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Jhajjar-Bahadurgarh News: गौरव पट्ट पर 8 साल में भी नहीं दर्ज हुआ गांव का इतिहास
Sun, 30 Jun 2024 06:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 30 Jun 2024 06:02 AM IST
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5 गोरिया गांव में लगे गौरव पट्ट पर चस्पा कर लगाया गया इश्तिहार व सानी कटाई के लिए लिखे गए मोबाइ
साल्हावास। हरियाणा सरकार ने नवंबर 2016 में गांव के प्रवेश द्वार के पास गौरव पट्ट लगवाए थे। इन पर गांव की खूबी और इतिहास संक्षेप में दर्ज होना था लेकिन गौरव पट्ट तो लग गए लेकिन आठ साल बाद भी अधिकांश गांवों में इन पर गांव का इतिहास नहीं लिखा गया।
साल्हावास क्षेत्र में गौरव पट्ट लगाए तो जरूर लगाए गए हैं लेकिन अनेकों गांवों के गौरव पट्ट पर गांव का इतिहास आज तक नहीं दर्शाया गया है।
हजारों रुपये खर्च कर प्रत्येक गांव में यह गौरव पट्ट लगाए गए थे। गौरव पट्ट पर उस गांव से संबंधित सभी बातें, जिस पर गांव वासियों को गर्व महसूस हो उसका उल्लेख किया जाना है। इस पट्ट पर गांव से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों और आजादी के दीवानों की गाथा, गांव की महान विभूतियों के नाम, दानवीरों के नाम और गांव से संबंधित पदक विजेता खिलाड़ियों आदि का विवरण लिखा जाना है।
गौरव पट्ट पर गांव की कुल आबादी, क्षेत्रफल, तहसील, जिला मुख्यालय तक का विवरण करना है। गौरव पट्ट पर यह सूचना भी प्रमुखता से दर्शानी थी कि यह गांव कब बसा और किसने बसाया, लेकिन क्षेत्र के गिने चुने गांवों में ही इन गौरव पट्ट के लगाने का उद्देश्य पूरा हुआ। अधिकतर गांव में गौरव पट्ट आज भी बिना इतिहास के खाली पड़े हुए दिखाई देते हैं। कई गांवों में तो गौरव पट्ट भौगोलिक क्षेत्रफल व जनसंख्या ही दर्ज की गई है। कुछ गांवों में ये खाली पड़े हैं। ग्रामीणों ने गाैरव पट्ट पर जल्द गांव का इतिहास दर्ज कराने की मांग की है।
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साल्हावास क्षेत्र में गौरव पट्ट लगाए तो जरूर लगाए गए हैं लेकिन अनेकों गांवों के गौरव पट्ट पर गांव का इतिहास आज तक नहीं दर्शाया गया है।
हजारों रुपये खर्च कर प्रत्येक गांव में यह गौरव पट्ट लगाए गए थे। गौरव पट्ट पर उस गांव से संबंधित सभी बातें, जिस पर गांव वासियों को गर्व महसूस हो उसका उल्लेख किया जाना है। इस पट्ट पर गांव से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों और आजादी के दीवानों की गाथा, गांव की महान विभूतियों के नाम, दानवीरों के नाम और गांव से संबंधित पदक विजेता खिलाड़ियों आदि का विवरण लिखा जाना है।
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गौरव पट्ट पर गांव की कुल आबादी, क्षेत्रफल, तहसील, जिला मुख्यालय तक का विवरण करना है। गौरव पट्ट पर यह सूचना भी प्रमुखता से दर्शानी थी कि यह गांव कब बसा और किसने बसाया, लेकिन क्षेत्र के गिने चुने गांवों में ही इन गौरव पट्ट के लगाने का उद्देश्य पूरा हुआ। अधिकतर गांव में गौरव पट्ट आज भी बिना इतिहास के खाली पड़े हुए दिखाई देते हैं। कई गांवों में तो गौरव पट्ट भौगोलिक क्षेत्रफल व जनसंख्या ही दर्ज की गई है। कुछ गांवों में ये खाली पड़े हैं। ग्रामीणों ने गाैरव पट्ट पर जल्द गांव का इतिहास दर्ज कराने की मांग की है।
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