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Jhajjar-Bahadurgarh News: हुडा प्लॉट पर कब्जे के मामले में दोषी को तीन साल की सजा
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बहादुरगढ़। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित शहर के आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र (एमआईई) में एक औद्योगिक भूखंड पर धोखाधड़ी व मिलीभगत से कब्जा कर लेने के आरोप में स्थानीय अदालत ने आरोपी को तीन साल कैद और नकद जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि मामले में आरोपी प्राधिकरण का कर्मचारी कुछ कारणों से बरी हो गया।
इस केस के दौरान शिकायतकर्ता हवा सिंह की वर्ष 2018 में मृत्यु हो गई थी। तब अदालत की इजाजत से मृतक की पत्नी आशा मलिक ने केस की आगे पैरवी की। लगभग 10 साल चले इस मुकदमे में दोनों पक्षों के सबूतों व गवाहों और वादी के वकील विनोद पाहवा व तुषार पाहवा की दलीलें सुनने के बाद गत 6 मार्च को प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी धर्मपाल ने दोषी इंदरजीत को दफा 420, 467, 468, 471 आईपीसी के तहत दोषी माना। उसे 3 साल कैद की सजा और 6,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं नरेश मेहता को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। दरअसल एमआईई बहादुरगढ़ में एक 435.8 गज का इंडस्ट्रियल प्लाॅट विलखु इंजीनियरिंग वर्क्स के नाम हुडा ने वर्ष 1978 में उसके दो भागीदारों निरंजन विलखु व सुभाष मदान के जरिए अलॉट किया था। जिसका हुडा ने कब्जा दे दिया व 1982 में विलखु इंजीनियरिंग वर्क्स के नाम कन्विंस डीड करवा दी।
इसके बाद यह प्लॉट विलखु इंजीनियरिंग वर्क्स ने प्रवीण अग्रवाल को बेच दिया और प्रवीण अग्रवाल ने वर्ष 1986 में इस प्लॉट में से 100 गज का टुकड़ा वादी हवा सिंह को बेच कर उनके नाम रजिस्ट्री करवा दी। शिकायतकर्ता हवा सिंह जो सरकारी कर्मचारी थे उन्होंने यह भूखंड अपने बुढ़ापे के लिए खरीदा था, ताकि सेवामुक्त होने के बाद काम आए। उस वक्त वहां खाली एरिया था। इसलिए प्रार्थी ने अपने हिस्से पर चहारदीवारी करवा कर छोड़ दी थी।
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वर्ष 2005 में जब प्रार्थी अपना प्लॉट संभालने गया तो देखा कि इंदरजीत इस पूरे प्लॉट पर फैक्टरी बना कर चला रहा है। तब प्रार्थी हुडा में गया व पूछताछ की तो पता चला कि इंदरजीत ने हुडा में फर्जी दस्तावेज फाइल करके खुद मालिक बन गया है। तब वादी हवासिंह ने हुडा के अधिकारियों व पुलिस को कई बार पत्र लिखे और कानूनी नोटिस दिए। इंदरजीत को भी कानूनी नोटिस दिया। विभाग ने जवाब में माना भी कि दो रजिस्ट्रियां (कन्विंस डीड) नहीं हो सकती और यह फ्रॉड हो सकती है। तब वादी हवा सिंह ने दोषियों के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में केस दर्ज करने की याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने निचली अदालत में केस करने को कहा। तब वर्ष 2012 में वादी हवा सिंह ने इंदरजीत व उस समय के संपदा अधिकारी के खिलाफ इस्तगासा डाला।
कोर्ट ने एसडीएम बहादुरगढ़ को जांच सौंपी। एसडीएम ने इंदरजीत व उस वक्त के डीलिंग असिस्टेंट नरेश मेहता को दोषी पाया। तब कोर्ट ने दोनों को भी समन कर लिया व दोनों पर यह केस चला।
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इस केस के दौरान शिकायतकर्ता हवा सिंह की वर्ष 2018 में मृत्यु हो गई थी। तब अदालत की इजाजत से मृतक की पत्नी आशा मलिक ने केस की आगे पैरवी की। लगभग 10 साल चले इस मुकदमे में दोनों पक्षों के सबूतों व गवाहों और वादी के वकील विनोद पाहवा व तुषार पाहवा की दलीलें सुनने के बाद गत 6 मार्च को प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी धर्मपाल ने दोषी इंदरजीत को दफा 420, 467, 468, 471 आईपीसी के तहत दोषी माना। उसे 3 साल कैद की सजा और 6,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं नरेश मेहता को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। दरअसल एमआईई बहादुरगढ़ में एक 435.8 गज का इंडस्ट्रियल प्लाॅट विलखु इंजीनियरिंग वर्क्स के नाम हुडा ने वर्ष 1978 में उसके दो भागीदारों निरंजन विलखु व सुभाष मदान के जरिए अलॉट किया था। जिसका हुडा ने कब्जा दे दिया व 1982 में विलखु इंजीनियरिंग वर्क्स के नाम कन्विंस डीड करवा दी।
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इसके बाद यह प्लॉट विलखु इंजीनियरिंग वर्क्स ने प्रवीण अग्रवाल को बेच दिया और प्रवीण अग्रवाल ने वर्ष 1986 में इस प्लॉट में से 100 गज का टुकड़ा वादी हवा सिंह को बेच कर उनके नाम रजिस्ट्री करवा दी। शिकायतकर्ता हवा सिंह जो सरकारी कर्मचारी थे उन्होंने यह भूखंड अपने बुढ़ापे के लिए खरीदा था, ताकि सेवामुक्त होने के बाद काम आए। उस वक्त वहां खाली एरिया था। इसलिए प्रार्थी ने अपने हिस्से पर चहारदीवारी करवा कर छोड़ दी थी।
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वर्ष 2005 में जब प्रार्थी अपना प्लॉट संभालने गया तो देखा कि इंदरजीत इस पूरे प्लॉट पर फैक्टरी बना कर चला रहा है। तब प्रार्थी हुडा में गया व पूछताछ की तो पता चला कि इंदरजीत ने हुडा में फर्जी दस्तावेज फाइल करके खुद मालिक बन गया है। तब वादी हवासिंह ने हुडा के अधिकारियों व पुलिस को कई बार पत्र लिखे और कानूनी नोटिस दिए। इंदरजीत को भी कानूनी नोटिस दिया। विभाग ने जवाब में माना भी कि दो रजिस्ट्रियां (कन्विंस डीड) नहीं हो सकती और यह फ्रॉड हो सकती है। तब वादी हवा सिंह ने दोषियों के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में केस दर्ज करने की याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने निचली अदालत में केस करने को कहा। तब वर्ष 2012 में वादी हवा सिंह ने इंदरजीत व उस समय के संपदा अधिकारी के खिलाफ इस्तगासा डाला।
कोर्ट ने एसडीएम बहादुरगढ़ को जांच सौंपी। एसडीएम ने इंदरजीत व उस वक्त के डीलिंग असिस्टेंट नरेश मेहता को दोषी पाया। तब कोर्ट ने दोनों को भी समन कर लिया व दोनों पर यह केस चला।