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पटाखों के शोर व जहरीले धुंए में दबे, सुप्रीम कोर्ट के आदेश --सामान्य पटाखों की बिक्री व प्रयोग पर रोक नहीं लगा पाया प्रशासन, रात

Fri, 09 Nov 2018 12:01 AM IST
Updated Fri, 09 Nov 2018 12:01 AM IST
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पटाखों के शोर व जहरीले धुंए में दबे, सुप्रीम कोर्ट के आदेश --सामान्य पटाखों की बिक्री व प्रयोग पर रोक नहीं लगा पाया प्रशासन, रात
पटाखों के धुएं से खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। दिवाली के उत्साह और प्रशासन की उदासीनता के कारण सुप्रीम कोर्ट के रोक के बाद भी लोगों ने प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों का जमकर प्रयोग किया। लोगों को दिवाली पर ग्रीन पटाखों के प्रयोग करने के सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश देने के बाद भी लोगों ने खुलकर पटाखों का प्रयोग किया। बिना लाइसेंस पटाखे बेचने के आदेश की अवहेलना भी हुई। जिले में इस बार पटाखों की बिक्री के लिए किसी को भी लाइसेंस नहीं मिला था मगर दुकानदारों ने जमकर पटाखे बेचे। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय रात आठ से दस बजे के बाद रात 12 बजे तक पटाखे चलते रहे। इससे जींद की हवा काफी जहरीली हो गई। रात 12 बजे जींद शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 561.33 तक पहुंच गया। हालांकि सुबह तक इसमें कुछ गिरावट दर्ज की गई। सुबह साढ़े दस बजे एक्यूआई 367 दर्ज किया गया। दिन के समय हवा चलने से कुछ राहत मिली, लेकिन यह खतरनाक स्तर तक रहा। दोपहर बाद चार बजे एक्यूआई 355 दर्ज किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार आने वाले एक-दो दिन तक पटाखों के धुएं का असर रहेगा।
सामान्यतौर पर पर्यावरण का स्तर सस्पेक्टिड पार्टीकुलर मेटल (एसपीएम) के आधार पर मापा जाता है। इसके दो प्रकार होते हैं। पीएम 2.5 व पीएम 10। पीएम 2.5 में पर्यावरण में प्रदूषण के बहुत ही महीन कणों की संख्या बढ़ जाती है। वहीं पीएम 10 में कुछ बड़े पार्टीकुलर हवा में बढ़ जाते हैं। पीएम 2.5 प्रदूषण बढ़ने से सांस लेने में तकलीफ होती है और आंखों में जलन होती है, जबकि पीएम 10 प्रदूषण स्तर बढ़ने से हवा में स्मॉग छा जाता है। इससे दृश्यता कम होती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार जींद में पीएम 10 प्रदूषण स्तर 500 से 600 व पीएम 2.5 का स्तर 325 दर्ज किया गया है। यह व्यक्ति के जिंदा रहने के लिए उपयुक्त स्तर से कई गुना ज्यादा है। सामान्यतौर पर पीएम 10 का स्तर 100 व पीएम 2.5 का स्तर 60 तक होना चाहिए।
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मार्केट में ही नहीं थे ग्रीन क्रैकर
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिर्फ ग्रीन क्रैकर के प्रयोग के आदेश के बावजूद सामान्य पटाखों का प्रयोग हुआ है। जींद शहर में पटाखे बिक्री के लिए स्टाल की मंजूरी नहीं होने के बावजूद आसपास के शहरों से पटाखे लाए गए। हालांकि सूत्रों के अनुसार जींद शहर में भी अवैध रूप से करीब एक करोड़ रुपये के पटाखों की बिक्री हुई है, पर इनमें ग्रीन क्रैकर नहीं थे। इससे प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा है।
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प्रशासन की सख्ती नहीं आई काम
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार वायु प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए सिर्फ ग्रीन क्रैकर ही बेचने के आदेश दिए थे। प्रशासन ने भी पटाखा व्यापारियों से ग्रीन क्रैकर अंडरटेंकिंग नहीं होने की वजह से एक भी लाइसेंस व्यापारियों को नहीं मिल पाया था, लेकिन इसके बाद भी पटाखा व्यापारियों ने अवैध रूप से पटाखे बेचे और रातभर भारी भरकम आवाज में पटाखे बजते रहे।
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अवैध पटाखे बेचते पांच लोग काबू, दो क्विंटल पटाखे बरामद
अदालत की सख्ती का असर यह रहा कि प्रशासन सतर्क रहा। हालांकि पटाखों के प्रयोग को प्रशासन रोक नहीं पाया, पर अवैध तौर पर पटाखे बचते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जुलाना पुलिस ने वार्ड आठ निवासी अंकित को राजगढ़ मोड़ से एक क्विंटल 835 ग्राम पटाखों के साथ काबू किया है। नरवाना पुलिस ने हरिकेश को पंजाबी मोहल्ला से पांच किलोग्राम व वेदप्रकाश को दो किलो 470 ग्राम पटाखों के साथ काबू किया है। सफीदों पुलिस ने वार्ड 12 निवासी विकास को 29 किलोग्राम पटाखों के साथ काबू किया है। सफीदों पुलिस ने ही वार्ड पांच निवासी संदीप के कब्जे से 52 किलोग्राम व 500 ग्राम पटाखों के साथ काबू किया है। कुल एक क्विंटल 89 किलोग्राम 805 ग्राम पटाखे बरामद किए गए हैं।
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स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है इतना अधिक प्रदूषण
एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) पीएम 10 हवा की गुणवत्ता को दर्शाता है। एक्यूआई पीएम 10 का स्तर शून्य से 50 वायु गुणवत्ता को सेहत के लिए अच्छा रहता है। वही एक्यूआई 10 स्तर 51 से 100 वायु गुणवत्ता को सेहत के लिए औसतन माना जाता है। 101 से 200 तक वायु गुणवत्ता मॉडरेट, 201 से 300 तक बुरा, 301 से 400 तक बहुत बुरा व 401 से अधिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होता है। ऐसे में दिवाली पर विस्फोटक पटाखे बजाने से एक्यूआई पीएम 10 550 के पार चला गया था, जो सेहत के लिए काफी खतरनाक है।
वर्जन
रात के समय हवा नहीं चलने और पटाखे चलने के कारण प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया था। दिन में कुछ राहत मिली। शुक्रवार वाटर फॉगिंग मशीन से शहर में पानी का छिड़काव करवाया जाएगा। इससे प्रदूषण का स्तर काफी कम होगा।

विनय गिल, एसडीओ, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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प्रशासन ने की है कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सिर्फ ग्रीन पटाखों की बिक्री ही की जानी थी। ऐसे में सामान्य पटाखों के लिए लाइसेंस नहीं दिए गए। जो लोग अवैध तरीके से पटाखे बेचते पाए गए,उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
अमित खत्री, डीसी।
फोटो नंबर
08जेएनडी 06, 08, 12: अर्बन इस्टेट में जलाए गए विस्फोटक पटाखों का दृश्य।
08जएनडी 16 व 17: राजकीय मिडिल स्कूल जीवनपुर में दीप जलाती छात्राएं व मुख्य अध्यापिका सुनीता मलिक।
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