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दिल्ली व राजस्थान भेज रहे पराली, जलाते नहीं कर रहे प्रबंधन
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खेत में काट कर रखा गया धान।
- फोटो : Jhjhar
धान की पराली अब किसानों के लिए मुसीबत नहीं फायदे का सौदा बन रही है। किसान अब पराली को जलाने की बजाए उसके प्रबंधन में जुटे हुए हैं और किसानों की ओर से पराली को बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। काफी संख्या में क्षेत्र के लोग पराली को एकत्रित कर उसे दिल्ली व राजस्थान भेजने का कार्य कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। इस पराली का फैक्टरियों में प्रयोग के अलावा गत्ता बनाने व पशु चारे के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।
पराली विक्रेता बिजेंद्र सिलानी ने बताया कि किसानों के खतों से ही प्रति एकड़ तीन से साढ़े तीन हजार रुपये में पराली को खरीदकर राजस्थान के जयपुर, चोमू मंडी में बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि बाबरा गांव के कई पराली के व्यापारी हैं जोकि स्वयं जयपुर व चोमू मंडी में जाकर पराली को बेचने का व्यापार कर रहे हैं।
पहले जलाते थे पराली
पराली को पहले खेतों में ही जला दिया जाता था। जिसके कारण वायु प्रदूषण के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम हो जाती थी और किसानों के मित्र पक्षी व कीट भी जलकर मर जाते थे। पर्यावरण को बहुत ही ज्यादा हानि होती थी। प्रदूषण का स्तर इस कदर बढ़ जाता था कि धुएं के गुबार आकाश में काफी समय तक देखे जा सकते थे। जिसके कारण अस्थमा व अन्य रोगियों का ज्यादा परेशानी होती थी।
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कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि एक टन पराली से तीन टन के करीब कार्बन, पचास किलो कार्बन डाई आक्साइड गैस का उत्सर्जन होता है जोकि मानव, जीव जंतुओं के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। कृषि विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर पराली प्रबंधन को लेकर जागरूकता शिविर लगाए गए हैं। किसानों को पराली जलाने के घातक नुकसानों से अवगत करवाया गया है जिसका असर किसानों में देखने को आया है और किसानों को पराली प्रबंधन की जानकारी भी जागरूकता शिविर लगाकर दी गई है। जिसके चलते किसानों ने पराली प्रबंधन करना शुरू कर दिया है।
पराली प्रबंधन करने के बाद किसान धान की पराली के साथ-साथ बाजरे की पूलियां की भी खरीद कर रहे हैं और काटकर पशुओं के चारे में प्रयोग कर रहे हैं। पराली को किसानों की ओर से जयपुर व चोमू मंडी, दिल्ली की चारा मंडी में सप्लाई किया जा रहा है।
किसानों को दिया जा रहा अनुदान
कृषि विभाग के अधिकारी राजीव चावला ने बताया कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए नौ तरह की अलग-अलग मशीनों के लिए अनुदान दिया जा रहा है। पराली प्रबंधन की मशीन खरीदने के लिए किसानों को पचास से सत्तर प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
पहले की अपेक्षा जिले में पराली को जलाने की घटनाएं संज्ञान में नहीं आई रही है। किसानों की ओर से पराली प्रबंधन किया जा रहा है जोकि काफी सराहनीय कदम है। यदि पराली को जलाने का कोई मामला आया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - इंद्र सिंह, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, झज्जर।
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पराली विक्रेता बिजेंद्र सिलानी ने बताया कि किसानों के खतों से ही प्रति एकड़ तीन से साढ़े तीन हजार रुपये में पराली को खरीदकर राजस्थान के जयपुर, चोमू मंडी में बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि बाबरा गांव के कई पराली के व्यापारी हैं जोकि स्वयं जयपुर व चोमू मंडी में जाकर पराली को बेचने का व्यापार कर रहे हैं।
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पहले जलाते थे पराली
पराली को पहले खेतों में ही जला दिया जाता था। जिसके कारण वायु प्रदूषण के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम हो जाती थी और किसानों के मित्र पक्षी व कीट भी जलकर मर जाते थे। पर्यावरण को बहुत ही ज्यादा हानि होती थी। प्रदूषण का स्तर इस कदर बढ़ जाता था कि धुएं के गुबार आकाश में काफी समय तक देखे जा सकते थे। जिसके कारण अस्थमा व अन्य रोगियों का ज्यादा परेशानी होती थी।
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कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि एक टन पराली से तीन टन के करीब कार्बन, पचास किलो कार्बन डाई आक्साइड गैस का उत्सर्जन होता है जोकि मानव, जीव जंतुओं के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। कृषि विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर पराली प्रबंधन को लेकर जागरूकता शिविर लगाए गए हैं। किसानों को पराली जलाने के घातक नुकसानों से अवगत करवाया गया है जिसका असर किसानों में देखने को आया है और किसानों को पराली प्रबंधन की जानकारी भी जागरूकता शिविर लगाकर दी गई है। जिसके चलते किसानों ने पराली प्रबंधन करना शुरू कर दिया है।
पराली प्रबंधन करने के बाद किसान धान की पराली के साथ-साथ बाजरे की पूलियां की भी खरीद कर रहे हैं और काटकर पशुओं के चारे में प्रयोग कर रहे हैं। पराली को किसानों की ओर से जयपुर व चोमू मंडी, दिल्ली की चारा मंडी में सप्लाई किया जा रहा है।
किसानों को दिया जा रहा अनुदान
कृषि विभाग के अधिकारी राजीव चावला ने बताया कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए नौ तरह की अलग-अलग मशीनों के लिए अनुदान दिया जा रहा है। पराली प्रबंधन की मशीन खरीदने के लिए किसानों को पचास से सत्तर प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
पहले की अपेक्षा जिले में पराली को जलाने की घटनाएं संज्ञान में नहीं आई रही है। किसानों की ओर से पराली प्रबंधन किया जा रहा है जोकि काफी सराहनीय कदम है। यदि पराली को जलाने का कोई मामला आया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - इंद्र सिंह, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, झज्जर।