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गन शूटिंग में जींद के लक्ष्य ने सबसे कम उम्र में सिल्वर पर लगाया निशाना
Updated Tue, 21 Aug 2018 12:06 AM IST
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जींद के लक्ष्य ने सबसे कम उम्र में सिल्वर पर लगाया निशाना
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। इंडोनेशिया में चल रहे एशियाई खेलों में जींद के शूटर लक्ष्य श्योराण ने सिल्वर मेडल पर निशाना लगाते हुए देश को एक और पदक दिलाया है। शूटिंग में देश के लिए 19 वर्ष की आयु में लक्ष्य ने सबसे कम उम्र में पहला पदक जीता है। लक्ष्य की इस जीत से परिवार समेत जींद में खुशी का माहौल है।
लक्ष्य की जीतने की जानकारी मिलते ही लोग लक्ष्य के परिजनों को बधाई देने के लिए उसके घर पहुंचने लगे। लक्ष्य के पिता सोमबीर पहलवान ने कहा कि उनको अपने बेटे पर गर्व है। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि लक्ष्य इस चैंपियनशिप से खाली हाथ नहीं आएगा। उसने कर दिखाया और देश के लिए पदक जीता है। लक्ष्य में इंटरनेशनल स्तर पर भी दर्जनों पदक देश के लिए जीते हैं। लक्ष्य की मां प्रोमिला देवी ने कहा कि लक्ष्य और देश के लिए पदक सिल्वर हो सकता है, लेकिन उनके लिए यह गोल्ड से कम नहीं है। लक्ष्य देश के लिए भविष्य में गोल्ड जरूर लेकर आएगा। उनको अपने बेटे पर गर्व है। दादी शाबकौर ने कहा कि ‘मेरा पोता इसी तरह से निशाने लगाता रहे बस देश में फिर किसी पदक की कमी नहीं रहेगी।’ दादा हरिराम ने कहा कि पोते की इस जीत के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं। लक्ष्य 11वीं कक्षा तक जींद के इंडस पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की है और 2014 में शूटिंग की शुरूआत की। इसके बाद वह दिल्ली चला गया। फिलहाल लक्ष्य अमृतसर में पढ़ाई कर रहा है। 2015 में कुवैत में हुई एशियन चैंपियनशिप में लक्ष्य ने सिल्वर मेडल जीता था। इसके बाद इटली में हुई 13वीं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी सिल्वर, थाईलैंड में हुए सातवीं इंटरनेशनल जूनियर कप प्रतियोगिता में सिल्वर पदक जीता। 2016 में वर्ल्ड कप में कांस्य पदक जीता। जुलाई 2017 में जर्मनी में हुई इंटरनेशनल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। फिनलैंड में 2017 में हुई नौवीं जूनियर प्रतियोगिता में सिल्वर पदक जीता। इसी साल मार्च में सिडनी में हुए जूनियर वर्ल्ड प्रतियोगिता में लक्ष्य में कांस्य पदक जीता है। लक्ष्य कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीत चुका है। लक्ष्य के पिता सोमबीर पहलवान अपनी दुपहिया वाहनों की एजेंसी चलाते हैं और वे भारत कुमार रह चुके हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। इंडोनेशिया में चल रहे एशियाई खेलों में जींद के शूटर लक्ष्य श्योराण ने सिल्वर मेडल पर निशाना लगाते हुए देश को एक और पदक दिलाया है। शूटिंग में देश के लिए 19 वर्ष की आयु में लक्ष्य ने सबसे कम उम्र में पहला पदक जीता है। लक्ष्य की इस जीत से परिवार समेत जींद में खुशी का माहौल है।
लक्ष्य की जीतने की जानकारी मिलते ही लोग लक्ष्य के परिजनों को बधाई देने के लिए उसके घर पहुंचने लगे। लक्ष्य के पिता सोमबीर पहलवान ने कहा कि उनको अपने बेटे पर गर्व है। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि लक्ष्य इस चैंपियनशिप से खाली हाथ नहीं आएगा। उसने कर दिखाया और देश के लिए पदक जीता है। लक्ष्य में इंटरनेशनल स्तर पर भी दर्जनों पदक देश के लिए जीते हैं। लक्ष्य की मां प्रोमिला देवी ने कहा कि लक्ष्य और देश के लिए पदक सिल्वर हो सकता है, लेकिन उनके लिए यह गोल्ड से कम नहीं है। लक्ष्य देश के लिए भविष्य में गोल्ड जरूर लेकर आएगा। उनको अपने बेटे पर गर्व है। दादी शाबकौर ने कहा कि ‘मेरा पोता इसी तरह से निशाने लगाता रहे बस देश में फिर किसी पदक की कमी नहीं रहेगी।’ दादा हरिराम ने कहा कि पोते की इस जीत के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं। लक्ष्य 11वीं कक्षा तक जींद के इंडस पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की है और 2014 में शूटिंग की शुरूआत की। इसके बाद वह दिल्ली चला गया। फिलहाल लक्ष्य अमृतसर में पढ़ाई कर रहा है। 2015 में कुवैत में हुई एशियन चैंपियनशिप में लक्ष्य ने सिल्वर मेडल जीता था। इसके बाद इटली में हुई 13वीं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी सिल्वर, थाईलैंड में हुए सातवीं इंटरनेशनल जूनियर कप प्रतियोगिता में सिल्वर पदक जीता। 2016 में वर्ल्ड कप में कांस्य पदक जीता। जुलाई 2017 में जर्मनी में हुई इंटरनेशनल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। फिनलैंड में 2017 में हुई नौवीं जूनियर प्रतियोगिता में सिल्वर पदक जीता। इसी साल मार्च में सिडनी में हुए जूनियर वर्ल्ड प्रतियोगिता में लक्ष्य में कांस्य पदक जीता है। लक्ष्य कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीत चुका है। लक्ष्य के पिता सोमबीर पहलवान अपनी दुपहिया वाहनों की एजेंसी चलाते हैं और वे भारत कुमार रह चुके हैं।
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