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लक्ष्य लेकर अगले ओलंपिक की तैयारी करेगा दीपक
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दीपक पूनिया की इंटरनेट से ली गई टोक्यो ओलंपिक की फोटो।
- फोटो : Bahadurgarh
शील भारद्वाज
बहादुरगढ़। गांव छारा के पहलवान दीपक पूनिया की हार के बावजूद उसके पिता, कोच और ग्रामीणों को उम्मीद है कि अगले ओलंपिक में वह पदक अवश्य जीतेगा। यह दीपक का पहला ओलंपिक था और अनुभव न होने से उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। अब दीपक हर दिन जीत का लक्ष्य लेकर अगले ओलंपिक की तैयारी करेगा।
बता दें कि दीपक टोक्यो ओलंपिक में पहले तीन राउंड की कुश्ती जीतने के बावजूद सेमीफाइनल और फिर कांस्य पदक के लिए हुआ मुकाबला जीतने से चूक गए।
टोक्यो ओलंपिक में 86 किलोग्राम भार वर्ग के रेपेचेज मुकाबले में पहलवान दीपक पूनिया ने पहले राउंड में शानदार खेल दिखाया और 2-1 से बढ़त बनाने में सफल रहे, लेकिन दूसरे बाउट में आखिरी 10 सेकंड में दीपक पर प्रतिद्वंद्वी पहलवान हावी हो गया, जो दीपक की हार का कारण बना। दीपक के मुकाबले माइल्स अमीन 2 ज्यादा अंक बनाने में कामयाब रहे। दीपक अच्छे ड्रॉ का फायदा उठाकर सेमीफाइनल तक पहुंचे लेकिन अमेरिका के डेविड मौरिस टेलर से सेमीफाइनल में हार गए। उन्होंने इससे पहले नाइजीरिया के एकेरेकेमे एगियोमोर को तकनीकी श्रेष्ठता से और फिर क्वार्टर फाइनल में चीन के लिन जुशेन को 6-3 से हराया था। संवाद
दीपक का कोई दोष नहीं : कोच
दरअसल, मुकाबले के पहलवान से कुश्ती हो रही हो तो परिस्थितियां किस वक्त क्या मोड़ ले ले, कहा नहीं जा सकता। दीपक के साथ भी यही हुआ। उनका खेल आखिरी के चंद पलों में बदल गया। इसलिए सेमीफाइनल और कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबलों में हार का दोष दीपक को नहीं दिया जा रहा। दीपक के कोच आर्य वीरेंद्र पहलवान का कहना है कि ओलंपिक से पहले करीब डेढ़ महीना तक पोलैंड में उसका अपने बराबर के पहलवान के साथ सही ढंग से अभ्यास नहीं हो पाया। जिससे उसको नुकसान हुआ।
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बचाव की रणनीति से हुआ नुकसान
दीपक के बचपन से ही उसकी कुश्ती के प्रशंसक रहे बबलू प्रधान ने कहा कि दीपक आखिरी के कुछ क्षणों में बचाव की रणनीति से लड़ता रहा और अंकों की बढ़त नहीं बना पाया। अगर वह इन पलों में हमलावर रहता तो परिणाम अपने पक्ष में आता। दीपक पूनिया की आखिरी मिनटों में की गई गलतियां उन्हें भारी पड़ीं और इसके साथ ही कांस्य पदक से चूक गए।
अगला गोल्ड पक्का : सुभाष
दीपक के पिता सुभाष इस परिणाम को परिणाम तो मानते हैं, लेकिन हार नहीं। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा पहली बार ओलंपिक में गया। वहां से बहुत कुछ सीखकर आया है। यकीन है अपनी मेहनत और देशवासियों की दुआ से अगले ओलंपिक का गोल्ड पक्का कर लेगा। संवाद
दीपक पूनिया की मुख्य उपलब्धियां
- कांस्य पदक एशियन चैंपियनशिप, 2020
- रजत पदक विश्व चैंपियनशिप, 2019
- स्वर्ण जूनियर विश्व चैंपियनशिप, 2019
- कांस्य एशियन चैंपियनशिप, 2019
- रजत जूनियर विश्व चैंपियनशिप, 2018
- स्वर्ण विश्व कैडेट चैंपियनशिप, 2016
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बहादुरगढ़। गांव छारा के पहलवान दीपक पूनिया की हार के बावजूद उसके पिता, कोच और ग्रामीणों को उम्मीद है कि अगले ओलंपिक में वह पदक अवश्य जीतेगा। यह दीपक का पहला ओलंपिक था और अनुभव न होने से उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। अब दीपक हर दिन जीत का लक्ष्य लेकर अगले ओलंपिक की तैयारी करेगा।
बता दें कि दीपक टोक्यो ओलंपिक में पहले तीन राउंड की कुश्ती जीतने के बावजूद सेमीफाइनल और फिर कांस्य पदक के लिए हुआ मुकाबला जीतने से चूक गए।
टोक्यो ओलंपिक में 86 किलोग्राम भार वर्ग के रेपेचेज मुकाबले में पहलवान दीपक पूनिया ने पहले राउंड में शानदार खेल दिखाया और 2-1 से बढ़त बनाने में सफल रहे, लेकिन दूसरे बाउट में आखिरी 10 सेकंड में दीपक पर प्रतिद्वंद्वी पहलवान हावी हो गया, जो दीपक की हार का कारण बना। दीपक के मुकाबले माइल्स अमीन 2 ज्यादा अंक बनाने में कामयाब रहे। दीपक अच्छे ड्रॉ का फायदा उठाकर सेमीफाइनल तक पहुंचे लेकिन अमेरिका के डेविड मौरिस टेलर से सेमीफाइनल में हार गए। उन्होंने इससे पहले नाइजीरिया के एकेरेकेमे एगियोमोर को तकनीकी श्रेष्ठता से और फिर क्वार्टर फाइनल में चीन के लिन जुशेन को 6-3 से हराया था। संवाद
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दीपक का कोई दोष नहीं : कोच
दरअसल, मुकाबले के पहलवान से कुश्ती हो रही हो तो परिस्थितियां किस वक्त क्या मोड़ ले ले, कहा नहीं जा सकता। दीपक के साथ भी यही हुआ। उनका खेल आखिरी के चंद पलों में बदल गया। इसलिए सेमीफाइनल और कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबलों में हार का दोष दीपक को नहीं दिया जा रहा। दीपक के कोच आर्य वीरेंद्र पहलवान का कहना है कि ओलंपिक से पहले करीब डेढ़ महीना तक पोलैंड में उसका अपने बराबर के पहलवान के साथ सही ढंग से अभ्यास नहीं हो पाया। जिससे उसको नुकसान हुआ।
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बचाव की रणनीति से हुआ नुकसान
दीपक के बचपन से ही उसकी कुश्ती के प्रशंसक रहे बबलू प्रधान ने कहा कि दीपक आखिरी के कुछ क्षणों में बचाव की रणनीति से लड़ता रहा और अंकों की बढ़त नहीं बना पाया। अगर वह इन पलों में हमलावर रहता तो परिणाम अपने पक्ष में आता। दीपक पूनिया की आखिरी मिनटों में की गई गलतियां उन्हें भारी पड़ीं और इसके साथ ही कांस्य पदक से चूक गए।
अगला गोल्ड पक्का : सुभाष
दीपक के पिता सुभाष इस परिणाम को परिणाम तो मानते हैं, लेकिन हार नहीं। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा पहली बार ओलंपिक में गया। वहां से बहुत कुछ सीखकर आया है। यकीन है अपनी मेहनत और देशवासियों की दुआ से अगले ओलंपिक का गोल्ड पक्का कर लेगा। संवाद
दीपक पूनिया की मुख्य उपलब्धियां
- कांस्य पदक एशियन चैंपियनशिप, 2020
- रजत पदक विश्व चैंपियनशिप, 2019
- स्वर्ण जूनियर विश्व चैंपियनशिप, 2019
- कांस्य एशियन चैंपियनशिप, 2019
- रजत जूनियर विश्व चैंपियनशिप, 2018
- स्वर्ण विश्व कैडेट चैंपियनशिप, 2016