फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   There was no treatment, no operation, not even an ambulance was found.

Jhajjar-Bahadurgarh News: इलाज हुआ न ऑपरेशन, एंबुलेंस भी नहीं मिली

Sat, 27 Jul 2024 05:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Sat, 27 Jul 2024 05:51 AM IST
विज्ञापन
There was no treatment, no operation, not even an ambulance was found.
झज्जर। सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। अस्पताल में हड्डी व बंधीकरण के ऑपरेशन, पोस्टमार्टम, सिजेरियन डिलीवरी नहीं हुई। एनएचएम के तहत लगे डॉक्टर व अन्य कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे। इससे मरीजों की समस्या और ज्यादा बढ़ गई। इससे दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं बन सके। क्लीनिक मनोविज्ञानिक काउंसिलिंग, डीआईसी, मोबाइल हेल्थ टीम, मेंटल हेल्थ टीमों ने काम नहीं किया। ऐसे में मरीजों को वापस लौटना पड़ा। शुक्रवार को सिविल अस्पताल में चुनिंदा रोगों की ओपीडी ही हो सकी।
विज्ञापन

जिले में 160 सरकारी चिकित्सकों के अलावा एनएचएम के 500 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। एनएचएम के लगभग 100 कर्मचारियों के पास सूचना नहीं पहुंचने के कारण उन्होंने सुबह हाजिरी लगाई, लेकिन हड़ताल का पता लगने पर उसमें शामिल हो गए। चिकित्सकों की हड़ताल के चलते सड़क दुर्घटना, मारपीट तथा सिजेरियन डिलीवरी के 12 मामले रोहतक पीजीआई रेफर किया किए गए। दोपहर लगभग 12 बजे तक एंबुलेंस स्टॉफ ने भी हड़ताल रखी, लेकिन उसके बाद एनएचएम के नाइट ड्यूटी व एचकेआरएन के तहत लगे लगभग 13 चालक काम पर आ गए। इनकी मदद से मरीजों को रेफर किया गया। सिविल अस्पताल में डिलीवरी के मरीज को सुबह एंबुलेंस देने से इंकार कर दिया गया। दोपहर को एक अन्य डिलीवरी केस मामले में एंबुलेंस कंट्रोल रूम से मरीज को एंबुलेंस मिल गई। मरीज को सिविल अस्पताल से जहांगीरपुर जाना था। उसने एंबुलेंस स्टॉफ की शिकायत किसी नंबर पर की, जिसके बाद उसे एंबुलेंस मिल गई। हालांकि बुपनिया जाने वाले मरीज को एंबुलेंस नहीं मिली।
विज्ञापन


अस्पताल में ओपीडी रूम मिले बंद
सिविल अस्पताल में शुक्रवार को गायनी, अल्ट्रासाउंड, स्किन की ओपीडी चालू रही। इसके अलावा बच्चों, हड्डी रोग की ओपीडी नहीं हुई। इसके चलते मरीजों को वापस लौटना पड़ा। ओपीडी के कमरे ही बंद मिले। सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों व बच्चों को हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन



मैं अपने बेटे के साथ झज्जर अस्पताल में सुबह 10 बजे पहुंच गया था। उसे 57 नंबर कमरे में बेटे का प्रमाण पत्र बनवाना था। घंटों इंतजार करने पर भी कोई डाक्टर जांच करने नहीं आया। काफी निराश होकर वापिस अपने घर जाना पड़ा।
सुभाष, बहादुरगढ़




मैं अपने बेटे की जांच करवाने अस्पताल में सुबह तकरीबन 9 बजे गांव बिरोहड़ से आई थी। कार्ड बनवाने के बाद उसे 57 नंबर कमरे में जांच के लिए भेज दिया गया। अब दोपहर के एक बज गए, लेकिन कोई जांच के लिए वापस नहीं आया। लोगो से पूछा तो पता चला की हड़ताल चल रही है। चार दिन कुछ काम ही नहीं होगा।
उषा देवी, गांव बिरोहड़

नहीं मिली एंबुलेंस
परिवार में डिलीवरी हुई थी। आज छुट्टी मिल गई। उनको घर जाने के लिए एंबुलेंस लाने के लिए बोला गया। जब वह एंबुलेंस काउंटर पर गई तो उनको मना कर दिया गया कि एंबुलेंस नहीं है और हड़ताल चल रही है। अब निजी वाहन बुक कराया है। उसी में बच्चे व जच्चा को लेकर जाऊंगी।

निर्मला, बुपनियां

एनएचएम कर्मियों ने धरना देकर की नारेबाजी
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एनएचएम कर्मचारियों ने शुक्रवार को अस्पताल प्रांगण में धरना देकर नारेबाजी की। एनएचएम कर्मचारी संघ के जिला प्रवक्ता संदीप कुमार जांगड़ा व डॉक्टर भूपेंद्र ने बताया कि सबसे समस्त एनएचएम कर्मचारियों की एक ही मांग है नियमितीकरण किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed