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जिले में इस साल 154 एड्स रोगी मिली, 49 की हुई मौत
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एड्स जागरुकता वाहन को झंडी दिखाकर रवाना करते चिकित्सक। संवाद
- फोटो : Jind
जिले में इस वर्ष एड्स से मरने वाले रोगियों की संख्या 21 प्रतिशत बढ़ गई है। पिछले वर्ष एड्स संक्रमण के 265 मामले सामने आए थे, जिनमें से 28 लोगों की मौत हुई थी, जबकि इस वर्ष अब तक एड्स संक्रमण के 154 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 49 लोगों की मौत हो चुकी है। जिले में एड्स से मरने वालों का आंकड़ा काफी गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है।
जिले के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष एड्स रोगियों की संख्या में कमी आई है, लेकिन मौत के आंकड़े काफी भयानक हैं। यदि लोग नहीं सुधरे तो स्थिति काफी डरावनी होगी। स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर एड्स के बारे में जागरूक करने के लिए शिविर का आयोजन करता रहता है। इसके अलावा ट्रक यूनियन, वीटा प्लांट, जिला जेल, बस स्टैंड, विभिन्न बाजारों में शिवर लगाकर लोगों को जागरूक करता है। इसके अलावा समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक जागरूकता वाहन भी चलाया जाता है। नागरिक अस्पताल में एड्स मरीजों का इलाज भी किया जाता है। समय-समय पर उनकी जांच भी करवाई जाती है। यह सब स्वास्थ्य विभाग इन लोगों को निशुल्क उपलब्ध करवाता है। सीडी-4 काउंट तथा वायल लोड टेस्ट करवाए जाते हैं। यह जांच जींद में नहीं होती है। इसको करवाने के लिए पीड़ितों के रक्त के नमूने लेकर पीजीआई रोहतक भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद मरीजों को दवाई उसी हिसाब से दी जाती है।
बचाव ही उपचार
एड्स मुख्य रूप से एड्स पीड़ित व्यक्ति का संक्रमित खून चढ़ाने, असुरक्षित यौन संबंध बनाने और दूषित सिरिंज का इस्तेमाल करने से होता है। एड्स रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। इससे व्यक्ति को यदि कोई बीमारी लग जाती है तो वह ठीक नहीं हो पाती, जिससे उसकी मौत भी हो सकती है, इसलिए इससे बचाव ही इसका उपचार है।
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जिले में अब तक कुल 1732 एड्स संक्रमित लोग सामने आ चुके हैं। इस वर्ष 154 तथा पिछले वर्ष 265 संक्रमित सामने आए थे। पिछले वर्ष 28 लोगों की तथा इस वर्ष अब तक 49 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर कई जागरूकता शिविर लगाकर लोगों को सचेत किया जाता है। इसके अलावा नागरिक अस्पताल में एड्स पीड़ित लोगों का मुफ्त इलाज किया जाता है।
डॉ. संदीप लौहान, डिप्टी सिविल सर्जन।
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जिले के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष एड्स रोगियों की संख्या में कमी आई है, लेकिन मौत के आंकड़े काफी भयानक हैं। यदि लोग नहीं सुधरे तो स्थिति काफी डरावनी होगी। स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर एड्स के बारे में जागरूक करने के लिए शिविर का आयोजन करता रहता है। इसके अलावा ट्रक यूनियन, वीटा प्लांट, जिला जेल, बस स्टैंड, विभिन्न बाजारों में शिवर लगाकर लोगों को जागरूक करता है। इसके अलावा समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक जागरूकता वाहन भी चलाया जाता है। नागरिक अस्पताल में एड्स मरीजों का इलाज भी किया जाता है। समय-समय पर उनकी जांच भी करवाई जाती है। यह सब स्वास्थ्य विभाग इन लोगों को निशुल्क उपलब्ध करवाता है। सीडी-4 काउंट तथा वायल लोड टेस्ट करवाए जाते हैं। यह जांच जींद में नहीं होती है। इसको करवाने के लिए पीड़ितों के रक्त के नमूने लेकर पीजीआई रोहतक भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद मरीजों को दवाई उसी हिसाब से दी जाती है।
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बचाव ही उपचार
एड्स मुख्य रूप से एड्स पीड़ित व्यक्ति का संक्रमित खून चढ़ाने, असुरक्षित यौन संबंध बनाने और दूषित सिरिंज का इस्तेमाल करने से होता है। एड्स रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। इससे व्यक्ति को यदि कोई बीमारी लग जाती है तो वह ठीक नहीं हो पाती, जिससे उसकी मौत भी हो सकती है, इसलिए इससे बचाव ही इसका उपचार है।
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जिले में अब तक कुल 1732 एड्स संक्रमित लोग सामने आ चुके हैं। इस वर्ष 154 तथा पिछले वर्ष 265 संक्रमित सामने आए थे। पिछले वर्ष 28 लोगों की तथा इस वर्ष अब तक 49 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर कई जागरूकता शिविर लगाकर लोगों को सचेत किया जाता है। इसके अलावा नागरिक अस्पताल में एड्स पीड़ित लोगों का मुफ्त इलाज किया जाता है।
डॉ. संदीप लौहान, डिप्टी सिविल सर्जन।