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Jhajjar-Bahadurgarh News: सुविधाओं से कोसो दूर है गांव खेड़ा थरू
Tue, 03 Oct 2023 01:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 03 Oct 2023 01:37 AM IST
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साल्हावास। जिले मुख्यालय से 50 किलोमीटर व तहसील मातनहेल से 25 किलोमीटर कनीना-महेंद्रगढ़ के अंतिम छोर पर बसा गांव खेड़ा थरू सरकारी सुविधाओं से महरूम है। आजादी के 76 वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव में किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं है। गांव में एक आंगनबाड़ी केंद्र को छोड़कर बैंक, डाकघर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु अस्पताल, व राजकीय प्राथमिक विद्यालय तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
पूर्व सरपंच राजेन्द्र, समशेर, भगत सिंह पूर्व सरपंच, शिव कुमार आदि का कहना है कि गांव में आबादी 800 है तथा 500 के करीब मतदाता हैं। गांव में लगभग नर्सरी से बारहवीं तक के बच्चों की संख्या लगभग 60 है। गांव में विद्यालय न होने के कारण बच्चे निजी स्कूलों पर निर्भर करते हैं। गांव के गरीब तबके के विद्यार्थियों को नजदीकी कस्बे बहु के स्कूल में आने के लिए लगभग चार से पांच किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। गांव में परिवहन सुविधा भी नहीं है, जिसके कारण जिला मुख्यालय या तहसील स्तर पर आने जाने वाले ग्रामीणों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
गांव में प्राथमिक विद्यालय था, जो बच्चों की संख्या कम होने के कारण बंद कर दिया गया है।
राजकुमार पूर्व सरपंच
गांव में किसी भी तरह की कोई परिवहन व चिकित्सा सुविधा नहीं है। छोटे छोटे काम के लिए भी पड़ोसी गांव बहु में जाना पड़ता है।
मास्टर ईश्वर सिंह
यह गांव महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, झज्जर की सीमाओं को छूता है लेकिन तीन जिलों की सीमाओं से जुड़े होने के बाद भी सुविधाओं से महरूम है।
कृष्ण
पेयजल की सुविधा नहीं
गांव में पेयजल की सुविधा भी नाममात्र की है। गांव के लोग पंचायती ट्यूबवेल पर निर्भर करते हैं।
रोशनलाल पंडित
तीन जिलों की सीमाओं से जुड़ा गांव खेड़ा थरू
यह गांव जिला झज्जर के अंतिम छोर पर बसा हुआ है। इस गांव की सीमाएं महेंद्रगढ़ व चरखी दादरी से भी लगती हैं। तीन जिलों की सीमाओं से जुड़ा होने के बाद भी यह गांव सरकारी सुविधाओं से वंचित है। शिवरात्रि पर्व पर महेंद्रगढ़ जिले के गांव बागोत में प्राचीन शिव मंदिर में जाने के लिए भी हरियाणा के लाखों श्रद्धालु इसी मार्ग से होकर जातें हैं, लेकिन आजादी के 76 वर्ष बीत जाने पर भी इस गांव से निजी वह सरकारी बसों का न चलना अपने आपमें एक गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है।
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वर्जन
गांव में सिर्फ एक आंगनबाड़ी केंद्र को छोड़कर किसी भी तरह का कोई सरकारी कार्यालय नहीं है। न ही सरकारी सुविधाएं हैं।
आशीष सरपंच, खेड़ा थरू गांव
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पूर्व सरपंच राजेन्द्र, समशेर, भगत सिंह पूर्व सरपंच, शिव कुमार आदि का कहना है कि गांव में आबादी 800 है तथा 500 के करीब मतदाता हैं। गांव में लगभग नर्सरी से बारहवीं तक के बच्चों की संख्या लगभग 60 है। गांव में विद्यालय न होने के कारण बच्चे निजी स्कूलों पर निर्भर करते हैं। गांव के गरीब तबके के विद्यार्थियों को नजदीकी कस्बे बहु के स्कूल में आने के लिए लगभग चार से पांच किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। गांव में परिवहन सुविधा भी नहीं है, जिसके कारण जिला मुख्यालय या तहसील स्तर पर आने जाने वाले ग्रामीणों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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गांव में प्राथमिक विद्यालय था, जो बच्चों की संख्या कम होने के कारण बंद कर दिया गया है।
राजकुमार पूर्व सरपंच
गांव में किसी भी तरह की कोई परिवहन व चिकित्सा सुविधा नहीं है। छोटे छोटे काम के लिए भी पड़ोसी गांव बहु में जाना पड़ता है।
मास्टर ईश्वर सिंह
यह गांव महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, झज्जर की सीमाओं को छूता है लेकिन तीन जिलों की सीमाओं से जुड़े होने के बाद भी सुविधाओं से महरूम है।
कृष्ण
पेयजल की सुविधा नहीं
गांव में पेयजल की सुविधा भी नाममात्र की है। गांव के लोग पंचायती ट्यूबवेल पर निर्भर करते हैं।
रोशनलाल पंडित
तीन जिलों की सीमाओं से जुड़ा गांव खेड़ा थरू
यह गांव जिला झज्जर के अंतिम छोर पर बसा हुआ है। इस गांव की सीमाएं महेंद्रगढ़ व चरखी दादरी से भी लगती हैं। तीन जिलों की सीमाओं से जुड़ा होने के बाद भी यह गांव सरकारी सुविधाओं से वंचित है। शिवरात्रि पर्व पर महेंद्रगढ़ जिले के गांव बागोत में प्राचीन शिव मंदिर में जाने के लिए भी हरियाणा के लाखों श्रद्धालु इसी मार्ग से होकर जातें हैं, लेकिन आजादी के 76 वर्ष बीत जाने पर भी इस गांव से निजी वह सरकारी बसों का न चलना अपने आपमें एक गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है।
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गांव में सिर्फ एक आंगनबाड़ी केंद्र को छोड़कर किसी भी तरह का कोई सरकारी कार्यालय नहीं है। न ही सरकारी सुविधाएं हैं।
आशीष सरपंच, खेड़ा थरू गांव