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52 साल से सिर्फ चौधर की लड़ाई, विकास में पिछड़ता गया जींद
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52 साल से सिर्फ चौधर की लड़ाई, विकास में पिछड़ता गया जींद
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। हरियाणा बनने के साथ ही 52 साल पहले अस्तित्व में आया जींद जिला आज भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है। उपचुनाव में हर राजनीतिक दल व उम्मीदवार जींद की चौधर व विकास की बात कर रहा है, लेकिन पिछले 12 चुनाव में हर बार यही मुद्दे होते हैं, लेकिन जींद पिछड़ा ही बना रहा। आलम यह है कि शहर में सीवरेज लाइन से लेकर पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। ऐसे में इन चुनाव के बाद जींद की तस्वीर बदलेगी या नहीं, यह समय ही बताएगा।
वर्तमान समय में स्वास्थ्य सेवाएं जींद का सबसे बड़ा मुद्दा है। जिला में चार नागरिक अस्पताल हैं और पांच सामूदायिक स्वास्थ्य केंद्र। जिला में 22 सीएचसी और 163 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। हर जगह स्टाफ का टोटा है। आलम यह है कि जिला में चिकित्सकों के कुल 208 पद स्वीकृत हैं, लेकिन महज 62 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। अकेले जींद के नागरिक अस्पताल की बात करें तो यहां 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से महज 16 ही कार्यरत हैं। ऐसे में लोगों को हर छोटी बड़ी बीमारी के लिए निजी अस्पताल में या फिर जींद से बाहर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी
नागरिक अस्पताल में न तो फिजीशियन है, न ही ईएनटी सर्जन, मनोवैज्ञानिक, नेत्र चिकित्सक, रेडियोलॉजिस्ट व तत्वा रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इसके चलते जींद में दिव्यांगों के प्रमाण पत्र के लिए मेडिकल बोर्ड तक नहीं है। वहीं नौकरी ज्वाइन करने के लिए भी उम्मीदवारों को मेडिकल के लिए अग्रोहा व रोहतक जाना पड़ता है।
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40 साल पुरानी सीवरेज लाइन
जींद में 40 साल पहले सीवरेज लाइन डली थी। तब की आबादी के हिसाब से मांग काफी बढ़ चुकी है, लेकिन आज भी जींद को छोटी सीवरेज लाइन से परेशान होना पड़ रहा है। उपचुनाव में लोगों को उम्मीद है कि यह मुद्दा नेताओं तक पहुंचे।
पेयजल से महरूम
जींद के लोग अलग हरियाणा राज्य बनने के 52 साल बाद भी स्वच्छ पेयजल से महरूम है। जींद के हुडा क्षेत्र में ही नहरी पानी मिल रहा है, शेष शहर में आज भी लोगों को भूमिगत पानी सप्लाई किया जा रहा है, जो पीने लायक नहीं है।
बदहाल है जींद
जींद शहर हरियाणा के पुराने जिलों में से है, लेकिन राजनीतिक उपेक्षा के चलते यह बदहाल है। किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं है। ऐसा नहीं है कि जींद राजनीतिक दृष्टि से कमजोर रहा है। अधिकतर सरकारों में जींद की भागेदारी रही है, इसके बावजूद जींद के विकास की ओर ध्यान नहीं दिया गया।
आशीष,
नहीं मिलती अच्छी शिक्षा
जींद में अच्छी शिक्षा के लिए कोई भविष्य नहीं है। युवाओं को शिक्षा के लिए बाहर ही जाना पड़ता है। गांव देहात के बच्चे यह शिक्षा नहीं ले पाते और शिक्षा के साथ-साथ रोजगार के मामले में भी पिछड़ जाते हैं। जींद में आधुनिक शिक्षण संस्थान के साथ-साथ तकनीकी शिक्षण संस्थान की भी जरूरत है।
अमित
सभी दलों की सरकार नहीं नहीं हुआ विकास
आज उपचुनाव में सभी दल जींद के पिछड़ेपन की दुहाई दे रहे हैं, लेकिन सत्ता में रहते किसी भी सरकार ने कुछ नहीं किया। यही कारण है कि आज जींद लगातार पिछड़ेपन के कलंक को ढो रहा है। अब नेताओं को जींद के विकास के लिए गंभीरता से सोचाना चाहिए।
राधेश्याम
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। हरियाणा बनने के साथ ही 52 साल पहले अस्तित्व में आया जींद जिला आज भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है। उपचुनाव में हर राजनीतिक दल व उम्मीदवार जींद की चौधर व विकास की बात कर रहा है, लेकिन पिछले 12 चुनाव में हर बार यही मुद्दे होते हैं, लेकिन जींद पिछड़ा ही बना रहा। आलम यह है कि शहर में सीवरेज लाइन से लेकर पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। ऐसे में इन चुनाव के बाद जींद की तस्वीर बदलेगी या नहीं, यह समय ही बताएगा।
वर्तमान समय में स्वास्थ्य सेवाएं जींद का सबसे बड़ा मुद्दा है। जिला में चार नागरिक अस्पताल हैं और पांच सामूदायिक स्वास्थ्य केंद्र। जिला में 22 सीएचसी और 163 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। हर जगह स्टाफ का टोटा है। आलम यह है कि जिला में चिकित्सकों के कुल 208 पद स्वीकृत हैं, लेकिन महज 62 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। अकेले जींद के नागरिक अस्पताल की बात करें तो यहां 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से महज 16 ही कार्यरत हैं। ऐसे में लोगों को हर छोटी बड़ी बीमारी के लिए निजी अस्पताल में या फिर जींद से बाहर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।
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विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी
नागरिक अस्पताल में न तो फिजीशियन है, न ही ईएनटी सर्जन, मनोवैज्ञानिक, नेत्र चिकित्सक, रेडियोलॉजिस्ट व तत्वा रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इसके चलते जींद में दिव्यांगों के प्रमाण पत्र के लिए मेडिकल बोर्ड तक नहीं है। वहीं नौकरी ज्वाइन करने के लिए भी उम्मीदवारों को मेडिकल के लिए अग्रोहा व रोहतक जाना पड़ता है।
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40 साल पुरानी सीवरेज लाइन
जींद में 40 साल पहले सीवरेज लाइन डली थी। तब की आबादी के हिसाब से मांग काफी बढ़ चुकी है, लेकिन आज भी जींद को छोटी सीवरेज लाइन से परेशान होना पड़ रहा है। उपचुनाव में लोगों को उम्मीद है कि यह मुद्दा नेताओं तक पहुंचे।
पेयजल से महरूम
जींद के लोग अलग हरियाणा राज्य बनने के 52 साल बाद भी स्वच्छ पेयजल से महरूम है। जींद के हुडा क्षेत्र में ही नहरी पानी मिल रहा है, शेष शहर में आज भी लोगों को भूमिगत पानी सप्लाई किया जा रहा है, जो पीने लायक नहीं है।
बदहाल है जींद
जींद शहर हरियाणा के पुराने जिलों में से है, लेकिन राजनीतिक उपेक्षा के चलते यह बदहाल है। किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं है। ऐसा नहीं है कि जींद राजनीतिक दृष्टि से कमजोर रहा है। अधिकतर सरकारों में जींद की भागेदारी रही है, इसके बावजूद जींद के विकास की ओर ध्यान नहीं दिया गया।
आशीष,
नहीं मिलती अच्छी शिक्षा
जींद में अच्छी शिक्षा के लिए कोई भविष्य नहीं है। युवाओं को शिक्षा के लिए बाहर ही जाना पड़ता है। गांव देहात के बच्चे यह शिक्षा नहीं ले पाते और शिक्षा के साथ-साथ रोजगार के मामले में भी पिछड़ जाते हैं। जींद में आधुनिक शिक्षण संस्थान के साथ-साथ तकनीकी शिक्षण संस्थान की भी जरूरत है।
अमित
सभी दलों की सरकार नहीं नहीं हुआ विकास
आज उपचुनाव में सभी दल जींद के पिछड़ेपन की दुहाई दे रहे हैं, लेकिन सत्ता में रहते किसी भी सरकार ने कुछ नहीं किया। यही कारण है कि आज जींद लगातार पिछड़ेपन के कलंक को ढो रहा है। अब नेताओं को जींद के विकास के लिए गंभीरता से सोचाना चाहिए।
राधेश्याम