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Jhajjar-Bahadurgarh News: जिले में अब तक 6.5 लाख लोगों की बनी आभा आई, 4.51 लाख की बनना बाकी
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संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और आसान बनाने के उद्देश्य से बनाई जा रही आभा आईडी का लक्ष्य जल्द से जल्द पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे लोगों को जागरूक कर सकें और लक्ष्य को पूरा कर सकें।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 11,01,312 लोगों की आभा आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अब तक केवल 6 लाख 50 हजार लोगों की ही आभा आईडी बनाई जा सकी है। अभी भी 4.51 लाख लोगों की आभा आईडी बनना बाकी है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत यह प्रक्रिया की जा रही है।
नागरिक अस्पताल में भी जांच और उपचार के लिए आने वाले मरीजों को आभा आईडी के बारे में जागरूक किया जा रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अस्पताल में आने वाले मरीजों को इसकी सही जानकारी दे सकें।
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आभा आईडी के फायदे...
- पर्ची बनवाने के लिए मरीज को लाइन में लगने की जरूरत नहीं है।
- क्यूआर कोड स्कैन करके टोकन नंबर लिया जा सकता है।
- टोकन नंबर मिलने के बाद चिकित्सक के कमरे के बाहर लाइन में लगने की जरूरत नहीं रहती।
- टोकन नंबर के हिसाब से डॉक्टर मरीज को जांच के लिए बुलाता है।
- टोकन नंबर लेने वाले मरीज को जांच के लिए प्राथमिकता दी जाती है।
- मरीज को दिया गया इलाज आभा आईडी पर सेव रहता है।
- दूसरी जगहों पर इलाज कराते समय भी ट्रीटमेंट हिस्ट्री चिकित्सक देख पाते हैं।
- पुराने इलाज से जुड़े पेपर लेकर मरीज को नहीं भटकना पड़ता है।
इस तरह पाएं टोकन नंबर
नागरिक अस्पताल में टोकन नंबर लेने के लिए अपने मोबाइल में आभा एप खोलें। अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास लगे आभा क्यूआर कोड को एप में दिए गए ऑप्शन पर जाकर स्कैन करें। स्कैनिंग होने के बाद आपके मोबाइल पर टोकन नंबर दिखाई देगा।
वर्जन
आभा आईडी मरीजों की सुविधा के लिए बनाई गई है। लोगों से अपील है कि अपनी आभा आईडी जरूर बनवाएं। इसके लिए आधार कार्ड और उससे जुड़ा मोबाइल नंबर होना जरूरी होता है। स्टाफ के लिए भी इसके लिए ट्रेनिंग सेशन रखे जा रहे हैं। लोगों को भी इसके लिए आगे आना चाहिए।
डॉ. आकृति हुड्डा, डिप्टी सीएमओ
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झज्जर। स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और आसान बनाने के उद्देश्य से बनाई जा रही आभा आईडी का लक्ष्य जल्द से जल्द पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे लोगों को जागरूक कर सकें और लक्ष्य को पूरा कर सकें।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 11,01,312 लोगों की आभा आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अब तक केवल 6 लाख 50 हजार लोगों की ही आभा आईडी बनाई जा सकी है। अभी भी 4.51 लाख लोगों की आभा आईडी बनना बाकी है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत यह प्रक्रिया की जा रही है।
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नागरिक अस्पताल में भी जांच और उपचार के लिए आने वाले मरीजों को आभा आईडी के बारे में जागरूक किया जा रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अस्पताल में आने वाले मरीजों को इसकी सही जानकारी दे सकें।
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आभा आईडी के फायदे...
- पर्ची बनवाने के लिए मरीज को लाइन में लगने की जरूरत नहीं है।
- क्यूआर कोड स्कैन करके टोकन नंबर लिया जा सकता है।
- टोकन नंबर मिलने के बाद चिकित्सक के कमरे के बाहर लाइन में लगने की जरूरत नहीं रहती।
- टोकन नंबर के हिसाब से डॉक्टर मरीज को जांच के लिए बुलाता है।
- टोकन नंबर लेने वाले मरीज को जांच के लिए प्राथमिकता दी जाती है।
- मरीज को दिया गया इलाज आभा आईडी पर सेव रहता है।
- दूसरी जगहों पर इलाज कराते समय भी ट्रीटमेंट हिस्ट्री चिकित्सक देख पाते हैं।
- पुराने इलाज से जुड़े पेपर लेकर मरीज को नहीं भटकना पड़ता है।
इस तरह पाएं टोकन नंबर
नागरिक अस्पताल में टोकन नंबर लेने के लिए अपने मोबाइल में आभा एप खोलें। अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास लगे आभा क्यूआर कोड को एप में दिए गए ऑप्शन पर जाकर स्कैन करें। स्कैनिंग होने के बाद आपके मोबाइल पर टोकन नंबर दिखाई देगा।
वर्जन
आभा आईडी मरीजों की सुविधा के लिए बनाई गई है। लोगों से अपील है कि अपनी आभा आईडी जरूर बनवाएं। इसके लिए आधार कार्ड और उससे जुड़ा मोबाइल नंबर होना जरूरी होता है। स्टाफ के लिए भी इसके लिए ट्रेनिंग सेशन रखे जा रहे हैं। लोगों को भी इसके लिए आगे आना चाहिए।
डॉ. आकृति हुड्डा, डिप्टी सीएमओ