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Jhajjar-Bahadurgarh News: वर्षामापी संयंत्र के जरिए पंचायतों को किया जाएगा पेयजल के प्रति जागरूक
Sun, 04 May 2025 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 04 May 2025 01:19 AM IST
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झज्जर। प्रदेश की ग्राम पंचायतों को पेयजल के प्रयोग को लेकर जागरूक करने का काम किया जाएगा। इसके लिए हर ग्राम पंचायत में वर्षामापी संयंत्रों को लगाया जाएगा। इन संयंत्रों को लगाने का मुख्य उद्देश्य संबंधित ग्राम पंचायत की तरफ से प्रयोग किए जा रहे पेयजल और वर्षा के रूप में गांव में एकत्रित होने वाले पेयजल को लेकर जागरूक करना है।
इन यंत्रों से ग्रामीणों को बताया जाएगा कि वह प्रतिदिन, प्रति माह या वर्ष में कितना पानी प्रयोग करते हैं और वर्षा का कितना पानी मिल पाता है। पेयजल का अत्यधिक दोहन किस प्रकार हो रहा है। इसके लिए भारत सरकार की तरफ से सभी ग्राम पंचायतों में यह वर्षामापी संयंत्र लगाने के निर्देश दिए गए हैं। यह काम पंचायती राज विभाग, कृषि विभाग और आईएमडी के संयुक्त सहयोग से किया जाएगा। इसके लिए गत चार अप्रैल को भारत सरकार के मंत्रालयों की जल जीवन मिशन को लेकर आयोजित की गई बैठक में इसे लेकर दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि राज्य, संघ राज्य मानसून ऋतु के शुरू होने से पहले पंचायत स्तर पर वर्षामापी यंत्र लगाने के लिए कृषि विभाग, पंचायती राज विभाग और स्थानीय आईएमडी के साथ समन्वय करेंगे। ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति को इन वर्षामापी यंत्रों के कार्य से जोड़ा जाएगा ताकि आम जनता तक इसकी जानकारी व प्रचार हो सके। इससे ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों के उचित उपयोग के बारे में जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।
फसलों को दिए जाने वाले पानी के बारे में पता लग सकेगा
कई बार बारिश हो जाती है और उस समय कितनी बारिश होती है, उसकी जानकारी किसानों को नहीं होती। कई बार बारिश के बाद भी ज्यादा सिंचाई हो जाती है। ऐसे में ग्राम स्तर पर वर्षामापी संयंत्र लगने के बाद यह पता लग जाएगा कि कितनी बारिश हुई है। बारिश के बाद फसल को कितना पानी चाहिए, यह पता लग सकेगा।
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जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के जल एवं स्वच्छता सहायता संगठन के राज्य सलाहकार लक्ष्मीकांत भाटिया ने बताया कि कृषि विभाग की तरफ से पंचायत स्तर पर वर्षामापी संयंत्र लगाए जाएंगे। संयंत्र लगने के बाद विभाग की तरफ से ग्राम पंचायतों को पेयजल को लेकर जागरूक करने का काम किया जाएगा। उनको बताया जाएगा कि आप कितना पानी इस्तेमाल करते हो और वर्षा से कितना पानी मिल पाता है। इसके अलावा ग्राम स्तर पर कितना बारिश हुई है, उसकी जानकारी भी ग्रामीणों को मिल पाएगी। इससे बारिश के बाद फसलों में कितना पानी दिया जाएगा, उसका पता लग सकेगा।
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इन यंत्रों से ग्रामीणों को बताया जाएगा कि वह प्रतिदिन, प्रति माह या वर्ष में कितना पानी प्रयोग करते हैं और वर्षा का कितना पानी मिल पाता है। पेयजल का अत्यधिक दोहन किस प्रकार हो रहा है। इसके लिए भारत सरकार की तरफ से सभी ग्राम पंचायतों में यह वर्षामापी संयंत्र लगाने के निर्देश दिए गए हैं। यह काम पंचायती राज विभाग, कृषि विभाग और आईएमडी के संयुक्त सहयोग से किया जाएगा। इसके लिए गत चार अप्रैल को भारत सरकार के मंत्रालयों की जल जीवन मिशन को लेकर आयोजित की गई बैठक में इसे लेकर दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि राज्य, संघ राज्य मानसून ऋतु के शुरू होने से पहले पंचायत स्तर पर वर्षामापी यंत्र लगाने के लिए कृषि विभाग, पंचायती राज विभाग और स्थानीय आईएमडी के साथ समन्वय करेंगे। ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति को इन वर्षामापी यंत्रों के कार्य से जोड़ा जाएगा ताकि आम जनता तक इसकी जानकारी व प्रचार हो सके। इससे ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों के उचित उपयोग के बारे में जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।
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फसलों को दिए जाने वाले पानी के बारे में पता लग सकेगा
कई बार बारिश हो जाती है और उस समय कितनी बारिश होती है, उसकी जानकारी किसानों को नहीं होती। कई बार बारिश के बाद भी ज्यादा सिंचाई हो जाती है। ऐसे में ग्राम स्तर पर वर्षामापी संयंत्र लगने के बाद यह पता लग जाएगा कि कितनी बारिश हुई है। बारिश के बाद फसल को कितना पानी चाहिए, यह पता लग सकेगा।
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जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के जल एवं स्वच्छता सहायता संगठन के राज्य सलाहकार लक्ष्मीकांत भाटिया ने बताया कि कृषि विभाग की तरफ से पंचायत स्तर पर वर्षामापी संयंत्र लगाए जाएंगे। संयंत्र लगने के बाद विभाग की तरफ से ग्राम पंचायतों को पेयजल को लेकर जागरूक करने का काम किया जाएगा। उनको बताया जाएगा कि आप कितना पानी इस्तेमाल करते हो और वर्षा से कितना पानी मिल पाता है। इसके अलावा ग्राम स्तर पर कितना बारिश हुई है, उसकी जानकारी भी ग्रामीणों को मिल पाएगी। इससे बारिश के बाद फसलों में कितना पानी दिया जाएगा, उसका पता लग सकेगा।