फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Play and Win taxes hungry and thirsty and name Roshan

भूखे-प्यासे खेलो और जीतो और नाम करों रोशन

Sat, 20 Sep 2014 12:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़ Updated Sat, 20 Sep 2014 12:49 AM IST
विज्ञापन
Play and Win taxes hungry and thirsty and name Roshan

प्रदेश का नाम भले ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेलों में सर्वोपरि रहता हो, लेकिन प्राथमिक स्तर पर बाल खिलाड़ी भूखे-प्यासे ही दिन भर खेलने में लगे रहते हैं।

विज्ञापन


फिलहाल विभाग की ओर से इन बाल खिलाड़ियों के लिए किसी प्रकार के खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं की जाती है।

लिहाजा खंड स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता में यदि स्कूल शिक्षकों को दया करके खिलाड़ियों को कुछ रिफ्रेशमेंट दे दिया तो ठीक, वरना तो भूखे आओ, खेलो और जीतों-हारो और वापिस जाओ ही हाथ रहता है।
विज्ञापन


धूप में कड़ी मेहनत और अपने स्कूल की टीम को जिताने के बाद खाने का दो केले भी नसीब नहीं हो तो इसे आप खेलों की बदहाल व्यवस्था ही कहेंगे।

खिलाड़ियों  को पीने के पानी की दिक्कत तथा रिफ्रेशमेंट व पुरस्कार का कोई जिक्र नहीं। कुछ ऐसी ही व्यवस्था है प्राथमिक स्कूलों की खंड स्तरीय प्रतियोगिताओं की।
विज्ञापन
विज्ञापन


राजकीय प्राथमिक पाठशालाओं के अलावा निजी पाठशालाओं के विद्यार्थी भी इस खंड स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। झज्जर जिले में इन दिनों विभिन्न खंडों में खेल प्रतियोगिताएं हो रही हैं।

झज्जर की प्रतियोगिताएं आज संपन्न हो गई तो बेरी में आरंभ हो गई है। मगर इन खिलाड़ियों को स्कूल के शिक्षक अपने स्तर पर ही कुछ खिलाएं तो बेशक, मगर विभाग की ओर से कोई व्यवस्था नहीं होती है।

खेल नीति के दम पर मेडल जीतकर हरियाणा का नाम रोशन करने के लिए सरकार दम भरती रही है। इतना ही नहीं, प्रदेश की खेल नीति श्रेष्ठ होने का दावा करती रही है।

मगर प्राथमिक स्कूलों की खेल प्रतियोगिता के लिए सरकार के पास कोई बजट नहीं है। ऐसे में खेल नीति पर तो सवाल उठते हैं, साथ ही खिलाने के लिए मुख्यालय पर बच्चों को लाने की व्यवस्था, बच्चों के लिए रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था तथा अन्य संसाधन या तो स्कूलों के शिक्षकों के अपने स्तर पर करने पड़ते हैं या फिर विद्यार्थियों को।


झज्जर के बाग जहांआरा स्टेडियम में चले दो दिवसीय खंड स्तरीय मुकाबलों में करीब 35 स्कूलों के खिलाड़ियों ने भाग लिया।

यहां आए खिलाड़ियों में से अरुण व साक्षी का कहना था कि यहां फर्स्टएड तक की सुविधा नहीं थी। पीने के पानी और शौचालय तक की अच्छी व्यवस्था नहीं होने से परेशानी होना स्वाभाविक है।

पायल का कहना था कि  खाने की व्यवस्था नहीं है। स्कूल के शिक्षकों ने अपने स्तर पर फल आदि खिलाएं है। इसी तरह रितिका व साहिल भी इस व्यवस्था संतुष्ट नहीं थे।


इधर इस बारे में जब डीईईओ वेदपाल दौलता व खंड शिक्षा अधिकारी ओमप्रकाश जाखड़ से बात की गई तो उन्होंने माना कि इन खेलों के लिए कोई ग्रांट नहीं आती।

जबकि जिला स्तरीय खेलों में पुरस्कार व रिफ्रे शमेंट दी जाती है। जबकि खिलाड़ियों को जिला स्तर पर किट भी दी जाती है।

इन खेलों में व्यवस्था के बारे में इनका कहना कि खिलाड़ियों के लिए पानी की समुचित व्यवस्था थी। जबकि स्कूल शिक्षकों ने अपने स्तर पर बच्चों को पूरा ध्यान रखा और उन्हें रिफ्रेशमेंट भी दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed