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दिवाली मनाने का फैसला
Updated Sat, 14 Oct 2017 11:07 PM IST
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आदि धर्म समाज ने काली दीवाली मनाने का लिया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। शनिवार को वाल्मीकि आश्रम में आदि धर्म समाज की बैठक अंबेडकर आंदोलन के जिला अध्यक्ष संजय कालवन की अध्यक्षता में हुई। जिसमें काली दिवाली मनाने का फैसला लिया। संजय कालवन ने बताया कि महामुनी शम्भूक का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया था इसलिए आदि धर्म समाज हर साल की तरह इस बार भी काली दिवाली मनाएगा।
महामुनि शम्भूक शुद्रों के प्रथम शिक्षाविद् थे। जब उन्होंने अपना प्रथम स्कूल स्थापित किया तब क्षत्रियों ने मिलकर षड्यंत्र के तहत महामुनि शम्भूक को पेड़ से उल्टा लटकाकर राजा रामचंद्र ने तलवार के साथ कत्ल कर दिया। उनके खून से बहने वाली नदी को आज तुगभद्रा कहा जाता है, महामुनि शम्भुक का मरना समस्त आदि वासी समाज के लिए किसी दीपक के बुझ जाने के समान था। महामुनि शम्भूक के कत्ल की खुशी में आर्यों ने दीप जलाएं। जहां लोग माता सीता के निदंक हो वहां कैसे दीप जलाएं। निदंक भी ऐसे जो सीधे मां सीता के चरित्र पर अंगुलियां उठाते हो। मां सीता से अग्नि परीक्षा की मांग की थी। इस अवसर पर आदि अंबेडकर आंदोलन के जिला उपाध्यक्ष मुकेश सुदकैन, नरवाना हलका अध्यक्ष विनोद डुमरखां, फग्गू प्रधान, रोहताश, बबरीक, कृष्ण कन्हेड़ी, दर्शन कन्हेड़ी, विकास राणा, सुनील दानव, सुखबीर, मनीष, हरदीप, जगबीर मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। शनिवार को वाल्मीकि आश्रम में आदि धर्म समाज की बैठक अंबेडकर आंदोलन के जिला अध्यक्ष संजय कालवन की अध्यक्षता में हुई। जिसमें काली दिवाली मनाने का फैसला लिया। संजय कालवन ने बताया कि महामुनी शम्भूक का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया था इसलिए आदि धर्म समाज हर साल की तरह इस बार भी काली दिवाली मनाएगा।
महामुनि शम्भूक शुद्रों के प्रथम शिक्षाविद् थे। जब उन्होंने अपना प्रथम स्कूल स्थापित किया तब क्षत्रियों ने मिलकर षड्यंत्र के तहत महामुनि शम्भूक को पेड़ से उल्टा लटकाकर राजा रामचंद्र ने तलवार के साथ कत्ल कर दिया। उनके खून से बहने वाली नदी को आज तुगभद्रा कहा जाता है, महामुनि शम्भुक का मरना समस्त आदि वासी समाज के लिए किसी दीपक के बुझ जाने के समान था। महामुनि शम्भूक के कत्ल की खुशी में आर्यों ने दीप जलाएं। जहां लोग माता सीता के निदंक हो वहां कैसे दीप जलाएं। निदंक भी ऐसे जो सीधे मां सीता के चरित्र पर अंगुलियां उठाते हो। मां सीता से अग्नि परीक्षा की मांग की थी। इस अवसर पर आदि अंबेडकर आंदोलन के जिला उपाध्यक्ष मुकेश सुदकैन, नरवाना हलका अध्यक्ष विनोद डुमरखां, फग्गू प्रधान, रोहताश, बबरीक, कृष्ण कन्हेड़ी, दर्शन कन्हेड़ी, विकास राणा, सुनील दानव, सुखबीर, मनीष, हरदीप, जगबीर मौजूद रहे।
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