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Jhajjar-Bahadurgarh News: पूर्णमल का किस्सा सुनकर भाव विभोर हुए दर्शक
Thu, 16 Nov 2023 01:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 16 Nov 2023 01:40 AM IST
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बहादुरगढ़। लाइन पर स्थित पंडित लख्मीचन्द धर्मशाला में पांच दिवसीय हरियाणवीं सांग बुधवार से शुरु हुआ। पंडित लख्मीचंद के पौत्र सांगी पंडित विष्णुदत कौशिक ने भगत पूर्णमल का किस्सा सुनाकर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।
सांग का शुभारंभ नगर परिषद चेयरपर्सन सरोज रमेश राठी और वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा ने दीप प्रज्वलित किया। पंडित लख्मीचंद के पौत्र प्रसिद्ध सांगी पंडित विष्णुदत कौशिक, धर्मशाला समिति के प्रधान प्रवीण शर्मा, महासचिव सतीश शर्मा और उपप्रधान बलराम गौतम ने धर्मशाला परिसर में स्थापित पंडित लख्मीचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। सांग के पहले दिन प्रसिद्ध सांगी विष्णु दत्त कौशिक ने भगत पूर्ण मल के किस्से को सुनाया। पंडित विष्णु दत्त ने सांग के माध्यम से बताया कि गुरु गोरखनाथ के वरदान से स्यालकोट के राजा सुलेमान की पत्नी ने पूर्णमल को जन्म दिया। बाद में पूर्णमल शादी से इंकार कर देता है और पिता से कहता है कि तपस्या करेगा। वह एक दिन अपनी मौसी नूणादे से मिलने महल में जाता है। बेटे की रागिनी सुण भाजी आई दस पंदरा डंग धरके रागिनी ने दर्शकों का मन मोह लिया। बाद में पूर्णमल पर झूठा आरोप लगा देती है। राजा बेटे पूर्णमल की हत्या का आदेश देता है। जल्लाद पूर्णमल को अंधे कुंए में फेंककर चले आते हैंं। कई वर्षों बाद गुरु गोरखनाथ ने कुंए से पूर्णमल को बाहर निकाला। पूर्णमल अपनी भक्ति, शक्ति व चरित्र की वजह से प्रसिद्ध हुए। इस अवसर पर पार्षद राजेश तंवर, पार्षद अनिल सिंघल, पूर्व प्रधान मामनराम, पूर्व प्रधान मंजीत पाराशर उपस्थित रहे। सांग के आयोजन में रमेश दीक्षित, रमेश शर्मा, पवन दीक्षित, ब्रह्म प्रकाश, सुमित अत्री, अमित अत्री, सतीश भारद्वाज, प्रताप सिंह, बिल्लू पंडित, बिजेंद्र भारद्वाज का सहयोग रहा।
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सांग का शुभारंभ नगर परिषद चेयरपर्सन सरोज रमेश राठी और वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा ने दीप प्रज्वलित किया। पंडित लख्मीचंद के पौत्र प्रसिद्ध सांगी पंडित विष्णुदत कौशिक, धर्मशाला समिति के प्रधान प्रवीण शर्मा, महासचिव सतीश शर्मा और उपप्रधान बलराम गौतम ने धर्मशाला परिसर में स्थापित पंडित लख्मीचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। सांग के पहले दिन प्रसिद्ध सांगी विष्णु दत्त कौशिक ने भगत पूर्ण मल के किस्से को सुनाया। पंडित विष्णु दत्त ने सांग के माध्यम से बताया कि गुरु गोरखनाथ के वरदान से स्यालकोट के राजा सुलेमान की पत्नी ने पूर्णमल को जन्म दिया। बाद में पूर्णमल शादी से इंकार कर देता है और पिता से कहता है कि तपस्या करेगा। वह एक दिन अपनी मौसी नूणादे से मिलने महल में जाता है। बेटे की रागिनी सुण भाजी आई दस पंदरा डंग धरके रागिनी ने दर्शकों का मन मोह लिया। बाद में पूर्णमल पर झूठा आरोप लगा देती है। राजा बेटे पूर्णमल की हत्या का आदेश देता है। जल्लाद पूर्णमल को अंधे कुंए में फेंककर चले आते हैंं। कई वर्षों बाद गुरु गोरखनाथ ने कुंए से पूर्णमल को बाहर निकाला। पूर्णमल अपनी भक्ति, शक्ति व चरित्र की वजह से प्रसिद्ध हुए। इस अवसर पर पार्षद राजेश तंवर, पार्षद अनिल सिंघल, पूर्व प्रधान मामनराम, पूर्व प्रधान मंजीत पाराशर उपस्थित रहे। सांग के आयोजन में रमेश दीक्षित, रमेश शर्मा, पवन दीक्षित, ब्रह्म प्रकाश, सुमित अत्री, अमित अत्री, सतीश भारद्वाज, प्रताप सिंह, बिल्लू पंडित, बिजेंद्र भारद्वाज का सहयोग रहा।
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