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Jhajjar-Bahadurgarh News: वर्टिकल ड्रेनेज प्रोजेक्ट के जरिये निकाला जाएगा जमीन से पानी
Mon, 30 Sep 2024 12:27 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 30 Sep 2024 12:27 AM IST
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29jjrp04- झज्जर। कृषि एवं कल्याा विभाग की तरफ से लगाया गया प्रोजेक्टर। स्त्रोत- कृषि विभाग
झज्जर। सेम और लवणीय भूमि से परेशान जिले के दो गांवों के किसानों को जल्द ही राहत मिल सकती है। कृषि और कल्याण विभाग की तरफ से आचार संहिता हटने के बाद सेम व लवणीयता को ठीक करने का काम किया जाएगा। दोनों गांवों में वर्टिकल ड्रेनेज प्रोजेक्ट लगाया गया है।
कृषि और कल्याण विभाग की तरफ से गांवों के लिए वर्टिकल ड्रेनेज प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसके तहत डीघल और बिसाहन गांवों में बनी समस्या से किसानों को निजात दिलाने के लिए लवणीय पानी को ड्रेनेज के माध्यम से निकाला जाएगा। पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग पांच करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है।
जिले में सैकड़ों एकड़ जमीन सेम की समस्या के चलते बंजर हो चुकी है और बहुत सारी जमीन ऐसी है जो इस दिशा में तेजी से आगे कदम बढ़ा रही है। जिले में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर उपजाऊ भूमि है। जिन इलाकों में धान की फसल लगातार रोपी जा रही है, वहां की जमीन के भीतर के जल में क्लोराइड, कार्बोनेट बहुत ज्यादा पाए गए हैं। यहां का जलस्तर पांच से दस फीट तक मिला है। इलाके का आकार कटोरे की तरह से है।
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थोड़ा सा पानी भी जमीन में काफी दिनों तक खड़ा रहता है। यही वजह है कि अगर हल्की सी भी बरसात हो जाए तो वहां पर पानी सूखता ही नहीं है। जिस इलाके में सेम की समस्या है, वहां पर लगातार सिंचाई से जमीन इतनी ज्यादा तृप्त हो गई है कि जमीन पानी सोखने की स्थिति में नहीं रहती। ऐसे में कृषि एवं कल्याण विभाग ने इन गांवों में वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम के जरिये सेम व जमीन में लावणता की मात्रा को ठीक करने का निर्णय लिया है।
इस प्रोजेक्ट के तहत डीघल और बिसाहन गांव में यह प्रोजेक्ट लगाए गए हैं। प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार हो चुका है और दोहन का काम जारी है। अंदर से मिट्टी यानी गाद निकाली जा रही है। जैसे ही साफ पानी आएगा तो उसे आगे ड्रेन से जोड़ दिया जाएगा।
इंसेट
पांच गांवों में लगाए जाएंगे प्रोजेक्टर
विभाग की तरफ से पांच गांव बाबरा, मुंडाहेड़ा, कासनी, सुर्खपुर, रेवाड़ी खेड़ी गांवों में यही प्रोजेक्ट लगाए जाएंगे। इसके लिए टेंडर लगाए गए थे, लेकिन आचार संहिता के चलते ओपन नहीं किए गए हैं। प्रोजेक्ट के तहत सोलर सिस्टम, मोटर लगाकर पानी को बाहर निकाला जाएगा और उसे ड्रेन में छोड़ा जाएगगा। बाबरा गांव के प्रोजेक्ट पर लगभग 32.64 लाख, मुंडाहेड़ा प्रोजेक्ट पर 43.58 लाख, कासनी, सुर्खपुर प्रोजेक्ट पर 59.80 लाख और रेवाड़ी खेड़ा प्रोजेक्ट पर एक करोड़ 59 लाख 82 हजार रुपये की राशि खर्च होगी।
इंसेट
जहां ड्रेनेज सिस्टम, केवल वही कामयाब प्रोजेक्ट
वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम वहीं कामयाब है, जहां आसपास ड्रेन मौजूद है या फिर बनाई जा सकती है। जहां ऐसी सुविधा नहीं है, वहां प्रोजेक्ट कामयाब नहीं है। क्योंकि नहरों में सिंचाई विभाग लावणीय युक्त पानी नहीं छोड़ने देता है। फिलहाल दो गांवों में प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है।
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कृषि और कल्याण विभाग की तरफ से गांवों के लिए वर्टिकल ड्रेनेज प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसके तहत डीघल और बिसाहन गांवों में बनी समस्या से किसानों को निजात दिलाने के लिए लवणीय पानी को ड्रेनेज के माध्यम से निकाला जाएगा। पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग पांच करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है।
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जिले में सैकड़ों एकड़ जमीन सेम की समस्या के चलते बंजर हो चुकी है और बहुत सारी जमीन ऐसी है जो इस दिशा में तेजी से आगे कदम बढ़ा रही है। जिले में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर उपजाऊ भूमि है। जिन इलाकों में धान की फसल लगातार रोपी जा रही है, वहां की जमीन के भीतर के जल में क्लोराइड, कार्बोनेट बहुत ज्यादा पाए गए हैं। यहां का जलस्तर पांच से दस फीट तक मिला है। इलाके का आकार कटोरे की तरह से है।
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थोड़ा सा पानी भी जमीन में काफी दिनों तक खड़ा रहता है। यही वजह है कि अगर हल्की सी भी बरसात हो जाए तो वहां पर पानी सूखता ही नहीं है। जिस इलाके में सेम की समस्या है, वहां पर लगातार सिंचाई से जमीन इतनी ज्यादा तृप्त हो गई है कि जमीन पानी सोखने की स्थिति में नहीं रहती। ऐसे में कृषि एवं कल्याण विभाग ने इन गांवों में वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम के जरिये सेम व जमीन में लावणता की मात्रा को ठीक करने का निर्णय लिया है।
इस प्रोजेक्ट के तहत डीघल और बिसाहन गांव में यह प्रोजेक्ट लगाए गए हैं। प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार हो चुका है और दोहन का काम जारी है। अंदर से मिट्टी यानी गाद निकाली जा रही है। जैसे ही साफ पानी आएगा तो उसे आगे ड्रेन से जोड़ दिया जाएगा।
इंसेट
पांच गांवों में लगाए जाएंगे प्रोजेक्टर
विभाग की तरफ से पांच गांव बाबरा, मुंडाहेड़ा, कासनी, सुर्खपुर, रेवाड़ी खेड़ी गांवों में यही प्रोजेक्ट लगाए जाएंगे। इसके लिए टेंडर लगाए गए थे, लेकिन आचार संहिता के चलते ओपन नहीं किए गए हैं। प्रोजेक्ट के तहत सोलर सिस्टम, मोटर लगाकर पानी को बाहर निकाला जाएगा और उसे ड्रेन में छोड़ा जाएगगा। बाबरा गांव के प्रोजेक्ट पर लगभग 32.64 लाख, मुंडाहेड़ा प्रोजेक्ट पर 43.58 लाख, कासनी, सुर्खपुर प्रोजेक्ट पर 59.80 लाख और रेवाड़ी खेड़ा प्रोजेक्ट पर एक करोड़ 59 लाख 82 हजार रुपये की राशि खर्च होगी।
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जहां ड्रेनेज सिस्टम, केवल वही कामयाब प्रोजेक्ट
वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम वहीं कामयाब है, जहां आसपास ड्रेन मौजूद है या फिर बनाई जा सकती है। जहां ऐसी सुविधा नहीं है, वहां प्रोजेक्ट कामयाब नहीं है। क्योंकि नहरों में सिंचाई विभाग लावणीय युक्त पानी नहीं छोड़ने देता है। फिलहाल दो गांवों में प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है।