैं।