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Paris Olympics: अमन के दादा बोले- पेरिस म्ह पोते नै गाड दया लठ, पहलवान ने माता-पिता को दी सच्ची श्रद्धांजलि

Sat, 10 Aug 2024 09:19 AM IST
नवीन दलाल नरेश दहिया, साल्हावास (झज्जर)
नरेश दहिया, साल्हावास (झज्जर) Published by: नवीन दलाल Updated Sat, 10 Aug 2024 09:19 AM IST
सार

अमन सहरावत के कांस्य पदक जीतने के बाद परिजनों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। हरियाणवी संगीत पर दादा-दादी परिजनों के साथ थिरकते नजर आए। आसपास के गांवों के लोग भी इस खुशी में शामिल दिखाई दिए।

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Paris Olympics 2024 Aman grandfather said- I buried my grandson in Paris
पहलवान अमन - फोटो : संवाद

विस्तार

पेरिस ओलंपिक में शुक्रवार को बिरोहड़ गांव के लाडले पहलवान अमन सहरावत ने प्यूर्टो रिको के पहलवान डेरियन क्रूज को 13-5 से हराकर सबका दिल जीत लिया है। उनके कांस्य पदक जीतने पर परिजन खुशी से झूम उठे। अमन के दादा मांगेराम ने कहा- पेरिस म्ह अमन नै गाड दया लठ। दादा ने पोते की जीत की खुशी पर भावुक होते हुए कहा, परिवार में पहले भी बहुत से पहलवान हुए हैं, लेकिन अमन ने जितना नाम कमाया है, उतना किसी ने नहीं। उन्होंने कहा कि अमन ने कांस्य पदक जीतकर अपने माता-पिता को एक सच्ची श्रद्धांजलि दी है और उनके सपनों को साकार किया है। शुक्रवार रात को ही बिरोहड़ गांव में अमन के घर पर परिजनों को बधाई देने वालों का तांता लग गया।

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सोशल मीडिया पर भी अमन सहरावत के कांस्य पदक जीतने की पोस्ट जमकर वायरल होती दिखाई दी। अमन सहरावत का मैच शुरू होने से पहले ही ग्रामीण खेतों की एक छोटी सी ढाणी में बने उनके पैतृक घर में इकट्ठे हो गए। वहीं पर एक बड़ी स्क्रीन लगाकर ग्रामीण में एक साथ मैच का लुत्फ उठाया। अमन के एक-एक पॉइंट हासिल करने पर परिजन ग्रामीणों के साथ जमकर तालियां बजा रहे थे।
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जश्न में डूबा गांव, दादी बोलीं- अमन में दिखती है बेटे की छवि
अमन सहरावत के कांस्य पदक जीतने के बाद परिजनों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। हरियाणवी संगीत पर दादा-दादी परिजनों के साथ थिरकते नजर आए। आसपास के गांवों के लोग भी इस खुशी में शामिल दिखाई दिए। वहीं दादी अणची ने बताया कि 12 साल पहले अमन सहरावत की मां कमलेश की हार्ट अटैक से व पिता की पत्नी के सदमे से मौत हो गई थी। उसके बाद सभी परिजनों ने मिलकर अमन की परवरिश की है। अमन में आज भी उसे अपने बेटे की छवि दिखाई देती है। उसके घर लौटने पर वह उन्हें खीर, चूरमा व हलवा बनाकर अपने हाथों से खिलाएंगी, जो उसे बहुत पसंद है।

छोटी सी उम्र में रच दिया इतिहास : साक्षी मलिक

अमन के ताऊ सुधीर ने बताया कि छोटी सी उम्र में ही अमन ने बड़ा नाम कमाया है। वह भारत कुमार के अलावा विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भी विजेता रह चुके हैं। छोटी सी उम्र में ही कुश्ती की शुरुआत की थी। अमन के चचेरे भाई राकेश सहरावत ने बताया कि आज अमन ने कांस्य पदक जीतकर परिजनों के सपनों को साकार कर दिया है। आज गांव बिरोहड़ गांव को देश में नई पहचान मिली है। यह इतिहास स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया।

2008 ओलंपिक से अब तक कभी खाली हाथ नहीं आए पहलवान : साक्षी मलिक

ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक का कहना है कि भारतीय पहलवान 2008 से अब तक रेसलिंग में कभी बिना मेडल नहीं आए। अमन सहरावत ने उसी परंपरा को कायम रखा है। अमन को कांस्य पदक जीतने पर बहुत-बहुत बधाई। साक्षी मलिक ने सोशल मीडिया पर मैच में जीत के बाद यह प्रक्रिया व्यक्त की।

ओलंपिक में 2008 से शुरू हुआ हरियाणा के पहलवानों के जीतने का सिलसिला

कुश्ती में पदक जीतने की शुरुआत 2008 के बीजिंग ओलंपिक से हुई थी। इसमें सुशील कुमार ने कुश्ती में पदक दिलाया था। अमन वीरवार को सेमीफाइनल में जापान के शीर्ष वरीय रेई हिगुची से पराजित हो गए थे, लेकिन हिगुची के फाइनल में पहुंचने से अमन को रेपचेज में मौका मिला था, जिसमें उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और एक बार बढ़त लेने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।

ओलंपिक कुश्ती में भारत के पदक

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