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प्रस्तावित बागवानी विश्वविद्यालय के रीजनल सेंटर का निर्माण अटका
ब्यूरो_अमर उजाला_झज्जर
Updated Tue, 23 Aug 2016 10:47 PM IST
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ग्रामीण
- फोटो : bureau
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गांव रईया में प्रस्तावित बागवानी विश्वविद्यालय के रीजनल सेंटर के विरोध में ग्रामीणों के स्वर मुखर हो गए। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार यहां बनने वाले रीजनल सेंटर के लिए पहले उचित मुआवजा राशि दे और जिन लोगों की जमीन रीजनल सेंटर के लिए अधिग्रहण की जानी है, उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान करे। उसके बाद ही गांव में बागवानी विश्वविद्यालय के लिए जमीन का अधिग्रहण करे।
इसी मामले में ग्रामीणों के एक पक्ष ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए पहले ही जिला कलेक्टर के यहां अपील डाल रखी है। मंगलवार को इसी मामले में गांव की महिला सरपंच की गवाही हुई। गांव की महिला सरपंच पूजा देवी ने गांव में बनने वाले रीजनल सेंटर का समर्थन करते हुए यह दावा भी जताया कि जिस जमीन पर बागवानी विश्वविद्यालय का यह रीजनल सेंटर बनाया जाना प्रस्तावित है, वह जमीन ग्राम पंचायत की है और उस पर किसी अन्य का अधिकार नहीं बनता। इसलिए जब ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर इसका समर्थन किया है तो फिर किसी अन्य का विरोध कोई मायना नहीं रखता।
उधर, दूसरा पक्ष इस जमीन पर अपना अधिकार जता रहा है। दूसरे पक्ष के लोगों का कहना है कि सरकार ने गांव की जिस शामलात भूमि पर बागवानी विश्वविद्यालय का यह रीजनल सेंटर बनाने की मंजूरी दी है, वह निजी मिलकियत है और यही वजह है कि वह अपनी जमीन का मुआवजा सरकार से मांग रहे हैं। मंगलवार को मीडिया के सामने रूबरू होकर ग्रामीणों ने इस जमीन पर अपना अधिकार जताया। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक उन्हें जमीन का मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक इस पर बनने वाले बागवानी विश्वविद्यालय के रीजनल सेंटर का विरोध जारी रहेगा।
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105 एकड़ में बनाया जाना है प्रस्तावित
रईया गांव की 105 एकड़ भूमि में बागवानी विश्वविद्यालय का यह रीजनल सेंटर बनाया जाना प्रस्तावित है। ग्राम सरपंच पूजा देवी कहती हैं कि इस रीजनल सेंटर का विरोध करने वाले जो लोग हैं, उन्होंने इस जमीन को वर्ष 1968 में गऊ चारे के लिए पंचायत को दे दिया था। इस जमीन का इंतकाल भी ग्राम पंचायत के नाम दर्ज है। ऐसे में किसी का इस जमीन पर मालिकाना हक जताया जाना न्यायसंगत नहीं है।
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इसी मामले में ग्रामीणों के एक पक्ष ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए पहले ही जिला कलेक्टर के यहां अपील डाल रखी है। मंगलवार को इसी मामले में गांव की महिला सरपंच की गवाही हुई। गांव की महिला सरपंच पूजा देवी ने गांव में बनने वाले रीजनल सेंटर का समर्थन करते हुए यह दावा भी जताया कि जिस जमीन पर बागवानी विश्वविद्यालय का यह रीजनल सेंटर बनाया जाना प्रस्तावित है, वह जमीन ग्राम पंचायत की है और उस पर किसी अन्य का अधिकार नहीं बनता। इसलिए जब ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर इसका समर्थन किया है तो फिर किसी अन्य का विरोध कोई मायना नहीं रखता।
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उधर, दूसरा पक्ष इस जमीन पर अपना अधिकार जता रहा है। दूसरे पक्ष के लोगों का कहना है कि सरकार ने गांव की जिस शामलात भूमि पर बागवानी विश्वविद्यालय का यह रीजनल सेंटर बनाने की मंजूरी दी है, वह निजी मिलकियत है और यही वजह है कि वह अपनी जमीन का मुआवजा सरकार से मांग रहे हैं। मंगलवार को मीडिया के सामने रूबरू होकर ग्रामीणों ने इस जमीन पर अपना अधिकार जताया। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक उन्हें जमीन का मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक इस पर बनने वाले बागवानी विश्वविद्यालय के रीजनल सेंटर का विरोध जारी रहेगा।
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105 एकड़ में बनाया जाना है प्रस्तावित
रईया गांव की 105 एकड़ भूमि में बागवानी विश्वविद्यालय का यह रीजनल सेंटर बनाया जाना प्रस्तावित है। ग्राम सरपंच पूजा देवी कहती हैं कि इस रीजनल सेंटर का विरोध करने वाले जो लोग हैं, उन्होंने इस जमीन को वर्ष 1968 में गऊ चारे के लिए पंचायत को दे दिया था। इस जमीन का इंतकाल भी ग्राम पंचायत के नाम दर्ज है। ऐसे में किसी का इस जमीन पर मालिकाना हक जताया जाना न्यायसंगत नहीं है।