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Jhajjar-Bahadurgarh News: कॉपी और किताब के साथ स्कूल संचालक बदल रहे यूनिफॉर्म, कट रही अभिभावकों की जेब
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-फोटो 55 : शहर में एक दुकान से स्कूल ड्रेस खरीदते अभिभावक। संवाद
बहादुरगढ़। 1 अप्रैल से स्कूलों में नया सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में कई स्कूल संचालकों द्वारा जहां यूनिफॉर्म बदली गई हैं। वहीं नई कॉपी और किताबों के नाम पर अभिभावकों का अनावश्यक खर्च हो रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और स्कूलों की ओर से बदली गई कॉपी-किताबें और ड्रेस बदलने से आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
हर साल किताब और कॉपियों के साथ स्कूल की यूनिफॉर्म में मामूली बदलाव कर अभिभावकों को खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। महंगे दामों से उन्हें ठगा जा रहा है। यूनिफॉर्म का कपड़ा साधारण है, लेकिन उसमें नया बैच लगाकर या स्कूल का नाम लिखकर अलग बना दिया जाता है। इससे कि यह स्कूल की ओर से तय दुकान के अलावा कहीं और न मिले। यूनिफॉर्म के दाम भी बाजार से दोगुना हैं। इस वजह से अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।
पहले सफेद तो अब नीली
शहर के कई स्कूल संचालकों ने इस बार यूनिफार्म बदल दी है। कहीं सफेद की जगह नीली ड्रेस लागू की गई है तो कहीं हरी की जगह सफेद और कहीं लाल टी-शर्ट और सफेद निक्कर लगा दी गई है। पिछले वर्ष मेरे बेटे की यूनिफार्म सफेद रंग की थी। इस बार नीली है। जो शर्ट-पेंट बाजार में करीब 350 रुपये की है वह स्कूल संचालकों की ओर से बताई गई दुकान पर 500 से 550 रुपये की मिल रही है।
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हर साल लूटने के लिए नया तरीका तलाशते हैं स्कूल वाले
हर साल बच्चों की पढ़ाई के लिए आपको 10 से 12 हजार रुपये का बजट रखना पड़ता है। कॉपी के ऊपर स्कूल का नाम लिखकर आ रहा है। बाजार से दूसरी कोई कॉपी खरीद नहीं सकते। स्कूल वाले हर साल अभिभावकों को लूटने के लिए नया तरीका तलाश लेते हैं।
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हर साल किताब और कॉपियों के साथ स्कूल की यूनिफॉर्म में मामूली बदलाव कर अभिभावकों को खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। महंगे दामों से उन्हें ठगा जा रहा है। यूनिफॉर्म का कपड़ा साधारण है, लेकिन उसमें नया बैच लगाकर या स्कूल का नाम लिखकर अलग बना दिया जाता है। इससे कि यह स्कूल की ओर से तय दुकान के अलावा कहीं और न मिले। यूनिफॉर्म के दाम भी बाजार से दोगुना हैं। इस वजह से अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।
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पहले सफेद तो अब नीली
शहर के कई स्कूल संचालकों ने इस बार यूनिफार्म बदल दी है। कहीं सफेद की जगह नीली ड्रेस लागू की गई है तो कहीं हरी की जगह सफेद और कहीं लाल टी-शर्ट और सफेद निक्कर लगा दी गई है। पिछले वर्ष मेरे बेटे की यूनिफार्म सफेद रंग की थी। इस बार नीली है। जो शर्ट-पेंट बाजार में करीब 350 रुपये की है वह स्कूल संचालकों की ओर से बताई गई दुकान पर 500 से 550 रुपये की मिल रही है।
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हर साल लूटने के लिए नया तरीका तलाशते हैं स्कूल वाले
हर साल बच्चों की पढ़ाई के लिए आपको 10 से 12 हजार रुपये का बजट रखना पड़ता है। कॉपी के ऊपर स्कूल का नाम लिखकर आ रहा है। बाजार से दूसरी कोई कॉपी खरीद नहीं सकते। स्कूल वाले हर साल अभिभावकों को लूटने के लिए नया तरीका तलाश लेते हैं।