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Jhajjar-Bahadurgarh News: हरियाणाा की सीमा का आखिरी स्कूल, बच्चे यहां नहीं दिल्ली जाते पढ़ने
Tue, 18 Feb 2025 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 18 Feb 2025 02:22 AM IST
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-फोटो 62 : मुकुंदपुर स्कूल में बहादुरगढ़ से ऑटो में बैठकर पढ़ने जाते विद्यार्थी।
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पंकज रोहिल्ला
बहादुरगढ़। मुकुंदपुर गांव का सरकारी स्कूल बंद होने के कगार पर है। वजह, गांव के बच्चे हरियाणा बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से पढ़ाई के बजाय दिल्ली के सरकारी स्कूल में सीबीएसई माध्यम से पढ़ने जा रहे हैं। दूसरी तरफ, स्कूल को बंद होने से बचाने के लिए शिक्षक 6 किमी दूर बहादुरगढ़ से बच्चे ला रहे हैं।
मुकुंदपुर गांव के सरकारी स्कूल में वर्ष 2023 में मिडिल स्कूल में महज सात विद्यार्थी रह गए थे। इस पर विभाग ने इस स्कूल को बामनौली के सरकारी स्कूल में मर्ज करने का आदेश दिया था। स्कूल बंद होने से बचाने के लिए तब शिक्षकों ने कड़ी मेहनत कर छात्र संख्या बढ़ाई। शिक्षकों ने सर्वे कर और घर-घर जाकर बहादुरगढ़ शहर के लाइनपार क्षेत्र से कई बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया। सरपंच सुमित छिकारा ने बच्चों को स्कूल तक लाने में ऑटो का किराया वहन कर मदद की, तब स्कूल मर्ज होने से बच गया था। वर्तमान में बहादुरगढ़ से 25 बच्चे स्कूल में पढ़ने आते हैं। इनका ऑटो किराया गांव के सरपंच और स्कूल के शिक्षक वहन करते हैं। एक ऑटो का किराया 7 हजार रुपये है।
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मिडिल स्कूल में 38, प्राइमरी में पढ़ते हैं 43 विद्यार्थी
मुकुंदपुर गांव के मिडिल स्कूल में 81 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इनमें 38 मिडिल तो 43 प्राइमरी स्कूल में हैं। इनमें बाल वाटिका में 6, पहली कक्षा में 10, दूसरी में 13, तीसरी में 3, चौथी में 6, पांचवीं में 5, छठी में 20, सातवीं में 14 और आठवीं कक्षा में महज 4 विद्यार्थी पढ़ते हैं।
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स्कूल में है 9 कर्मचारियों का स्टाफ मुकुंदपुर प्राइमरी और मिडिल स्कूल में 9 कर्मचारियों का स्टाफ है। इनमें 6 अध्यापक हैं। 4 अध्यापक मिडिल विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं तो दो प्राइमरी को। स्कूल में दो मिड डे मील बनाने के लिए कुक हैं और एक चपरासी है। प्राइमरी विंग की इंचार्ज सुषमा और मिडिल विंग की इंचार्ज कोमल रंगा हैं।
दिल्ली के स्कूलों में हैं सुविधाएं
मुकुंदपुर गांव के अधिकतर बच्चे गांव की सीमा के साथ लगते दिल्ली के जौनती गांव में सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते हैं। वजह, दिल्ली के सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। स्कूल की बिल्डिंग भी शानदार है, जबकि गांव के स्कूल में भवन भी ठीक नहीं हैं। इसके अलावा गांव में हरियाणा बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के माध्यम से पढ़ाई होती है, वहीं दिल्ली के सरकारी स्कूलों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड माध्यम से पढ़ाई हो रही है।
दिल्ली में सीबीएसई बोर्ड को प्राथमिकता दे रहे बच्चे
हरियाणा बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड स्कूल में काफी अंतर है, इसलिए विद्यार्थी सीबीएसई बोर्ड को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। बड़ा कारण हरियाणा बोर्ड की बिल्डिंग जर्जर होना, जबकि दिल्ली के सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग देखने में बेहद शानदार और साफ सुथरी है, इसलिए अधिकतर बच्चे दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए जा रहे हैं।
सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध प्राइवेट स्कूलों में नहीं पढ़ सकते तो लिया दिल्ली में दाखिला
दिल्ली के जौनती सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली पांचवीं कक्षा की छात्रा चालसी, सातवीं के भविष्य, तीसरी कक्षा की प्रियांशी व आठवीं के पुष्कर ने कहा कि वह मुकुंदपुर गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन वर्तमान समय में सभी विद्यार्थी सीबीएसई बोर्ड के प्राइवेट स्कूलों में जाते हैं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे प्राइवेट स्कूलों में नहीं पढ़ सकते, ऐसे में उन्होंने हरियाणा-दिल्ली सीमा पर स्थित दिल्ली के जौनती गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ना उचित समझा। यहां पर बेहतरीन बिल्डिंग हैं और साफ सफाई का भी विशेष ख्याल रखा जाता है।
स्कूल को बंद होने से बचाने के लिए न केवल वह स्वयं बल्कि स्कूल का समस्त स्टाफ मेहनत कर रहा है। पिछले वर्ष बहादुरगढ़ के लाइनपार क्षेत्र से उनके स्कूल के स्टाफ ने कई विद्यार्थियों को दाखिला स्कूल में करवाया था। वे स्वयं भी घर-घर जाकर लोगों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए जागरूक कर रही हैं। अब नए सेशन में भी विद्यार्थियों का अधिक से अधिक संख्या में दाखिला हो, इसको लेकर भी तैयारी की जा रही है।
-सुषमा, इंचार्ज प्राइमरी स्कूल
स्कूल में विद्यार्थियों बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है। स्कूल में बच्चों के दाखिले के लिए मुकुंदपुर गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र और शहर की कई कॉलोनियों में मुनादी करवाई जा रही है। स्कूल में विद्यार्थियों को अच्छा माहौल दिया जा रहा है। पिछले सत्र में गांव के सरपंच सुमित छिकारा की ओर से भी बच्चों के दाखिले करवाए गए थे और बहादुरगढ़ से आने वाले विद्यार्थियों के ऑटो का किराया भी वे स्वयं वहन कर रहे हैं।
-कोमल रंगा, इंचार्ज मिडिल
- मैंने एक साल तक बच्चों का ऑटो का खर्च अपनी तरफ से दिया है। गांव के स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए मुनादी भी करवाई है, लेकिन हर साल यह खर्चा उठाने में समर्थ नहीं हूं, इसलिए अप्रैल से ऑटो और स्कूल के अन्य खर्च नहीं उठा सकता। स्कूल को मर्ज होने से बचाने के लिए कार्य किया। अब कोई स्कूल में बच्चों को पढ़ाना ही नहीं चाहता तो मैं क्या कर सकता हूं। साल भर का खर्च लाखों में पड़ता है। मैंने एक साल सहयोग किया। इससे ज्यादा नहीं कर सकता।
-सुमित छिकारा, सरपंच मुकुंदपुर
-फोटो 59 : सुमित छिकारा, सरपंच मुकुंदपुर
-फोटो 60 : मुकुंदपुर सरकारी स्कूल की बिल्डिंग में छत से झड़ता लेंटर। संवाद
फोटो 62, 63

-फोटो 62 : मुकुंदपुर स्कूल में बहादुरगढ़ से ऑटो में बैठकर पढ़ने जाते विद्यार्थी।