टोल खुले: डीघल टोल पर रात 10 बजकर 9 मिनट पर वसूली शुरू, किसान आंदोलन में 25 दिसंबर 2020 से था बंद
टोल शुरू होने से अब फिर से वाहन चालकों के लिए सफर महंगा होगा। फास्टैग न होने पर दोगुनी फीस वसूली जाएगी।
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डीघल टोल प्लाजा 25 दिसंबर 2020 से बंद पड़ा था। किसान आंदोलन के चलते यहां से वाहन अब तक बिना रोक-टोक के गुजर रहे थे। टोल कंपनी को पिछले 11 माह से ज्यादा समय में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। रविवार रात दस बजकर 9 मिनट पर टोल कंपनी ने टोल वसूली शुरू कर दी है।
पिछले एक साल से किसान आंदोलन के चलते टोल प्लाजा बंद होने के कारण टोल चलाने वाली कंपनियों ने काम छोड़ दिया है। अब टोल का संचालन नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचआई) ने शुरू कर दिया है।
एनएचएआई अधिकारियों की मानें तो 20 किलोमीटर तक के लोगों को पहले सरकार की तरफ से 70 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती थी। सब्सिडी को अब बंद कर दिया गया। 20 किलोमीटर के लोकल यूजर को 285 रुपये का हर माह पास लेना होगा।
फास्टैग बिना दोगुनी राशि वसूली जाएगी
टोल प्रबंधकों ने बताया कि सभी वाहनों पर फास्टैग अनिवार्य है। जिस गाड़ी पर फास्टैग नहीं होगा उसकी कैश में दोगुनी राशि वसूली जाएगी। इसलिए गाड़ी चालकों को फास्टैग लगवाना जरूरी है ताकि वे फास्टैग लाइन से गुजर सकें।
टोल चालू करने के लिए स्टाफ को बुलाया
रविवार को टोल चालू करने के लिए करीब 150 कर्मचारियों को बुलाया गया था। तीन शिफ्टों में काम करने के लिए कर्मचारियों को बुलाया गया था, लेकिन किसानों ने देर शाम को टोल से टैंट हटाया था। उसके बाद अधिकारी टोल चालू करवाने में लग गए और रात तक टोल संचालन शुरू कर दिया गया।
हर रोज गुजरते थे करीब 12 हजार वाहन
डीघल टोल प्लाजा से किसान आंदोलन से पहले करीब 12 हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते थे। हर रोज करीब 9 लाख रुपये इकठ्ठे होते थे। अब पिछले करीब एक साल से टोल बंद होने से कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
बढ़े दाम वसूले जाएंगे
- कार 45 रूपये
- एलसीवी वाहन 75 रूपये
- बस अथवा ट्रक 160 रूपये
- मल्टी एक्सेल वाहन 250 रूपये
- ओवरसाइज वाहन 305 रूपये
अगस्त में बंद कर दी थी सब्सिडी
सरकार द्वारा पहले स्थानीय लोगों को को मासिक पास में सब्सिडी दी जाती थी। टोल बंद होने के कारण सरकार ने अगस्त में सब्सिडी को बंद कर दिया था। एनएचआई के आदेशनुसार अब 20 किलोमीटर के स्थानीय लोगों को 285 रुपये मंथली पास लेना होगा। जोकि 1 तारीख से 30 तक वैध होगा। उसके बाद अगले माह फिर पास लेना होगा। व्यवसायिक वाहनों को किसी प्रकार की कोई छूट नहीं दी जाएगी।
एक माह 3 करोड़ रुपये एकत्रित होता था
टोल अधिकारियों की माने तो जिस समय डीघल टोल पर वाहन टोल देकर गुजरते थे। तब हर माह 3 करोड़ रुपये एकत्रित होते थे। अब पिछले करीब एक साल से टोल बंद होने के कारण टोल कंपनी को 30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
टोल पर सरकार की तरफ से सब्सिडी बंद कर दी गई है। एनएचएआई के नियमानुसार 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले उपभोक्ताओं को 285 रुपये मासिक पास लेना होगा। व्यवसायिक वाहनों को टोल अदा करना होगा। -नितेश मलिक, टोल प्रबंधक, डीघल
डीघल टोल से किसानों ने हटाया टेंट, धरना समाप्त
तीन कृषि कानूनों के विरोध में करीब एक साल से नेशनल हाईवे 71 पर स्थित डीघल टोल पर रविवार शाम किसानों ने अपना टेंट हटा लिया। टेंट हटाने के बाद किसानों का धरना समाप्त हो गया। रविवार को टोल अधिकारियों ने टोल को शुरू भी कर दिया।
किसानों ने अपना टेंट हटाना शुरू किया तो टोल अधिकारी भी टोल शुरू करवाने में लग गए, लेकिन शाम 5 बजे तक टोल चालू नहीं हो सका था। टोल पर धरना दे रहे पूर्व सरपंच मांगे राम ने कहा कि सुयंक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर धरना खत्म कर दिया है। शनिवार को टोल प्लाजा पर रागिनी व भंडारे का आयोजन किया गया था। रविवार दोपहर बाद टोल से टेंट हटा दिया गया।
हम संयुक्त किसान मोर्चा के फैसले का स्वागत करते हैं। सरकार की ओर से किसानों की सभी मांगें माने जाने पर चारों तरफ खुशी है। आंदोलन में बहुत कुछ सीखने को मिला है। इसे कई पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। किसान सुरेंद्र कादयान ने कहा कि केंद्र सरकार के रवैये के खिलाफ किसानों ने एक साल से भी ज्यादा समय तक संघर्ष किया। यह किसानों के संघर्ष की बड़ी जीत है। पंजाब, हरियाणा, यूपी से लेकर पूरे देश के किसानों ने इस आंदोलन ने एकजुट करने का काम किया।