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झज्जर-बहादुरगढ़: सरपंचों ने चेताया, ई-टेंडरिंग और राइट टू रिकॉल को खत्म करे सरकार नही तो वोट से देंगे जवाब
Thu, 16 Feb 2023 12:42 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 16 Feb 2023 12:42 AM IST
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झज्ज्जर । लघु सचिवालय में सरपंचों का धरना 32 दिनों से जारी है। सरपंच एसोसिएशन से जुड़े 262 सरपंच अपनी मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। बुधवार को सरपंचों ने सरकार को चेतावनी दी कि ई-टेंडरिंग और राइट टू रिकॉल को खत्म करे अन्यता आगामी चुनाव में वे वोट से जवाब देंगे।
सरपंचों ने कहा कि अभी तक सरकार को कोई नुमाइंदा उनके पास नहीं पहुंचा। वे उपायुक्त, सांसद अरविंद शर्मा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ और केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को ज्ञापन सौंप चुके हैं लेकिन उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया। जिला सरपंच एसोसिएशन के अध्यक्ष सोनू और उपाध्यक्ष बलवान हसनपुर ने कहा कि आगामी 2024 के चुनाव में सरपंच वोट से जवाब देंगे। सरकार उन्हें राइट टू रिकॉल और ई-टेंडरिंग में फंसा रही है जिससे गांव का विकास रुका हुआ है। धरने में महिला सरपंचों की भी भागीदारी है। इस दौरान आनन्द, रविद्र कुमार, गोविंद पाटोदा, सोमबीर, दारा, सतनारायण, अनिल जौंधी, राव विरेद्र, सरोज देवी,अनीता, अशुंया पंच, कृष्णा आदि मौजूद रहे।
सरपंचों की प्रतिक्रियाएं
लघु सचिवालय में 32 दिन से धरना प्रदर्शन जारी है। इससे गांव का कार्य बाधित हो रहे हैं। पंचायत मंत्री को सरपंचों की बात माननी चाहिए और धरने को खत्म करवाने में सहयोग करना चाहिए गांव के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। - बेबी सरपंच हुमायूंपुर
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पहले बीडीपीओ कार्यालय और अब लघु सचिवालय में धरना प्रदर्शन जारी है। जब तक ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल को खत्म नहीं किया जाता है। सरकार के मंत्री व विधायकों को भी राइट टू रिकॉल के दायरे में लाया जाए।- बलवान सिंह सरपंच गांव हसनपुर ।
सरपंचों की मांग बिल्कुल जायज है। सरकार को सरपंचों की मांग को मान लेना चाहिए। 32 दिन से लगातार धरना प्रदर्शन जारी है इससे गांव के काम प्रभावित हो रहे हैं । -पवन कुमार सरपंच भदाना।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल व पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली को सरपंचों की बात की मांग को मान लेना चाहिए। ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल का विरोध सरपंच कर रहे हैं। उनकी बातों को मान लेनी चाहिए।- विजयलता, महिला सरपंच गांव मातनहेल।
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सरपंचों ने कहा कि अभी तक सरकार को कोई नुमाइंदा उनके पास नहीं पहुंचा। वे उपायुक्त, सांसद अरविंद शर्मा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ और केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को ज्ञापन सौंप चुके हैं लेकिन उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया। जिला सरपंच एसोसिएशन के अध्यक्ष सोनू और उपाध्यक्ष बलवान हसनपुर ने कहा कि आगामी 2024 के चुनाव में सरपंच वोट से जवाब देंगे। सरकार उन्हें राइट टू रिकॉल और ई-टेंडरिंग में फंसा रही है जिससे गांव का विकास रुका हुआ है। धरने में महिला सरपंचों की भी भागीदारी है। इस दौरान आनन्द, रविद्र कुमार, गोविंद पाटोदा, सोमबीर, दारा, सतनारायण, अनिल जौंधी, राव विरेद्र, सरोज देवी,अनीता, अशुंया पंच, कृष्णा आदि मौजूद रहे।
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सरपंचों की प्रतिक्रियाएं
लघु सचिवालय में 32 दिन से धरना प्रदर्शन जारी है। इससे गांव का कार्य बाधित हो रहे हैं। पंचायत मंत्री को सरपंचों की बात माननी चाहिए और धरने को खत्म करवाने में सहयोग करना चाहिए गांव के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। - बेबी सरपंच हुमायूंपुर
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पहले बीडीपीओ कार्यालय और अब लघु सचिवालय में धरना प्रदर्शन जारी है। जब तक ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल को खत्म नहीं किया जाता है। सरकार के मंत्री व विधायकों को भी राइट टू रिकॉल के दायरे में लाया जाए।- बलवान सिंह सरपंच गांव हसनपुर ।
सरपंचों की मांग बिल्कुल जायज है। सरकार को सरपंचों की मांग को मान लेना चाहिए। 32 दिन से लगातार धरना प्रदर्शन जारी है इससे गांव के काम प्रभावित हो रहे हैं । -पवन कुमार सरपंच भदाना।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल व पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली को सरपंचों की बात की मांग को मान लेना चाहिए। ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल का विरोध सरपंच कर रहे हैं। उनकी बातों को मान लेनी चाहिए।- विजयलता, महिला सरपंच गांव मातनहेल।