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दस किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चली पछवा हवा, पीएम 2.5 की स्थिति सुधरी, एक्यूआई अभी भी खतरनाक स्तर पर
Updated Fri, 09 Nov 2018 11:34 PM IST
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प्रदूषण खतरनाक स्तर पर, नहीं करवाया पानी का छिड़काव
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पिछले कई दिनों से पर्यावरण प्रदूषण के स्तर में शुक्रवार को कुछ राहत तो मिली, लेकिन एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) अभी खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। हालांकि शुक्रवार को पीएम 2.5 मानक का स्तर सामान्य रहा, लेकिन एक्यूआई 366 तक पहुंच गया। इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार शहर में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण प्रदूषण स्तर बढ़ा है। इसमें दोबारा निर्माण के लिए उखाड़ी गई शहर की सड़कों की मुख्य भूमिका है। इसके बावजूद जिला प्रशासन सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं करवा सका। पानी का छिड़काव होने से लोगों को आंशिक राहत मिल सकती है।
पिछले गई दिनों से जींद शहर में एक्यूआई 300 से पार चल रहा है। दिवाली की रात यह 550 तक पहुंच गया और अगले दिन 367 तक रहा। इसके बाद शुक्रवार को करीब दस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पछुआ हवा चली। इससे प्रदूषण का स्तर कुछ कम हुआ है। एक ओर जहां वीरवार को पीएम 2.5 का स्तर 300 तक पहुंच गया था, वह शुक्रवार दोपहर को 122 से भी नीचे आ गया। इसी प्रकार पीएम 10 का स्तर जो 500 से अधिक चला गया था, वह 22.24 तक आ गया। मौसम में नमी बढ़ने के कारण अब हवा में मौजूद प्रदूषण के कण भारी होकर नीचे आ रहे हैं। साथ ही हवा चलने से प्रदूषण के कण हट रहे हैं।
एनजीटी के आदेशों की अवहेलना करने पर ईंट भट्टे को किया बंद
वातावरण में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए एनजीटी ने प्रदेश में दस नवंबर तक भट्टों को बंद करने के आदेश दिए थे। इन आदेशों की अवहेलना कर मोहनगढ़ छापड़ा के शंकर भट्टे को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने बंद करवाया है। इस भट्टे पर एनजीटी के आदेशों की अवहेलना करने की शिकायत मुख्यालय को भी दी है। जिले में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम करने के लिए एनजीटी ने भट्टों को जिक जैग सिस्टम के तहत चलने के आदेश दिए थे। इस सिस्टम के तहत चलने वाले भट्टों को भी एक से दस नवंबर तक बंद के आदेश जारी किए गए थे।
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इस भट्टे को इन दिनों में आदेशों के विपरीत चलाया जा रहा था। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि मोहनगढ़ छापड़ा में शंकर भट्टा चला हुआ है। इस पर विभाग की टीम ने मुआयना किया तो भट्टा चलता मिला। इस पर भट्टे को दस नवंबर तक बंद रखने के आदेश देकर विभागीय कार्रवाई की गई।
सामाजिक संस्थाओं ने बांटे मास्क
बढ़ते प्रदूषण के चलते जहरीली हो चुकी शहर की हवा से बचाव के लिए शुक्रवार को शहर की कई सामाजिक संस्थाओं ने मास्क वितरित किए गए। अखिल भारतीय अग्रवाल समाज, महात्मा गांधी शिक्षा एवं समाज विकास संगठन तथा अखिल भारतीय वैष्णव बैरागी परिषद द्वारा संयुक्त रूप से पर्यावरण को बचाने के लिए शहर के रानी तालाब पर मास्क वितरण अभियान चलाया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग से डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला मौजूद रहे। डॉ. राजेश भोला ने कहा कि पर्यावरण रक्षा के लिए कई नियम भी बनाए गए हैं। जैसे खुले में कचरा नहीं जलाने एवं प्रेशर हार्न नहीं बजाने का नियम है।
शहर में निर्माण कार्य चल रहे हैं, इसके चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए अर्बन इस्टेट की उखाड़ी गई गलियों पर वाटर फॉगिंग करवाई जानी है। शुक्रवार को मशीन जींद नहीं पहुंच पाई। जल्द ही छिड़काव करवाया जाएगा।
विनय गिल, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पिछले कई दिनों से पर्यावरण प्रदूषण के स्तर में शुक्रवार को कुछ राहत तो मिली, लेकिन एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) अभी खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। हालांकि शुक्रवार को पीएम 2.5 मानक का स्तर सामान्य रहा, लेकिन एक्यूआई 366 तक पहुंच गया। इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार शहर में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण प्रदूषण स्तर बढ़ा है। इसमें दोबारा निर्माण के लिए उखाड़ी गई शहर की सड़कों की मुख्य भूमिका है। इसके बावजूद जिला प्रशासन सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं करवा सका। पानी का छिड़काव होने से लोगों को आंशिक राहत मिल सकती है।
पिछले गई दिनों से जींद शहर में एक्यूआई 300 से पार चल रहा है। दिवाली की रात यह 550 तक पहुंच गया और अगले दिन 367 तक रहा। इसके बाद शुक्रवार को करीब दस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पछुआ हवा चली। इससे प्रदूषण का स्तर कुछ कम हुआ है। एक ओर जहां वीरवार को पीएम 2.5 का स्तर 300 तक पहुंच गया था, वह शुक्रवार दोपहर को 122 से भी नीचे आ गया। इसी प्रकार पीएम 10 का स्तर जो 500 से अधिक चला गया था, वह 22.24 तक आ गया। मौसम में नमी बढ़ने के कारण अब हवा में मौजूद प्रदूषण के कण भारी होकर नीचे आ रहे हैं। साथ ही हवा चलने से प्रदूषण के कण हट रहे हैं।
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एनजीटी के आदेशों की अवहेलना करने पर ईंट भट्टे को किया बंद
वातावरण में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए एनजीटी ने प्रदेश में दस नवंबर तक भट्टों को बंद करने के आदेश दिए थे। इन आदेशों की अवहेलना कर मोहनगढ़ छापड़ा के शंकर भट्टे को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने बंद करवाया है। इस भट्टे पर एनजीटी के आदेशों की अवहेलना करने की शिकायत मुख्यालय को भी दी है। जिले में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम करने के लिए एनजीटी ने भट्टों को जिक जैग सिस्टम के तहत चलने के आदेश दिए थे। इस सिस्टम के तहत चलने वाले भट्टों को भी एक से दस नवंबर तक बंद के आदेश जारी किए गए थे।
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इस भट्टे को इन दिनों में आदेशों के विपरीत चलाया जा रहा था। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि मोहनगढ़ छापड़ा में शंकर भट्टा चला हुआ है। इस पर विभाग की टीम ने मुआयना किया तो भट्टा चलता मिला। इस पर भट्टे को दस नवंबर तक बंद रखने के आदेश देकर विभागीय कार्रवाई की गई।
सामाजिक संस्थाओं ने बांटे मास्क
बढ़ते प्रदूषण के चलते जहरीली हो चुकी शहर की हवा से बचाव के लिए शुक्रवार को शहर की कई सामाजिक संस्थाओं ने मास्क वितरित किए गए। अखिल भारतीय अग्रवाल समाज, महात्मा गांधी शिक्षा एवं समाज विकास संगठन तथा अखिल भारतीय वैष्णव बैरागी परिषद द्वारा संयुक्त रूप से पर्यावरण को बचाने के लिए शहर के रानी तालाब पर मास्क वितरण अभियान चलाया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग से डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला मौजूद रहे। डॉ. राजेश भोला ने कहा कि पर्यावरण रक्षा के लिए कई नियम भी बनाए गए हैं। जैसे खुले में कचरा नहीं जलाने एवं प्रेशर हार्न नहीं बजाने का नियम है।
शहर में निर्माण कार्य चल रहे हैं, इसके चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए अर्बन इस्टेट की उखाड़ी गई गलियों पर वाटर फॉगिंग करवाई जानी है। शुक्रवार को मशीन जींद नहीं पहुंच पाई। जल्द ही छिड़काव करवाया जाएगा।
विनय गिल, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।