{"_id":"5b19870b4f1c1b214d8b5436","slug":"11528399627-jind-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूग्ध समिति संचालकों की सात दिन की हड़ताल के सामने झूकी सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दूग्ध समिति संचालकों की सात दिन की हड़ताल के सामने झूकी सरकार
Updated Fri, 08 Jun 2018 12:57 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। दूध उत्पादकों को सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि अब उत्पादकों के नहीं, समितियों के खाते में जाएगी। एक सप्ताह की दुग्ध समितियों की हड़ताल पर सरकार झुक गई है। इससे दी जींद-हिसार मिल्क प्लांट को दूध सप्लाई करने वाले करीब साढ़े तीन हजार किसान प्रभावित होंगे। दुग्ध समिति संचालकों की पांच रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि को लेकर सात दिन से चल रही हड़ताल के सामने प्रदेश सरकार ने घुटने टेककर उनकी सभी प्रोत्साहन राशि की मांग को समिति संचालकों के खाते में डालने की मांग को स्वीकार कर लिया है। दुग्ध समिति संचालकों ने अपनी इस मांग को मनवाने के लिए प्लांट में होने वाली दूध सप्लाई को पूर्ण रूप से रोक दिया था। जिस कारण वीटा प्लांट में एक सप्ताह से पाउडर से दूध व अन्य उत्पादन तैयार किए जा रहे थे।
वीटा मिल्क प्लांट के सीईओ राजेंद्र सिंह और दुग्ध समिति के चेयरमैन सुरेंद्र सिंह बताया कि प्रदेश सरकार ने उत्पादकों की समस्या को देखते हुए यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर गांवों में बैंक नहीं होने के कारण और कम राशि के लिए दुग्ध उत्पादकों को दूर के चक्कर नहीं काटने पड़े। इस समस्या से दुग्ध उत्पादकों को नहीं जूझना पड़े, इसके लिए यह फैसला लिया है। चेयरमैन सुरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला और वीटा प्लांट के मुख्यालय की तरफ से इस मांग को माने जाने की जानकारी प्राप्त हुई है।
ऐसे समझें पूरा मामला
प्रदेश सरकार ने पिछले साल अप्रैल से सितंबर तक वीटा को दूध सप्लाई करने वाले किसानों को प्रति लीटर पांच रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। नियमानुसार यह राशि उन किसानों को जानी चाहिए, जिन्होंने दूध का उत्पादन किया, लेकिन किसान से दूध लेकर सहकारी समितियां वीटा को भेजती हैं। अब यह राशि दूध उत्पादकों के पास नहीं जाकर बिचौलियों के पास जाएगी। वीटा मिल्क प्लांट के सूत्रों के अनुसार यह राशि करीब सात करोड़ रुपये हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जींद। दूध उत्पादकों को सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि अब उत्पादकों के नहीं, समितियों के खाते में जाएगी। एक सप्ताह की दुग्ध समितियों की हड़ताल पर सरकार झुक गई है। इससे दी जींद-हिसार मिल्क प्लांट को दूध सप्लाई करने वाले करीब साढ़े तीन हजार किसान प्रभावित होंगे। दुग्ध समिति संचालकों की पांच रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि को लेकर सात दिन से चल रही हड़ताल के सामने प्रदेश सरकार ने घुटने टेककर उनकी सभी प्रोत्साहन राशि की मांग को समिति संचालकों के खाते में डालने की मांग को स्वीकार कर लिया है। दुग्ध समिति संचालकों ने अपनी इस मांग को मनवाने के लिए प्लांट में होने वाली दूध सप्लाई को पूर्ण रूप से रोक दिया था। जिस कारण वीटा प्लांट में एक सप्ताह से पाउडर से दूध व अन्य उत्पादन तैयार किए जा रहे थे।
वीटा मिल्क प्लांट के सीईओ राजेंद्र सिंह और दुग्ध समिति के चेयरमैन सुरेंद्र सिंह बताया कि प्रदेश सरकार ने उत्पादकों की समस्या को देखते हुए यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर गांवों में बैंक नहीं होने के कारण और कम राशि के लिए दुग्ध उत्पादकों को दूर के चक्कर नहीं काटने पड़े। इस समस्या से दुग्ध उत्पादकों को नहीं जूझना पड़े, इसके लिए यह फैसला लिया है। चेयरमैन सुरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला और वीटा प्लांट के मुख्यालय की तरफ से इस मांग को माने जाने की जानकारी प्राप्त हुई है।
विज्ञापन
ऐसे समझें पूरा मामला
प्रदेश सरकार ने पिछले साल अप्रैल से सितंबर तक वीटा को दूध सप्लाई करने वाले किसानों को प्रति लीटर पांच रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। नियमानुसार यह राशि उन किसानों को जानी चाहिए, जिन्होंने दूध का उत्पादन किया, लेकिन किसान से दूध लेकर सहकारी समितियां वीटा को भेजती हैं। अब यह राशि दूध उत्पादकों के पास नहीं जाकर बिचौलियों के पास जाएगी। वीटा मिल्क प्लांट के सूत्रों के अनुसार यह राशि करीब सात करोड़ रुपये हो सकती है।
विज्ञापन