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नागरिक अस्पताल में नौकरी में फर्जीवाड़े का मामला
Updated Wed, 15 Aug 2018 12:17 AM IST
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नियुक्ति के बाद तत्कालीन डीसी से ली उम्मीदवारों की उम्र बढ़ाने की अनुमति, अब उनकी भूमिका पर उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। नागरिक अस्पताल में चार साल पहले हुई एनएचएम के तहत काउंसलर पदों की भर्ती अब बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि उम्मीदवारों का चयन पहले कर लिया गया और उनके दस्तावेजों की जांच बाद में हुई। ऐसे उम्मीदवारों का भी चयन हुआ, जो नियमानुसार प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र ही नहीं थे। इतना ही नहीं चयन कमेटी की आपत्ति के बावजूद पांच कर्मचारियों को नियुक्त किया गया। अब इस मामले में तत्कालीन सिविल सर्जन, चयन कमेटी के साथ-साथ तत्कालीन डीसी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं इस मामले की रिपोर्ट सीएम फ्लाइंग को बुधवार को भी नहीं जा सकी। चार काउंसलरों ने अपनी डिक्लेरेशन स्वास्थ्य विभाग को देने की बजाय जवाब दिया कि वे पहले ही डिक्लेरेशन दे चुके हैं, ऐसे में दोबारा डिक्लेरेशन नहीं देंगे। अब स्वास्थ्य विभाग इस मामले की रिपोर्ट सीएम फ्लांग को भेजेगा।
जानकारी के लिए एनएचएम के तहत 2014 में जींद जिले में 13 काउंसलर पदों के लिए भर्ती हुई थी। इसके लिए 32 उम्मीद्वारों ने आवेदन किए और 14 अगस्त 2014 को भर्ती की प्रक्रिया पूरी की गई। हैरानी की बात यह है कि काउंसलर के 13 पदों पर इस भर्ती की प्रक्रिया पूरी करने के बाद 18 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग की दस्तावेज जांच कमेटी ने दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान एक चयनित उम्मीदवार कमलेश को इस पद के लिए यह कहकर अयोग्य ठहरा दिया कि कमलेश की उम्र 46 साल है, जबकि काउंसलर पद के लिए एनएचएम मुख्यालय से जारी विज्ञापन में अधिकतम उम्र सीमा 45 साल रखी गई थी। जांच कमेटी ने टिप्पणी की कि कमेलश को नौकरी नहीं दी जा सकती। कमेटी ने कमलेश को लिखित परीक्षा में बैठने पर भी सवाल उठाए। दूसरी उम्मीदवार ममता को लेकर दस्तावेज जांच कमेटी ने कहा कि उसके शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण-पत्र मूलरूप में नहीं मिले हैं और वे भी पात्र नहीं हैं। विजय नामक उम्मीदवार के चयन पर कमेटी ने कहा कि वह जींद जिले से बाहर का है। सुषमा और एक अन्य उम्मीदवार के मामले में कहा गया कि वे भी आयोग्य हैं। दस्तावेज जांच कमेटी की इन टिप्पणियों और एतराज के बावजूद इन उम्मीदवारो को काउंसलर पदों पर नियुक्तियां दे दी गईं।
दस्तावेजों की जांच से पहले डीसी से ली उम्र में छूट की अनुमति
भर्ती को लेकर बड़ा गड़बड़झाला यह सामने आया है कि 14 अगस्त 2014 को भर्ती की गई। 18 अगस्त 2014 को चयनित उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच हुई, लेकिन इससे पहले ही 16 अगस्त 2014 को तत्कालीन डीसी राजीव रत्न से एक चयनित उम्मीदवार कमलेश के मामले में उम्र में छूट की अनुमति ली गई। इसके लिए सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा आधार बनाया गया कि पद ज्यादा हैं और इसके मुकाबले कम उम्मीदवार आए हैं। ऐसे में इस मामले में अब बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
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सीएम फ्लांग जांच में खुला मामला
भर्ती में इस तरह की गड़बड़ी का ममाला सीएम फ्लांग जांच के बाद खुला है। अब सीएम फ्लाइंग इस मामले की जांच कर रही है। सीएम फ्लाइंग ने सिविल सर्जन कार्यालय से काउंसलर के पद पर भर्ती हुए सभी 13 उम्मीदवारों के डिक्लेरेशन और शैक्षणिक योग्यता के मूलप्रमाण पत्र उपलब्ध करवाने को कहा है। इनमें से चार काउंसलरों कमलेश, सुमन, कुलदीप, ममता ने डिक्लेरेशन नहीं देकर नियुक्ति के समय वह अपने शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज और डिक्लेरेशन देने की बात कही है।
यूं जुड़ा है विवाद
दरअसल करीब एक महीना पहले नागरिक अस्पताल के नेत्र चिकित्सा सहायक राजबीर बेरवाल ने पत्रकार वार्ता कर सिविल सर्जन पर नौकरी के लिए मेडिकल मामले में उम्मीदवारों को परेशान करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद एनएचएम का जो मामला खुला उसमें एक उम्मीदवार कमलेश राजबीर बेरवाल की पत्नी हैं। इसके बाद अब राजबीर बेरवाल व सर्वकर्मचारी संघ सिविल सर्जन पर इस मामले में उन्हें बदनाम करने का आरोप लगा रहा है।
काउंसलर कमलेश, ममता, सुमन और कुलदीप के डिक्लेरेशन कमेटी को नहीं मिले हैं। इसकी रिपोर्ट वे सिविल सर्जन को करेंगे। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
डॉ. राजेश गांधी, डिप्टी सिविल सर्जन।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। नागरिक अस्पताल में चार साल पहले हुई एनएचएम के तहत काउंसलर पदों की भर्ती अब बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि उम्मीदवारों का चयन पहले कर लिया गया और उनके दस्तावेजों की जांच बाद में हुई। ऐसे उम्मीदवारों का भी चयन हुआ, जो नियमानुसार प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र ही नहीं थे। इतना ही नहीं चयन कमेटी की आपत्ति के बावजूद पांच कर्मचारियों को नियुक्त किया गया। अब इस मामले में तत्कालीन सिविल सर्जन, चयन कमेटी के साथ-साथ तत्कालीन डीसी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं इस मामले की रिपोर्ट सीएम फ्लाइंग को बुधवार को भी नहीं जा सकी। चार काउंसलरों ने अपनी डिक्लेरेशन स्वास्थ्य विभाग को देने की बजाय जवाब दिया कि वे पहले ही डिक्लेरेशन दे चुके हैं, ऐसे में दोबारा डिक्लेरेशन नहीं देंगे। अब स्वास्थ्य विभाग इस मामले की रिपोर्ट सीएम फ्लांग को भेजेगा।
जानकारी के लिए एनएचएम के तहत 2014 में जींद जिले में 13 काउंसलर पदों के लिए भर्ती हुई थी। इसके लिए 32 उम्मीद्वारों ने आवेदन किए और 14 अगस्त 2014 को भर्ती की प्रक्रिया पूरी की गई। हैरानी की बात यह है कि काउंसलर के 13 पदों पर इस भर्ती की प्रक्रिया पूरी करने के बाद 18 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग की दस्तावेज जांच कमेटी ने दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान एक चयनित उम्मीदवार कमलेश को इस पद के लिए यह कहकर अयोग्य ठहरा दिया कि कमलेश की उम्र 46 साल है, जबकि काउंसलर पद के लिए एनएचएम मुख्यालय से जारी विज्ञापन में अधिकतम उम्र सीमा 45 साल रखी गई थी। जांच कमेटी ने टिप्पणी की कि कमेलश को नौकरी नहीं दी जा सकती। कमेटी ने कमलेश को लिखित परीक्षा में बैठने पर भी सवाल उठाए। दूसरी उम्मीदवार ममता को लेकर दस्तावेज जांच कमेटी ने कहा कि उसके शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण-पत्र मूलरूप में नहीं मिले हैं और वे भी पात्र नहीं हैं। विजय नामक उम्मीदवार के चयन पर कमेटी ने कहा कि वह जींद जिले से बाहर का है। सुषमा और एक अन्य उम्मीदवार के मामले में कहा गया कि वे भी आयोग्य हैं। दस्तावेज जांच कमेटी की इन टिप्पणियों और एतराज के बावजूद इन उम्मीदवारो को काउंसलर पदों पर नियुक्तियां दे दी गईं।
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दस्तावेजों की जांच से पहले डीसी से ली उम्र में छूट की अनुमति
भर्ती को लेकर बड़ा गड़बड़झाला यह सामने आया है कि 14 अगस्त 2014 को भर्ती की गई। 18 अगस्त 2014 को चयनित उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच हुई, लेकिन इससे पहले ही 16 अगस्त 2014 को तत्कालीन डीसी राजीव रत्न से एक चयनित उम्मीदवार कमलेश के मामले में उम्र में छूट की अनुमति ली गई। इसके लिए सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा आधार बनाया गया कि पद ज्यादा हैं और इसके मुकाबले कम उम्मीदवार आए हैं। ऐसे में इस मामले में अब बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
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सीएम फ्लांग जांच में खुला मामला
भर्ती में इस तरह की गड़बड़ी का ममाला सीएम फ्लांग जांच के बाद खुला है। अब सीएम फ्लाइंग इस मामले की जांच कर रही है। सीएम फ्लाइंग ने सिविल सर्जन कार्यालय से काउंसलर के पद पर भर्ती हुए सभी 13 उम्मीदवारों के डिक्लेरेशन और शैक्षणिक योग्यता के मूलप्रमाण पत्र उपलब्ध करवाने को कहा है। इनमें से चार काउंसलरों कमलेश, सुमन, कुलदीप, ममता ने डिक्लेरेशन नहीं देकर नियुक्ति के समय वह अपने शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज और डिक्लेरेशन देने की बात कही है।
यूं जुड़ा है विवाद
दरअसल करीब एक महीना पहले नागरिक अस्पताल के नेत्र चिकित्सा सहायक राजबीर बेरवाल ने पत्रकार वार्ता कर सिविल सर्जन पर नौकरी के लिए मेडिकल मामले में उम्मीदवारों को परेशान करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद एनएचएम का जो मामला खुला उसमें एक उम्मीदवार कमलेश राजबीर बेरवाल की पत्नी हैं। इसके बाद अब राजबीर बेरवाल व सर्वकर्मचारी संघ सिविल सर्जन पर इस मामले में उन्हें बदनाम करने का आरोप लगा रहा है।
काउंसलर कमलेश, ममता, सुमन और कुलदीप के डिक्लेरेशन कमेटी को नहीं मिले हैं। इसकी रिपोर्ट वे सिविल सर्जन को करेंगे। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
डॉ. राजेश गांधी, डिप्टी सिविल सर्जन।