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मॉडल संस्कृति स्कूल उचाना में 17 अध्यापकों का तबादला, नहीं मिला कोई अध्यापक
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मॉडल संस्कृति स्कूल उचाना से तबादला नीति के तहत 17 अध्यापकों का तबादला होने पर अध्यापकों के 23 पद रिक्त होंगे। स्कूल में पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक 700 बच्चे पढ़ते हैं और इस स्कूल से 17 अध्यापकों का तबादला होने से बच्चों की पढ़ाई पर बड़ा असर पड़ेगा।
प्रदेश सरकार अध्यापकों के नई तबादला नीति के तहत तबादले किए हैं। इससे बच्चे शिक्षा से वंचित रह सकते हैं। सरकार का तर्क है कि इन विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम है लेकिन जो बच्चे इन विद्यालयों में पढ़ रहे हैं वह अपनी शिक्षा कैसे ग्रहण करेंगे क्योंकि अध्यापकों के तबादले के बाद यहां पर किसी नए अध्यापक की नियुक्ति तबादला नीति के तहत नहीं हुई है। इस स्कूल में अध्यापकों की कुल सेक्शन पोस्ट 45 है जिसमें से फिलहाल 17 अध्यापक ही मौजूद थे। इसके अलावा छह गेस्ट अध्यापक कार्यरत हैं। अब इन अध्यापकों के जाने के बाद स्कूल के छह गेस्ट अध्यापकों के सिर पर ही 700 विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। इस तबादला नीति के विरोध में जिलेभर में कई स्कूलों पर ग्रामीणों व विद्यार्थियों ने ताले जड़े हैं। जगह-जगह सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। दूसरी तरफ शिक्षक सरकार की इस नीति के कारण परेशान हैं। इस कारण उनको मजबूरन सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ रहा है।
खरैंटी गांव के स्कूल से नौ का तबादला, मिले तीन
अध्यापकों के तबादला प्रक्रिया ने खरैंटी गांव के राजकीय उच्च विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। इसके तहत अब इस स्कूल से हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक, संस्कृत, ड्राइंग, पीटीआई, मिडिल हेड व हेडमास्टर का तबादला किया गया है। इनके स्थान पर अब कुल तीन ही अध्यापक मिडिल हेड, संस्कृत व पीटीआई वापस आएंगे। स्कूल में छठी कक्षा से दसवीं तक 128 बच्चे हैं जिनको अब पढ़ाने के लिए यहां पर अध्यापक नहीं बचे।
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जहां ज्यादा अध्यापकों का तबादला हुआ है, वहां अध्यापकों की नियुक्ति के लिए लिखा जाएगा पत्र
जिले के जिस भी स्कूल में अध्यापकों का तबादला इस तबादला नीति के तहत हुआ है। वहां की जानकारी प्राप्त कर शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर अध्यापकों की मांग की जाएगी ताकि सभी स्कूलों में विद्यार्थियों को सुचारु रुप से शिक्षा दी जा सके।
-सदानंद वत्स, एडिशनल जिला शिक्षा अधिकारी, जींद।
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प्रदेश सरकार अध्यापकों के नई तबादला नीति के तहत तबादले किए हैं। इससे बच्चे शिक्षा से वंचित रह सकते हैं। सरकार का तर्क है कि इन विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम है लेकिन जो बच्चे इन विद्यालयों में पढ़ रहे हैं वह अपनी शिक्षा कैसे ग्रहण करेंगे क्योंकि अध्यापकों के तबादले के बाद यहां पर किसी नए अध्यापक की नियुक्ति तबादला नीति के तहत नहीं हुई है। इस स्कूल में अध्यापकों की कुल सेक्शन पोस्ट 45 है जिसमें से फिलहाल 17 अध्यापक ही मौजूद थे। इसके अलावा छह गेस्ट अध्यापक कार्यरत हैं। अब इन अध्यापकों के जाने के बाद स्कूल के छह गेस्ट अध्यापकों के सिर पर ही 700 विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। इस तबादला नीति के विरोध में जिलेभर में कई स्कूलों पर ग्रामीणों व विद्यार्थियों ने ताले जड़े हैं। जगह-जगह सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। दूसरी तरफ शिक्षक सरकार की इस नीति के कारण परेशान हैं। इस कारण उनको मजबूरन सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ रहा है।
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खरैंटी गांव के स्कूल से नौ का तबादला, मिले तीन
अध्यापकों के तबादला प्रक्रिया ने खरैंटी गांव के राजकीय उच्च विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। इसके तहत अब इस स्कूल से हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक, संस्कृत, ड्राइंग, पीटीआई, मिडिल हेड व हेडमास्टर का तबादला किया गया है। इनके स्थान पर अब कुल तीन ही अध्यापक मिडिल हेड, संस्कृत व पीटीआई वापस आएंगे। स्कूल में छठी कक्षा से दसवीं तक 128 बच्चे हैं जिनको अब पढ़ाने के लिए यहां पर अध्यापक नहीं बचे।
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जहां ज्यादा अध्यापकों का तबादला हुआ है, वहां अध्यापकों की नियुक्ति के लिए लिखा जाएगा पत्र
जिले के जिस भी स्कूल में अध्यापकों का तबादला इस तबादला नीति के तहत हुआ है। वहां की जानकारी प्राप्त कर शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर अध्यापकों की मांग की जाएगी ताकि सभी स्कूलों में विद्यार्थियों को सुचारु रुप से शिक्षा दी जा सके।
-सदानंद वत्स, एडिशनल जिला शिक्षा अधिकारी, जींद।