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15 साल पहले सड़क दुर्घटना में दोनों खोने के बावजूद जिंदगी की जंग में फर्राटे से दौड़ रही है एकता

Sat, 11 Aug 2018 12:41 AM IST
Updated Sat, 11 Aug 2018 12:41 AM IST
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15 साल पहले सड़क दुर्घटना में दोनों खोने के बावजूद जिंदगी की जंग में फर्राटे से दौड़ रही है एकता
सड़क दुर्घटना में आधा शरीर खोने के बाद भी जिंदगी की जंग में फर्राटे से दौड़ रहीं एकता
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। कहते हैं, जिनको हिम्मत होती है, उन्हें मंजिलें मिल ही जाती हैं। जिंदगी की तमाम कठिनाइयों को हराकर जीतने वाली हिसार जिले के जेवरा गांव निवासी एकता भ्याण का कहना भी इसी प्रकार की है। एकता ने 15 साल पहले सड़क दुर्घटना में अपने आधे शरीर को खोने वाली एकता भ्याण ने जिंदगी की जंग नहीं हारी और आज वह दूसरों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बनी हुई हैं।
2003 में सोनीपत में एकता व उसकी पांच छात्राएं वैन से जा रही थीं। इस दौरान एक ट्रक उनकी गाड़ी पर पलट गया। इस हादसे में एकता बुरी तरह घायल हुई, लेकिन उनकी जिंदगी बच गई। हादसे की वजह से एकता के दोनों पैर काम करना छोड़ दिए। इसके बाद एकता ने हिम्मत नहीं हारी। 2014 में एकता ने नई जिंदगी की शुरूआत की ओर खेल की दुनिया में कदम रखा। उसकी जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया जब उसकी मुलाकात क्लब थ्रो में अर्जुन अवॉर्डी अमित सरोहा से हुई। सरोहा ने उन्हें लगातार प्रेरित किया और इसके चलते 2016 में एकता ने राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स खेल में स्वर्ण पदक जीता। यहीं से उनकी सफलता का सफर शुरू होता है और उन्होंने लगातार सफलताएं हासिल कीं।
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प्रधानमंत्री की जुबान पर आई
एकता ने बताया कि उसे खेलों में मेडल जीतकर काफी अच्छा लगा, लेकिन 29 जुलाई को प्रधानमंत्री ने भी मन की बात में उसका नाम लिया। इससे बाद खिलाड़ी एकता भ्याण का हौसला और बढ़ा। अब एकता 2020 के टोक्यो पैरा खेलों में देश के लिए गोल्ड जीतने का लक्ष्य तय कर मेहनत कर रही हैं।
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जींद में दोस्त से मिलने पहुंची
शुक्रवार को एकता भ्याण अर्बन इस्टेट में अपनी दोस्त शीतल श्योकंद से मिलने पहुंची। दरअसल एकता व शीतल 2003 में दिल्ली में कोचिंग रही थीं। इसी दौरान यह हादसा हुआ।
अपनी जिंदगी को बेहतर तरीके से जी रही हूं
एकता ने बताया कि मैं नौ महीने अस्पताल में थी, लेकिन वहां मैने देखा कि लोग अस्पताल में व्हील चेयर पर रहने के बावजूद भी अपनी जिंदगी को बेहतर तरीके से जी रहे हैं। उसने कहा कि जीवन भले ही हमारे हाथ में न हो, लेकिन जीने का तरीका जरूर हमारे हाथ में है। ऐसे में एकता की जिंदगी वास्तव में संघर्ष की मिसाल है और दूसरों के लिए एक प्रेरणा का माध्यम है। अब एकता का लक्ष्य 2020 में टोक्यों में आयोजित होने वाले पैरा ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है।

नौकरी पीछे-पीछे रही, अब भी हिसार में रोजगार अधिकारी पद पर हैं तैनात
एकता भ्याण नौकरी के मामले में भी पीछे नहीं है। 2011 में फूड सप्लाई विभाग में ऑडिटर के पद पर तीन साल काम किया। उसके बाद उनका सलेक्शन रोजगार विभाग में हुआ। जहां एओ की पद पर नियुक्त हैं। इसके बाद भी एकता लगातार आगे बढ़ रही हैं।
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