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फर्जी तरीके से लिए मकान मरम्मत के 50-50 हजार रुपये, अब विभाग करवाएगा रिकवरी

Sat, 30 Jul 2022 12:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 30 Jul 2022 12:24 AM IST
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50-50 thousand rupees taken in the name of house repair in a fake manner, now the department will get the recovery done
लघु सचिवालय स्थित जिला कल्याण विभाग कार्यालय। संवाद - फोटो : Jind
जींद। वर्ष 2019 में डॉ. बीआर अंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना के तहत मकान की मरम्मत के लिए फर्जी तरीके से 50-50 हजार रुपये का लाभ लेने वालों से जिला कल्याण विभाग अब रिकवरी करवाएगा। इसके लिए विभाग ने मुख्यालय को पत्र लिखा है। मुख्यालय से आदेश आने पर फर्जी तरीके से लाभ लेने वालों के खिलाफ विभाग एफआईआर करवाकर ब्याज सहित रिकवरी करवाएगा। इसको लेकर विभाग ने उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी है। विभाग अधिकारियों ने फर्जी तरीके से लाभ लेने वालों के घर जाकर जांच की और उसकी रिपोर्ट मुख्यालय मुख्यालय भेज दी है। अब मुख्यालय से आदेश आने के बाद विभाग आगामी कार्रवाई करेगा।
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जिला कल्याण विभाग कार्यालय जींद के अधिकारियों ने वर्ष 2019 में मकान मरम्मत योजना के तहत 4 आवेदनकर्ताओं को 50-50 हजार रुपये लाभ के रूप में दे दिए थे जबकि इन चारों आवेदनकर्ताओं के आवेदनों में त्रुटियां पाई गई थी। इससे आवेदन रद्द हो गए थे, लेकिन अधिकारियों ने गोलमाल कर आवेदनकर्ताओं के खातों में 50-50 हजार रुपये खातों में डाल दिए थे।
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59 लोगों को वर्ष 2019 में मिला था लाभ
जिला कल्याण विभाग कार्यालय में डॉ. बीआर अंबेदकर आवास नवीनीकरण योजना के तहत वर्ष 2019-20 की राशि जारी हुई थी। इसी सत्र में नरवाना और नरवाना उपमंडल के 59 आवेदनकर्ताओं को 29 लाख 50 हजार रुपये आवंटित कर दिए गए थे। इस स्कीम का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले करने वाले अनुसूचित जाति, विमुक्त जाति एवं टपरीवास जाति के व्यक्तियों को जिनका मकान मरम्मत योग्य हो गया हो। उनको योजना का लाभ दिलवाना था। इस उद्देश्य के लिए आवेदनकर्ता को राशि दी जाती है। यदि इस राशि का प्रयोग मकान मरम्मत में नहीं करता तो सरकार यह राशि जमीन का भाव लगाकर वसूल भी कर सकती है।
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केस-1
5 साल पहले बने मकान पर लिया लाभ
उचाना के गांव लोधर निवासी गुड्डी ने 10 सितंबर 2018 को विभाग कार्यालय में मकान मरम्मत को लेकर आवेदन किया था। इसके बाद विभाग ने उसके आवेदन को रद्द कर दिया था, लेकिन मात्र 5 साल पुराने मकान पर ही 50 हजार रुपये का लाभ दे दिया था। अब विभाग अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की गई तो पता चला कि गुड्डी का मकान 14-15 साल पहले बनाया था और यही मकान दोबारा 5-6 साल पहले फिर बनाया है। इसलिए यह लाभ योजना अनुसार नहीं मिल सकता।
केस -2
पहले रद्द किया बाद में जारी कर दी राशि
सुरबरा गांव की महिला संतोष ने 17 जुलाई 2019 को मकान मरम्मत का लाभ लेने के लिए विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन में कई खामियां होने के कारण विभाग ने उसे रद्द कर दिया, लेकिन विभाग अधिकारियों ने आवेदनकर्ता के साथ मिलीभगत कर उन्हें योजना के तहत राशि दे दी थी। अब विभाग अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की तो देखा कि मकान की नई-नई लिपाई हुई है जबकि मरम्मत के लिए विभाग ने वर्ष 2019 में राशि जारी कर दी थी।
केस-3
करनी थी मरम्मत, बना दिया नया मकान
फरैण कलां निवासी नफे सिंह ने जुलाई 2019 में मकान मरम्मत के लिए आवेदन किया था। उसके आवेदन में योजना के अनुरूप कागजात नहीं लगाए गए थे, जिससे विभाग ने आवेदन को रद्द कर दिया। इसके बाद आवेदनकर्ता को 50 हजार रुपये जारी भी कर दिए थे। अब विभाग अधिकारियों ने गांव में जाकर जांच की तो पता चला कि वर्ष 2021 में उसने मकान नया बना दिया है। उसे राशि वर्ष 2019 में मिली थी। जबकि राशि पुराने मकान की मरम्मत करने के लिए दी गई थी।
केस-4
पुराना मकान दिखाकर लिया लाभ
धरौदी गांव की महिला नन्ही देवी ने 15 जुलाई 2019 को आवेदन किया था। पूरे कागजात और बैंक खाते की कॉपी नहीं होने पर आवेदन रद्द कर दिया था। इसके बाद आवेदन को 17 सितम्बर 2019 को स्वीकृत करते हुए 50 हजार रुपये की राशि आवेदनकर्ता के खाते में डाल दी थी। अब विभाग अधिकारी जांच के लिए गांव में पहुंचे तो देखा कि नन्ही का अंदर पुराना मकान है और बाहर नया बनाया हुआ है। उन्होंने राशि पुराने मकान को दिखाकर ली है।

जिले के चार लोगों ने मकान मरम्मत के नाम पर 50-50 रुपये का लाभ लिया। विभाग ने जांच की तो चारों ने योजना की शर्तों अनुसार कार्य नहीं किया और कुछ बातें छिपाकर लाभ ले लिया। उनसे रिकवरी करवाई जाएगी। विभाग ने मुख्यालय को रिपोर्ट बनाकर भेज दी है।
नरेंद्र सिंह, जिला कल्याण अधिकारी जींद।
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