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केंद्रीय मंत्री के गांव पीएचसी सैंटर में नहीं मिले डॉक्टर, तो महिला ने गेट पर ही दिया बच्चे को जन्म
Updated Thu, 08 Feb 2018 12:10 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
मंगलवार देर रात केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के पैतृक गांव डूमरखां में पीएचसी में स्टाफ नहीं होने से महिला ने पीएचसी के गेट पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्टाफ की कमी बता रहे हैं। केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के गांव की यह घटना सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवालिया निशान बना हुआ है। गुस्साए ग्रामीणों ने पीएचसी सेंटर को ताला जड़कर रोष जताया और प्रशासन व सरकार को आंदोलन शुरू करने की भी चेतावनी दी है।
डूमरखां गांव निवासी नवीन ने बताया कि मंगलवार को देर रात उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके चलते वह पत्नी को पीएचसी में लेकर पहुंचा, लेकिन वहां पर कोई कर्मचारी नहीं मिला और जब वह मुकेश को लेकर पीएचसी से बाहर निकल रहे थे मुकेश ने गेट पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद वहां पर स्टाफ नर्स पहुंची। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी इस प्रकार की घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अगर विभाग यह कह दे कि यहां पर लोगों के लिए कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं है तो लोग सीधे शहर के अस्पताल में तो जाकर अपना इलाज करवा सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने यहां पीएचसी तो बनाई, लेकिन सुविधाएं नहीं दी हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अगर इस डिलीवरी के जन्म या उसकी मां को कुछ हुआ तो उसका जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग होगा। फिलहाल जच्चा व बच्चा सुरक्षित हैं।
पुलिस ने खुलवाया ताला
तालाबंदी की सुचना मिलते ही नरवाना सदर थाना प्रभारी राजाराम व उचाना नागरिक अस्पताल के डेंटल सर्जन डॉ. राजेश मित्तल मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाबुझा कर ताला खुलवाया। डॉक्टर राजेश मित्तल ने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की मांग को उच्च अधिकारियों के पास भेजकर समस्या का समाधान करवाया जाएगा। पहले यहां दो नर्स थी, लेकिन जो नियमित नहीं थी, लेकिन ये दोनों नर्स नियमित हो गई है।
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डूमरखा में दो स्टाफ तैनात हैं, सुबह के समय में जिस नर्स की ड्यूटी थी वह थोड़ी देर बार केंद्र पर पहुंच गई थी। इसके बाद महिला की डिलीवरी करवाई गई। अब जच्चा बच्चा सुरक्षित है, लोगों को समझाबुझा कर ताला भी खुलवा दिया गया है।
राजेश मित्तल, डेंटल सर्जन उचाना।
स्टाफ की कमी, होगी जांच
डूमरखा पीएचसी में दो स्टाफ नर्स है, जिसमें दोनों स्टाफ नर्स नियमित नहीं थी उनमें से एक स्टाफ नर्स नियमित हुई है, जो जींद नागरिक अस्पताल आई थी। स्टाफ की तो पहले से ही कमी है। और यह मामला संज्ञान में आया है, इसके लिए जांच कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच की जाएगी।
डॉ. पालेराम, एसएमओ।
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जींद।
मंगलवार देर रात केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के पैतृक गांव डूमरखां में पीएचसी में स्टाफ नहीं होने से महिला ने पीएचसी के गेट पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्टाफ की कमी बता रहे हैं। केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के गांव की यह घटना सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवालिया निशान बना हुआ है। गुस्साए ग्रामीणों ने पीएचसी सेंटर को ताला जड़कर रोष जताया और प्रशासन व सरकार को आंदोलन शुरू करने की भी चेतावनी दी है।
डूमरखां गांव निवासी नवीन ने बताया कि मंगलवार को देर रात उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके चलते वह पत्नी को पीएचसी में लेकर पहुंचा, लेकिन वहां पर कोई कर्मचारी नहीं मिला और जब वह मुकेश को लेकर पीएचसी से बाहर निकल रहे थे मुकेश ने गेट पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद वहां पर स्टाफ नर्स पहुंची। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी इस प्रकार की घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अगर विभाग यह कह दे कि यहां पर लोगों के लिए कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं है तो लोग सीधे शहर के अस्पताल में तो जाकर अपना इलाज करवा सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने यहां पीएचसी तो बनाई, लेकिन सुविधाएं नहीं दी हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अगर इस डिलीवरी के जन्म या उसकी मां को कुछ हुआ तो उसका जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग होगा। फिलहाल जच्चा व बच्चा सुरक्षित हैं।
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पुलिस ने खुलवाया ताला
तालाबंदी की सुचना मिलते ही नरवाना सदर थाना प्रभारी राजाराम व उचाना नागरिक अस्पताल के डेंटल सर्जन डॉ. राजेश मित्तल मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाबुझा कर ताला खुलवाया। डॉक्टर राजेश मित्तल ने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की मांग को उच्च अधिकारियों के पास भेजकर समस्या का समाधान करवाया जाएगा। पहले यहां दो नर्स थी, लेकिन जो नियमित नहीं थी, लेकिन ये दोनों नर्स नियमित हो गई है।
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डूमरखा में दो स्टाफ तैनात हैं, सुबह के समय में जिस नर्स की ड्यूटी थी वह थोड़ी देर बार केंद्र पर पहुंच गई थी। इसके बाद महिला की डिलीवरी करवाई गई। अब जच्चा बच्चा सुरक्षित है, लोगों को समझाबुझा कर ताला भी खुलवा दिया गया है।
राजेश मित्तल, डेंटल सर्जन उचाना।
स्टाफ की कमी, होगी जांच
डूमरखा पीएचसी में दो स्टाफ नर्स है, जिसमें दोनों स्टाफ नर्स नियमित नहीं थी उनमें से एक स्टाफ नर्स नियमित हुई है, जो जींद नागरिक अस्पताल आई थी। स्टाफ की तो पहले से ही कमी है। और यह मामला संज्ञान में आया है, इसके लिए जांच कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच की जाएगी।
डॉ. पालेराम, एसएमओ।