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ट्रांस्पोर्टर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, सड़क पर नहीं उतरी 10 हजार से अधिक गाड़ियां
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---फोटो 15 : ट्रांस्पोर्टरों को समझाती पुलिस।
- फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। नए वोटर व्हीकल एक्ट, पुलिस-आरटीओ की मनमानी सहित कई मुद्दों पर संघर्ष कर रहे ट्रांसपोर्टर सोमवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। बहादुरगढ़ की 19 यूनियनों से जुड़े ट्रांस्पोर्टर भी हड़ताल पर रहे। हड़ताल के चलते करीब एक हजार गाड़ियां माल लेकर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंची। ट्रांस्पोर्टरों ने चेेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांग पूरी नहीं करती, तब तक उनके वाहन सड़क पर नहीं उतरेंगे।
बहादुरगढ़ में हैं 10 हजार से अधिक गाड़ियां
बहादुरगढ़ में माल वाहक वाहनों की 19 यूनियन हैं। इनसे काफी ट्रांस्पोर्टर जुड़े हैं। करीब दस हजार मालवाहक बड़े वाहन हैं। चूंकि बहादुरगढ़ औद्योगिक नगरी है तो लगभग यहां से माल लेकर लगभग 800 से 1000 गाड़ियां प्रतिदिन दिल्ली व अन्य क्षेत्रों की ओर जाती है। ऑल इंडिया ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर सोमवार को बहादुरगढ़ की यूनियनों से जुड़े तमाम ट्रांस्पोर्टर इस अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल हो गए। एक भी गाड़ी यूनियन कार्यालय परिसर से बाहर नहीं निकली। कुछ गाड़ियां यूनियन और फैक्ट्रियों में ऐसी खड़ी रहीं, जिनमें माल लोड था। हड़ताल के चलते माल गंतव्य स्थ्ल तक नहीं पहुुंच सका।
ट्रांस्पोर्टर्स ने बताई ये समस्या
हड़ताल कर रहे ट्रांस्पोर्टरों ने बताया कि बॉर्डर के रास्ते आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस द्वारा लगातार उन्हें परेशान किया जा रहा है। बेवजह कमियां बताकर पैसे वसूले जाते हैं। चालक रुपये न द तो गाड़ी बंद करने की धमकी देते हैं। नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद समस्या अधिक गंभीर हो गई है। छोटी छोटी कमियों के हजारों रुपये तक का चालान किया जा रहा है। एक तो वैसे ही यह धंधा मंदी की मार झेल रहा है, रही सही कसर टैक्स, जुर्माना और बॉर्डरों पर हो रही वसूली पूरी कर देती है। इस तरह से ट्रांस्पोर्ट का काम बिलकुल ही खत्म हो जाएगा। अकेले बहादुरगढ़ में ही हजारों लोग इस व्यवसाय से जुड़े हैं। इस हड़ताल से ट्रांस्पोर्टरों और व्यवसायियों को तो नुकसान है ही, वहीं महंगाई पर भी असर पड़ेगा।
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कई वाहन भी रुकवाए, पुलिस ने चलते किए
हड़ताल केवल यूनियनों से जुड़े ट्रांस्पोर्टरों ने की थी लेकिन निजी ट्रांस्पोर्ट कंपनियों के ऑपरेटर द्वारा काम किया जा रहा था। हड़ातली ट्रांस्पोर्टरों ने एचएसआईआईडीसी मोड़ व एमआईई क्षेत्र में दिल्ली की तरफ जाने वाले मालवाहक वाहन रोक दिए। विवाद गहराने लगा तो पुलिस को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने हड़ताली ट्रांस्पोर्टरों को वहां से हटाया और वाहनों को चलता किया।
काम भी प्रभावित
बहादुरगढ़ में तीन हजार से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। काफी फैक्टरी संचालक निजी ट्रांस्पोर्ट कंपनियों एवं अपने खुद के वाहनों के जरिये माल सप्लाई करते हैं। लेकिन ऐसी इकाइयां भी बेहद ज्यादा हैं, जिनका माल यूनियनों की गाड़ी के जरिये आता-जाता है। चूंकि हड़ताल शुरू हो गई है तो अब उद्यमियों की परेशानी भी बढ़ गई है। उद्यमी नवीन ने कहा कि हड़ताल से ट्रांस्पोर्टरों और उद्यामियों दोनों को परेशानी होनी है। हड़ताल करना कोई उचित विकल्प नहीं। सरकार को भी मामले में हस्तक्षेप कर कोई रास्ता निकालना चाहिए।
नहीं तो जारी रहेगी हड़ताल
भाईचारा ऑल इंडिया ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश दलाल ने कहा है कि ट्रांस्पोर्टरों की सभी मांगें जायज हैं। सरकार इन मांगों को मानकर ट्रांस्पोर्ट के काम से जुड़े लोगों को राहत दे। जब तक मांग मान ली नहीं जाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
ट्रांस्पोर्टर्स की ये हैं मांग
- नए मोटर व्हीकल एक्ट को निरस्त किया जाए।
- आयकर अधिनियम की धारा 44एई में बढ़ाई गई आय वापस ली जाए।
- थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की बढ़ाई गई राशि वापस ली जाए।
- डीजल के दाम जीएसटी के दायरे में लाकर कम की जाए।
- बॉर्डरों व सड़कों पर होने वाली लूट खसोट बंद की जाए।
- टोल पर प्रत्येक प्रदेश का सालाना टोकन फिक्स किया जाए।
- हर 200 किलोमीटर पर ड्राइवरों के लिए विश्राम गृह की व्यवस्था की जाए।
- प्रत्येक जिले में ड्राइविंग लाइसेंस सेंटर खोले जाए।
- डीजल की गाड़ियों की उम्र 10 के बजाय 15 वर्ष की जाए।
- तरह तरह के शुल्क बंद करके, एक न्यायोचित टैक्स लिया जाए।
- सरकार ने जो भार बढ़ाया है उसके साथ ट्रक की हाइट बढ़ाकर 14 फीट की जाए।
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बहादुरगढ़ में हैं 10 हजार से अधिक गाड़ियां
बहादुरगढ़ में माल वाहक वाहनों की 19 यूनियन हैं। इनसे काफी ट्रांस्पोर्टर जुड़े हैं। करीब दस हजार मालवाहक बड़े वाहन हैं। चूंकि बहादुरगढ़ औद्योगिक नगरी है तो लगभग यहां से माल लेकर लगभग 800 से 1000 गाड़ियां प्रतिदिन दिल्ली व अन्य क्षेत्रों की ओर जाती है। ऑल इंडिया ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर सोमवार को बहादुरगढ़ की यूनियनों से जुड़े तमाम ट्रांस्पोर्टर इस अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल हो गए। एक भी गाड़ी यूनियन कार्यालय परिसर से बाहर नहीं निकली। कुछ गाड़ियां यूनियन और फैक्ट्रियों में ऐसी खड़ी रहीं, जिनमें माल लोड था। हड़ताल के चलते माल गंतव्य स्थ्ल तक नहीं पहुुंच सका।
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ट्रांस्पोर्टर्स ने बताई ये समस्या
हड़ताल कर रहे ट्रांस्पोर्टरों ने बताया कि बॉर्डर के रास्ते आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस द्वारा लगातार उन्हें परेशान किया जा रहा है। बेवजह कमियां बताकर पैसे वसूले जाते हैं। चालक रुपये न द तो गाड़ी बंद करने की धमकी देते हैं। नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद समस्या अधिक गंभीर हो गई है। छोटी छोटी कमियों के हजारों रुपये तक का चालान किया जा रहा है। एक तो वैसे ही यह धंधा मंदी की मार झेल रहा है, रही सही कसर टैक्स, जुर्माना और बॉर्डरों पर हो रही वसूली पूरी कर देती है। इस तरह से ट्रांस्पोर्ट का काम बिलकुल ही खत्म हो जाएगा। अकेले बहादुरगढ़ में ही हजारों लोग इस व्यवसाय से जुड़े हैं। इस हड़ताल से ट्रांस्पोर्टरों और व्यवसायियों को तो नुकसान है ही, वहीं महंगाई पर भी असर पड़ेगा।
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कई वाहन भी रुकवाए, पुलिस ने चलते किए
हड़ताल केवल यूनियनों से जुड़े ट्रांस्पोर्टरों ने की थी लेकिन निजी ट्रांस्पोर्ट कंपनियों के ऑपरेटर द्वारा काम किया जा रहा था। हड़ातली ट्रांस्पोर्टरों ने एचएसआईआईडीसी मोड़ व एमआईई क्षेत्र में दिल्ली की तरफ जाने वाले मालवाहक वाहन रोक दिए। विवाद गहराने लगा तो पुलिस को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने हड़ताली ट्रांस्पोर्टरों को वहां से हटाया और वाहनों को चलता किया।
काम भी प्रभावित
बहादुरगढ़ में तीन हजार से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। काफी फैक्टरी संचालक निजी ट्रांस्पोर्ट कंपनियों एवं अपने खुद के वाहनों के जरिये माल सप्लाई करते हैं। लेकिन ऐसी इकाइयां भी बेहद ज्यादा हैं, जिनका माल यूनियनों की गाड़ी के जरिये आता-जाता है। चूंकि हड़ताल शुरू हो गई है तो अब उद्यमियों की परेशानी भी बढ़ गई है। उद्यमी नवीन ने कहा कि हड़ताल से ट्रांस्पोर्टरों और उद्यामियों दोनों को परेशानी होनी है। हड़ताल करना कोई उचित विकल्प नहीं। सरकार को भी मामले में हस्तक्षेप कर कोई रास्ता निकालना चाहिए।
नहीं तो जारी रहेगी हड़ताल
भाईचारा ऑल इंडिया ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश दलाल ने कहा है कि ट्रांस्पोर्टरों की सभी मांगें जायज हैं। सरकार इन मांगों को मानकर ट्रांस्पोर्ट के काम से जुड़े लोगों को राहत दे। जब तक मांग मान ली नहीं जाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
ट्रांस्पोर्टर्स की ये हैं मांग
- नए मोटर व्हीकल एक्ट को निरस्त किया जाए।
- आयकर अधिनियम की धारा 44एई में बढ़ाई गई आय वापस ली जाए।
- थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की बढ़ाई गई राशि वापस ली जाए।
- डीजल के दाम जीएसटी के दायरे में लाकर कम की जाए।
- बॉर्डरों व सड़कों पर होने वाली लूट खसोट बंद की जाए।
- टोल पर प्रत्येक प्रदेश का सालाना टोकन फिक्स किया जाए।
- हर 200 किलोमीटर पर ड्राइवरों के लिए विश्राम गृह की व्यवस्था की जाए।
- प्रत्येक जिले में ड्राइविंग लाइसेंस सेंटर खोले जाए।
- डीजल की गाड़ियों की उम्र 10 के बजाय 15 वर्ष की जाए।
- तरह तरह के शुल्क बंद करके, एक न्यायोचित टैक्स लिया जाए।
- सरकार ने जो भार बढ़ाया है उसके साथ ट्रक की हाइट बढ़ाकर 14 फीट की जाए।