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Jhajjar-Bahadurgarh News: कल से सावन की शुरूआत, सजने लगे मंदिर-शिवालय

Sun, 21 Jul 2024 04:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Sun, 21 Jul 2024 04:51 AM IST
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Sawan starts from tomorrow, temples and pagodas started getting decorated
बहादुरगढ़ में झज्जर रोड पर लगी भोले बाबा की मूर्ति।
बहादुरगढ़। भगवान भोलेनाथ को समर्पित श्रावण मास की शुरूआत 22 जुलाई से हो रही है। खास बात यह है कि सोमवार से ही श्रावण माह की शुरूआत हो रही है और समापन 19 अगस्त सोमवार को ही होगा। इस साल शिव भक्तों को सावन के पांच सोमवार व नौ विशेष योग का पुण्य मिलेगा। शहर के मंदिरों में श्रावण माह की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों में सजावट का काम चल रहा है। शहर के बाजारों में भी रौनक छा गई है।
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लालचंद कॉलोनी निवासी ज्योतिषाचार्य रमेश भगत का कहना है कि शिव महापुरण के अनुसार, श्रावण माह का हर दिन भगवान शिव के पूजन के लिए शुभ है। आमतौर तौर पर रुद्राभिषेक करने के लिए शिववास देखने की आवश्यकता होती है, लेकिन श्रावण मास में ये बंधन लागू नहीं होता है। इस महीने के किसी भी दिन और किसी भी समय बिना तिथि व मुहूर्त देखे रुद्राभिषेक कर सकते हैं। सोमवार से शुरुआत होने पर श्रावण मास की महिमा और बढ़ जाती है।
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विपरीत ग्रह भी करते हैं शिव की आराधना, दुष्प्रभाव नहीं देते : पंडित सियाराम

काठ मंडी स्थित शिव-हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित सीयाराम के मुताबिक, इन दिनों शनि वक्री चल रहे हैं। देव गुरु बृहस्पति अपने रम शत्रु दैत्य गुरु शुक्राचार्य के साथ हैं। वहीं जल्द ही बुध भी सिंहस्थ हो जाएंगे। इसे देखें तो वर्तमान में ग्रहों की परिस्थिति वैसे तो प्रतिकूल हैं, लेकिन श्रावण मास के दौरान ऐसी मान्यता है कि सभी ग्रह महादेव की पूजा करते हैं, इसलिए दुष्प्रभाव नहीं देते हैं।
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पूरे महीने मिलेंगे शुभ संयोग

लालचंद कॉलोनी निवासी ज्योतिषाचार्य रमेश भगत ने बताया कि श्रावण के प्रथम सोमवार को ही प्रीति योग, आयुष्मान योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। श्रावण मास के दौरान कुबेर योग, शश योग, गज केसरी योग, बुधादित्य योग, शुक्रादित्य योग एवं नवम पंचम योग अलग-अलग समय में बनेंगे और अपना शुभ प्रभाव छोड़ेंगे।




शीतल जल के अभिषेक से प्रसन्न होते हैं शिव

पंडित सीयाराम ने बताया कि भगवान शिव शीतल जलाभिषेक से प्रसन्न होते हैं। भगवान आशुतोष रूप से शीघ्र प्रसन्न होकर आनंददायी कल्याणकारी वरदान प्रदान करते हैं। चातुर्मास असल में सन्यासियों द्वारा समाज को मार्ग दर्शन करने का समय है। आम आदमी इन चार महीनों में अगर केवल सत्य ही बोले तो भी उसे अपने अंदर आध्यात्मिक प्रकाश नजर आएगा।
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