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Jhajjar-Bahadurgarh News: एसएलसी के लिए समय से आवेदन जरूरी, स्कूलों को मनमानी पर रोक
Fri, 03 Apr 2026 04:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Fri, 03 Apr 2026 04:18 AM IST
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बहादुरगढ़। शिक्षा विभाग की ओर से अभिभावकों और स्कूल संचालकों के लिए अहम निर्देश जारी किए गए हैं। यदि कोई अभिभावक अपने बच्चे का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) लेना चाहता है तो उसे शैक्षणिक सत्र समाप्त होने से पहले लिखित आवेदन देना अनिवार्य होगा।
खंड शिक्षा अधिकारी शेर सिंह ने खंड के सभी स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे सत्र समाप्ति से पहले ही अभिभावकों को एसएलसी प्रक्रिया की जानकारी दें ताकि अंतिम समय में किसी प्रकार की परेशानी न हो। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय केवल विभाग द्वारा दी गई मान्यता के अनुसार ही कक्षाओं में दाखिले करें।
उन्होंने कहा कि स्कूल जिस बोर्ड (सीबीएसई, एचबीएसई या अन्य) से संबद्ध हैं वे उसी बोर्ड के पाठ्यक्रम और शिक्षण सामग्री का ही उपयोग करें। अभिभावकों को सलाह है कि वे अपने बच्चों का दाखिला कराने से पहले विद्यालय की मान्यता और कक्षाओं की सीमा की पूरी जानकारी अवश्य लें।
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इसके अलावा विद्यालयों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से किताबें या कॉपियां खरीदने का दबाव न बनाएं। खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि इन निर्देशों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और अभिभावकों के हितों की रक्षा करना है।
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खंड शिक्षा अधिकारी शेर सिंह ने खंड के सभी स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे सत्र समाप्ति से पहले ही अभिभावकों को एसएलसी प्रक्रिया की जानकारी दें ताकि अंतिम समय में किसी प्रकार की परेशानी न हो। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय केवल विभाग द्वारा दी गई मान्यता के अनुसार ही कक्षाओं में दाखिले करें।
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उन्होंने कहा कि स्कूल जिस बोर्ड (सीबीएसई, एचबीएसई या अन्य) से संबद्ध हैं वे उसी बोर्ड के पाठ्यक्रम और शिक्षण सामग्री का ही उपयोग करें। अभिभावकों को सलाह है कि वे अपने बच्चों का दाखिला कराने से पहले विद्यालय की मान्यता और कक्षाओं की सीमा की पूरी जानकारी अवश्य लें।
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इसके अलावा विद्यालयों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से किताबें या कॉपियां खरीदने का दबाव न बनाएं। खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि इन निर्देशों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और अभिभावकों के हितों की रक्षा करना है।