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लोक अदालत में रखे गए 2819 मामले, 137 का हुआ आपसी सहमति से समाधान --विभिन्न मामलों में चार करोड़ 82 लाख रुपये की राशि भी दिलाई
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जींद। न्यायिक परिसर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसबीर सिंह सिंधु व सिविल जज जूनियर डिविजन सचिन कुमार की बैंच ने रविवार को लोक अदालत का आयोजन किया। लोक अदालत का आयोजन हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एवं हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजन गुप्ता के निर्देशन पर किया गया। रविवार को प्रदेश के सभी 22 जिलों और 33 उपमंडलों पर लोक अदालतों का आयोजन किया गया। इसमें सिविल, आपराधिक, वैवाहिक, बैंक वसूली से संबंधित मामलों का निपटारा किया गया। न्यायमूर्ति राजन गुप्ता ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जींद में लोक अदालत का शुभारंभ किया।
न्यायाधीश जसबीर सिंह सिंधु ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 2819 केस समाधान के लिए रखे गए। इनमें से 137 केसों का समाधान आपसी सहमति से कर लिया गया। बैंक लोन विवाद के पूर्व में हुए 38 केसों का समाधान कर लगभग एक करोड़ दो लाख 61352 रुपये राशि की वसूली के लिए सहमति हुई। बैंक लोन के 18 पेंडिंग केसों में 91 लाख 70929 की सेटलमेंट हुई। इसी प्रकार वाहन दुर्घटना के केसों में 19 केसों का समाधान किया गया और एक करोड़ 14 लाख 80500 रुपये की सहमति हुई। चेक बांउस के 18 केसों में आपसी सहमति से एक करोड़ 72 लाख 11404 रुपये देने पर सहमति हुई। इसी प्रकार लोक अदालत में चार दिवानी केसों का समाधान किया गया और नौ आपराधिक केसों का निपटारा किया गया। ट्रैफिक चालान के 21 मामलों में एक लाख 18750 रुपये का जुर्माना लगाया गया और अन्य प्री लिटिगेटीव दो केसों का निपटान किया गया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने बताया कि इस प्रकार की लोक अदालतें काफी कारगर साबित हो रही हैं। इनमें बिना समय गवाएं केसों का समाधान हो जाता है और लोगों को शीघ्र और सस्ता न्याय मिलता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सुश्री रेखा ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण के निर्देशानुसार समय-समय पर राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें विशेष प्रकार के विवादों का निपटारा किया जा रहा है।
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न्यायाधीश जसबीर सिंह सिंधु ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 2819 केस समाधान के लिए रखे गए। इनमें से 137 केसों का समाधान आपसी सहमति से कर लिया गया। बैंक लोन विवाद के पूर्व में हुए 38 केसों का समाधान कर लगभग एक करोड़ दो लाख 61352 रुपये राशि की वसूली के लिए सहमति हुई। बैंक लोन के 18 पेंडिंग केसों में 91 लाख 70929 की सेटलमेंट हुई। इसी प्रकार वाहन दुर्घटना के केसों में 19 केसों का समाधान किया गया और एक करोड़ 14 लाख 80500 रुपये की सहमति हुई। चेक बांउस के 18 केसों में आपसी सहमति से एक करोड़ 72 लाख 11404 रुपये देने पर सहमति हुई। इसी प्रकार लोक अदालत में चार दिवानी केसों का समाधान किया गया और नौ आपराधिक केसों का निपटारा किया गया। ट्रैफिक चालान के 21 मामलों में एक लाख 18750 रुपये का जुर्माना लगाया गया और अन्य प्री लिटिगेटीव दो केसों का निपटान किया गया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने बताया कि इस प्रकार की लोक अदालतें काफी कारगर साबित हो रही हैं। इनमें बिना समय गवाएं केसों का समाधान हो जाता है और लोगों को शीघ्र और सस्ता न्याय मिलता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सुश्री रेखा ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण के निर्देशानुसार समय-समय पर राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें विशेष प्रकार के विवादों का निपटारा किया जा रहा है।
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