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आरक्षण आंदोलन में सांपला धरने को लेकर आंदोलनकारियों को मिली राहत
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शुक्रवार को पत्रकारों से बीतचीत करते रमेश दलाल व अन्य। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
वर्ष 2016 में सांपला में नेशनल हाईवे जाम करने के आरोप में जाट आरक्षण आंदोलनकारियों पर चल रहे मुकदमों के संबंध में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने गांव जाखोदा के मूल निवासी रमेश दलाल के पक्ष में आदेश दिए हैं। यह जानकारी खुद रमेश दलाल ने शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने इन आदेशों को निर्दोष समाज की जीत बताया।
गत मंगलवार पांच अप्रैल को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर द्वारा पारित आदेश को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। न्यायाधीश ठाकुर ने रमेश दलाल की याचिका को स्वीकार करते हुए इस मामले से संबंधित सभी निचली अदालतों के आदेशों को रद्द कर दिया। रमेश दलाल बनाम राज्य सरकार के इस केस में रमेश दलाल की ओर से पैरवी वरिष्ठ वकील बलतेज सिंह सिद्धू और उनके सहयोगियों ने की। पैरवी करने वालों में स्वयं रमेश दलाल भी शामिल थे।
रमेश दलाल ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि निचली अदालतों में केस चला तो उपरोक्त आंदोलनकारियों ने तर्क दिया कि उन्होंने केवल नौकरियों में आरक्षण के लिए पंचायत द्वारा दिए गए धरने में भाग लिया था और किसी तरह की हिंसा नहीं की। पूरा समय तक शांतिपूर्वक धरना चला। इसलिए पुलिस द्वारा लगाई गई धाराओं के तहत उन पर मुकदमा नहीं बनता। रमेश दलाल ने कहा कि मुकदमे झेल रहे आंदोलनकारियों की ओर से हाईकोर्ट के इन आदेशों को एक नजीर के तौर पर लिया जा सकता है। प्रेसवार्ता के मौके पर रमेश दलाल के साथ पप्पू दलाल, कैप्टन मान सिंह, बुल्लड़ पहलवान और आनंद दलाल भी मौजूद थे।
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यह था मामला
जाट आरक्षण आंदोलन की शुरुआत फरवरी 2016 में सांपला में दिल्ली-रोहतक मार्ग पर जाम लगाकर की गई थी। पुलिस ने इस संदर्भ में 4 और 15 फरवरी को सांपला थाने में रमेश दलाल, पप्पू दलाल, संजय दलाल, कैप्टन मान सिंह, बुल्लड़ पहलवान, चिंटू प्रधान, अनिल प्रधान और मनोज दुहन आदि के विरुद्ध दंगे और राष्ट्रीय राजमार्ग को बलपूर्वक जाम करने आदि आरोपों में केस दर्ज करके कार्रवाई की थी।
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गत मंगलवार पांच अप्रैल को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर द्वारा पारित आदेश को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। न्यायाधीश ठाकुर ने रमेश दलाल की याचिका को स्वीकार करते हुए इस मामले से संबंधित सभी निचली अदालतों के आदेशों को रद्द कर दिया। रमेश दलाल बनाम राज्य सरकार के इस केस में रमेश दलाल की ओर से पैरवी वरिष्ठ वकील बलतेज सिंह सिद्धू और उनके सहयोगियों ने की। पैरवी करने वालों में स्वयं रमेश दलाल भी शामिल थे।
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रमेश दलाल ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि निचली अदालतों में केस चला तो उपरोक्त आंदोलनकारियों ने तर्क दिया कि उन्होंने केवल नौकरियों में आरक्षण के लिए पंचायत द्वारा दिए गए धरने में भाग लिया था और किसी तरह की हिंसा नहीं की। पूरा समय तक शांतिपूर्वक धरना चला। इसलिए पुलिस द्वारा लगाई गई धाराओं के तहत उन पर मुकदमा नहीं बनता। रमेश दलाल ने कहा कि मुकदमे झेल रहे आंदोलनकारियों की ओर से हाईकोर्ट के इन आदेशों को एक नजीर के तौर पर लिया जा सकता है। प्रेसवार्ता के मौके पर रमेश दलाल के साथ पप्पू दलाल, कैप्टन मान सिंह, बुल्लड़ पहलवान और आनंद दलाल भी मौजूद थे।
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यह था मामला
जाट आरक्षण आंदोलन की शुरुआत फरवरी 2016 में सांपला में दिल्ली-रोहतक मार्ग पर जाम लगाकर की गई थी। पुलिस ने इस संदर्भ में 4 और 15 फरवरी को सांपला थाने में रमेश दलाल, पप्पू दलाल, संजय दलाल, कैप्टन मान सिंह, बुल्लड़ पहलवान, चिंटू प्रधान, अनिल प्रधान और मनोज दुहन आदि के विरुद्ध दंगे और राष्ट्रीय राजमार्ग को बलपूर्वक जाम करने आदि आरोपों में केस दर्ज करके कार्रवाई की थी।