CWG 2022: झज्जर के सागर अहलावत ने मुक्केबाजी में जीता रजत, पहले ही अंतरराष्ट्रीय इवेंट में लहराया परचम
सागर ने अभी तक कोई अंतरराष्ट्रीय गेम नहीं खेला था। अब मुक्केबाजी में उन्होंने परचम लहराया है। सागर के प्रदर्शन की बदौलत उनका चयन इंग्लैंड के बर्मिंघम आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों में हुआ था।
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बर्मिंघम में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में हरियाणा के झज्जर के गांव धांधलान निवासी सागर अहलावत के रजत पदक जीता है। सागर की जीत के लिए उनकी मां ने तो अखंड जोत जलाई। घर व गांव में सागर के रजत पदक जीतने पर खुशी का माहौल है। गांव धांधलान के ग्रामीणों में खुशी की लहर है।
परिवार ही नहीं बल्कि गांव के लोगों ने भी रात करीब 1.15 बजे होने वाले सागर के मुकाबले को देखने के लिए जागने का फैसला किया। जो बेटे के मुकाबले के यादगार पलों के गवाह भी बने। हालांकि बॉक्सिंग में सुपर हेवीवेट कैटेगरी यानी 92 किलोग्राम भारवर्ग में सागर अहलावत को रजत से संतोष करना पड़ा। उन्हें फाइनल में इंग्लैंड के डेलिशियस ओरी ने 5-0 से हरा दिया। इस तरह बॉक्सिंग का समापन हो चुका है।
सागर अहलावत ने अपनी पहली ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में रजत पदक जीता है। अब पहली बार में ही चार साल की कठोर मेहनत के बाद मुक्केबाजी में परचम लहरा रहा है। सागर अहलावत ने 4 अगस्त को अपना क्वार्टर फाइनल मैच 5-0 से जीता था और अब 6 अगस्त को सेमीफाइनल भी उसने उसी अंदाज में 5-0 से जीत कर देश के लिए रजत पदक पक्का किया। अब सागर की नजर आने वाली प्रतियोगिताओं में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने की रहेगी। सागर अहलावत की मां मुकेश देवी ने सागर की जीत को लेकर दादा दूधाधारी की अखंड ज्योत जलाई।
कोरोना काल में भी अभ्यास नहीं छोड़ा
कोरोना काल के दौरान जब कैंप बंद हुए तो कोच हितेश देशवाल ने सागर को अकेले भी प्रेक्टिस कराई। कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रायल में सागर ने शानदार प्रदर्शन किया और उसने पहले ट्रायल में ओलंपिक 2020 प्रतिभागी सतीश कुमार को हराया, फिर फाइनल में नरेंद्र को मात दी। सागर के प्रदर्शन की बदौलत उसका चयन 28 जुलाई से 8 अगस्त तक इंग्लैंड के बर्मिंघम आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में हो गया।
परिजनों को भरोसा देश का मान बढ़ाएगा उनका बेटा
सागर के पिता राजेश अहलावत एक किसान हैं और गांव में जमीन लेकर खेती करते हैं। उन्होंने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए काफी संघर्ष किया है। उसकी माता मुकेश गृहिणी है और उसकी एक बहन है।
सागर के कोच हितेश देशवाल ने बताया कि सागर की फिटनेस और लंबाई अच्छी है। इसे देखते हुए उन्होंने 4 साल पहले मुक्केबाज सीखने के लिए कहा था। सागर ने उनकी बात मानीं और मुक्केबाजी सीखनी शुरू कर दी। उस वक्त उसकी उम्र 18 साल थी। सागर के पंच काफी मजबूत थे। लंबाई का वह फायदा उठाता था।
उन्हें लगने लगा था कि मुक्केबाजी में सागर एक दिन बुलंदियों तक पहुंचेगा। उसने पूरी मेहनत की। कम समय में सागर ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और चंडीगढ़ चैंपियन बना। उसके बाद लगातार दो बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन बना और दो बार खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन बना। इसके साथ ही राष्ट्रीय मुक्केबाजी में पदक जीता। इसके बाद उसका देश की टीम के लिए चले कैंप में चयन हो गया।