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बाजारों में अतिक्रमण हटाने के लिए नगरपरिषद ने खींची लक्ष्मण रेखा
Updated Mon, 04 Dec 2017 12:20 AM IST
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नप ने बाजार में लगाई पीली पट्टी, इससे आगे सामान रखा जो होगी जब्ती
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
शहर के बाजारों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए नगर परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। अतिक्रमण हटाने के लिए नगर परिषद ने शहर के बाजार की दुकानों के आगे एक पीली रेखा खींच दी है। ताकि दुकानदार इस पीली रेखा की हद में अपना सामान रखें। यदि कोई दुकानदार इस रेखा की हद से बाहर सामान रखता है तो उसका सामान जब्त कर लिया जाएगा, इसके साथ उसका चालान भी काटा जाएगा।
रविवार को मेन बाजार से नगर परिषद ने पीली लाइन बनाने का काम शुरू किया। यहां करीब दो साल पहले ही नगर परिषद ने अतिक्रमण हटाकर मेन बाजार की गली को चार फुट तक चौड़ा करवाया था। दो साल बाद फिर से कच्चे अतिक्रमण के कारण मेन बाजार की गली फिर से सिकुड़ गई है। इसके अलावा शहर के रोहतक रोड, रेलवे रोड, रानीतालाब, पुरानी सब्जी मंडी, शिव चौक और हांसी रोड सहित तमाम जगहों पर भी दुकानदार करीब दस फुट तक सामान दुकानों के आगे रख लेते हैं। अब नगर परिषद दुकानों के बाहर बनी नाली के किनारे पर निशान लगा दिया है। इसके बाद दुकानदार के पास सामान रखने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।
राहगीरों के लिए आफत
दुकानदारों द्वारा सामान दुकानों बाहर कई-कई फुट तक रख लेने से पैदल चलने वाले राहगीरों को काफी दिक्कत होती है। इससे लोगों को पैदल फुटपाथ पर नहीं सड़कों पर ही चलना पड़ता है। इसके चलते दुर्घटनाएं होने का भी अंदेशा बना रहता है।
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पहले से चल रहा है अभियान
नगर परिषद ने अतिक्रमण के खिलाफ कई दिन से अभियान चला रखा है। इसके तहत नगर परिषद की टीम हर दिन बाजारों में निकलती है और यहां बाहर रखे सामान को उठाती है। इस अभियान के बावजूद अतिक्रमण हट नहीं रहा है।
व्यापारियों से हो चुकी है मीटिंग
अभियान शुरू करने से पहले नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान ने शहर के सभी व्यापारिक संगठनों के साथ मीटिंग की थी। इसमें साफ शब्दों में दुकानों के बाहर अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए गए थे। अब नगर परिषद ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
रेहड़ियों से लेते हैं किराया
नगर परिषद अधिकारियों की मानें तो कई दुकानदार अपनी दुकानों के बाहर रेहड़ी या फड़ पर सामान बेचने वालों को रखते हैं। इन से प्रति माह 500 रुपये से दो हजार रुपये तक किराया भी लिया जाता है।
लगा जाम
दुकानों के आगे अतिक्रमण होने से शहर में जाम की स्थिति बनी रहती है। इंदिरा बाजार से देवीलाल चौक और नगर परिषद कार्यालय तक अतिक्रमण के चलते हर दिन जाम की स्थिति रहती है। यहां अक्सर जाम के कारण लोगों के झगड़े भी होते हैं।
नगर परिषद ने अतिक्रमण के खिलाफ मुहिम चलाई है। इसके लिए व्यापारिक संगठनों का पहले ही सूचित कर दिया था। फुटपाथ पूरी तरह से पैदल यात्रियों के लिए है। इस पर कब्जा होने से परेशानी होती है। अतिक्रमण को किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा। शहर को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त बनाने का अभियान चल रहा है।
डॉ. एसके चौहान, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद जींद।
03जेएनडी20: मेन बाजार में दुकानों के बाहर पीली लाइन लगाते नगरपरिषद के कर्मचारी।
03जेएनडी21: दुकान के बाहर से सामान उठाते नगरपरिषद के कर्मचारी।03जेएनडी24: मेन बाजार में दुकानों के बाहर किया गया अतिक्रमण।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
शहर के बाजारों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए नगर परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। अतिक्रमण हटाने के लिए नगर परिषद ने शहर के बाजार की दुकानों के आगे एक पीली रेखा खींच दी है। ताकि दुकानदार इस पीली रेखा की हद में अपना सामान रखें। यदि कोई दुकानदार इस रेखा की हद से बाहर सामान रखता है तो उसका सामान जब्त कर लिया जाएगा, इसके साथ उसका चालान भी काटा जाएगा।
रविवार को मेन बाजार से नगर परिषद ने पीली लाइन बनाने का काम शुरू किया। यहां करीब दो साल पहले ही नगर परिषद ने अतिक्रमण हटाकर मेन बाजार की गली को चार फुट तक चौड़ा करवाया था। दो साल बाद फिर से कच्चे अतिक्रमण के कारण मेन बाजार की गली फिर से सिकुड़ गई है। इसके अलावा शहर के रोहतक रोड, रेलवे रोड, रानीतालाब, पुरानी सब्जी मंडी, शिव चौक और हांसी रोड सहित तमाम जगहों पर भी दुकानदार करीब दस फुट तक सामान दुकानों के आगे रख लेते हैं। अब नगर परिषद दुकानों के बाहर बनी नाली के किनारे पर निशान लगा दिया है। इसके बाद दुकानदार के पास सामान रखने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।
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राहगीरों के लिए आफत
दुकानदारों द्वारा सामान दुकानों बाहर कई-कई फुट तक रख लेने से पैदल चलने वाले राहगीरों को काफी दिक्कत होती है। इससे लोगों को पैदल फुटपाथ पर नहीं सड़कों पर ही चलना पड़ता है। इसके चलते दुर्घटनाएं होने का भी अंदेशा बना रहता है।
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पहले से चल रहा है अभियान
नगर परिषद ने अतिक्रमण के खिलाफ कई दिन से अभियान चला रखा है। इसके तहत नगर परिषद की टीम हर दिन बाजारों में निकलती है और यहां बाहर रखे सामान को उठाती है। इस अभियान के बावजूद अतिक्रमण हट नहीं रहा है।
व्यापारियों से हो चुकी है मीटिंग
अभियान शुरू करने से पहले नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान ने शहर के सभी व्यापारिक संगठनों के साथ मीटिंग की थी। इसमें साफ शब्दों में दुकानों के बाहर अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए गए थे। अब नगर परिषद ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
रेहड़ियों से लेते हैं किराया
नगर परिषद अधिकारियों की मानें तो कई दुकानदार अपनी दुकानों के बाहर रेहड़ी या फड़ पर सामान बेचने वालों को रखते हैं। इन से प्रति माह 500 रुपये से दो हजार रुपये तक किराया भी लिया जाता है।
लगा जाम
दुकानों के आगे अतिक्रमण होने से शहर में जाम की स्थिति बनी रहती है। इंदिरा बाजार से देवीलाल चौक और नगर परिषद कार्यालय तक अतिक्रमण के चलते हर दिन जाम की स्थिति रहती है। यहां अक्सर जाम के कारण लोगों के झगड़े भी होते हैं।
नगर परिषद ने अतिक्रमण के खिलाफ मुहिम चलाई है। इसके लिए व्यापारिक संगठनों का पहले ही सूचित कर दिया था। फुटपाथ पूरी तरह से पैदल यात्रियों के लिए है। इस पर कब्जा होने से परेशानी होती है। अतिक्रमण को किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा। शहर को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त बनाने का अभियान चल रहा है।
डॉ. एसके चौहान, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद जींद।
03जेएनडी20: मेन बाजार में दुकानों के बाहर पीली लाइन लगाते नगरपरिषद के कर्मचारी।
03जेएनडी21: दुकान के बाहर से सामान उठाते नगरपरिषद के कर्मचारी।03जेएनडी24: मेन बाजार में दुकानों के बाहर किया गया अतिक्रमण।