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आयुष्मान योजना के तहत जिला में 285 लोगों ने करवाई सर्जरी, दो केसों में आई परेशानी

Fri, 13 Sep 2019 12:36 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 13 Sep 2019 12:36 AM IST
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285 people underwent surgery in he district under ayushman yojna, problem in 2 cases
एक साल पहले केंद्र सरकार द्वार शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना जिले के लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। एक साल में इस योजना के तहत कुल 2500 लोगों ने इलाज करवाया, जिनमें से 285 लोगों ने निजी अस्पतालों में सर्जरी तक करवाई है। जिले में दो केसों को छोड़कर अन्य मामलों में इलाज के दौरान किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार कुछ मामलों में मुख्यालय पूरी तरह से ऑपरेशन सुनिश्चित करना चाहता है, ऐसे में एक मामले में दिक्कत आई है।
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जिले में पांच निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत पैनल में हैं। इन अस्पतालों में योजना के तहत बने कार्ड के आधार पर लोग अपना इलाज करवा रहे हैं। हालांकि जिले में दो मामलों में कुछ दिक्कत आई है। अमहेड़ी गांव निवासी रजिया के अनुसार उसे इलाज की अनुमति नहीं मिली, इसके चलते बिना इलाज करवाए ही लौटना पड़ा। रजिया ने दूसरे अस्पताल में योजना के तहत ही इलाज करवा लिया है। दरअसल रजिया को बच्चेदानी की दिक्कत थी । इसका इलाज अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में करवाया जा रहा था। वहां से चिकित्सकों ने ऑपरेशन की योजना बनाई। ऐसे में रजिया ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मंगला अस्पताल से ऑपरेशन करवाने का फैसला लिया। रजिया को 12 अगस्त को दाखिल करवाया और इलाज की अनुमति के लिए योजना की वेबसाइट पर आवेदन किया गया। मंगला अस्पताल के संचालक डॉ. सुशील मंगला के अनुसार 12 अगस्त को ही अनुमति के लिए आवेदन किया गया। इसके बाद पंचकूला में बैठी टीम ने पूछा कि ऑपरेशन क्यों किया जा रहा है। इस पर अग्रोहा मेडिकल कॉलेज की सभी रिपोर्ट व ऑपरेशन की अनुशंसा भेजी गई। इसके बाद 13 अगस्त तक कोई जवाब नहीं आया और मरीज बिना इलाज करवाए ही चली गई। डॉ. सुशील मंगला के अनुसार आज तक इसका कोई जवाब नहीं आया है। हालांकि रजिया की बेटी सीमा के अनुसार योजना के तहत ही उन्होंने दूसरे अस्पताल में ऑपरेशन करवा लिया है। वहां भी दिक्कत तो आई, लेकिन ऑपरेशन हो गया है।
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वहीं दूसरे मामले में नरवाना निवासी मेवा सिंह को इलाज के दौरान दिक्कत आई। डॉ. सुशील मंगला के अनुसार मेवा सिंह को पेशाब की थैली में कैंसर था, जिसका इलाज कर दिया गया। इसके बाद फिर से कैंसर की सेल सक्रिय हुई तो दोबारा ऑपरेशन किया गया। तीसरी बार भी मेवा सिंह को दिक्कत आई तो मुख्यालय से इस पर आपत्ति लगाई गई।
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योजना बेहद अच्छी
योजना बहुत अच्छी है, लेकिन मुख्यालय पर विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से दिक्कत आ रही है। सामान्य एमबीबीएस चिकित्सक को ऑपरेशन के बारे में समझाना पड़ता है। कागजी कार्रवाई में तीन से चार घंटे का समय लगता है, जबकि ऑपरेशन में एक घंटे का समय लगता है। इसमें सुधार की जरूरत है।

हां रजिया के मामले में दिक्कत आई है, लेकिन इस प्रकार के मामलों में यह पूरी तरह से सुनिश्चित करना पड़ता है कि क्या परिवार के लोग ऐसा चाह रहे हैं। इसके बाद ही अनुमति दी जाती है। मरीज का इलाज भी हो चुका है।
विवेक, मैनेजर आयुष्मान भारत योजना।
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