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प्रशासन के आदेशों के बाद भी शहर के अंदर घुस रहे ओवरलोड वाहन
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झज्जर। शहर की मुख्य सड़कों पर रात-दिन ओवरलोड वाहन फर्राटा भर रहे हैं। इसके कारण शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर जाम की स्थिति हो जाती है। पिछले दिनों उपायुक्त ने भी आदेश जारी कर ओवरलोड वाहनों को शहर में घुसने की मनाही कर रखी है, लेकिन आदेशों व नियमों की अनदेखी की जा रही है।
जिले में ओवरलोड वाहन न केवल सड़कों को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं बल्कि लोगों के जीवन के लिए भी खतरा बने हैं। सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ भी बढ़ रहा है साथ ही शहर की सड़कें भी जर्जर हालत हो गई है। खास बात यह है कि प्रशासन की ओर से प्रत्येक माह होने वाली रोड सेफ्टी की बैठक में ओवरलोड वाहनों पर शिकंजा कसने के निर्देश दिए जाते हैं और कार्रवाई के नाम पर जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है। वहीं रोड सेफ्टी बैठक में ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की समीक्षा भी होती है। जिला पुलिस की ओर से हर माह नाइट डोमिनेशन अभियान भी चलाया जाता है। इसके बावजूद इस सब कार्रवाई का उन पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं पड़ता है।
झज्जर बादली, झज्जर-छुछकवास, झज्जर- गुढ़ा, झज्जर-गुरुग्राम, झज्जर-कोसली, झज्जर-सांपला, झज्जर-बहादुरगढ़ के अलावा अन्य सड़क मार्गों पर ओवरलोड वाहन धडल्ले से बेरोकटोक चल रहे हैं। इसके बावजूद ओवरलोड वाहन बड़ी आसानी से शहर से हाईवे नबंर 71 तक पहुंच रहे हैं। जिला प्रशासन ने रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक भारी वाहनों को शहर से निकलने का समय निर्धारित कर रखा है। वहीं शाम ढलते ही ओवरलोड वाहन अपने गंतव्य की ओर बढ़ना शुरू हो जाते हैं। ओवरलोडिंग के कारण इन वाहनों के टायर भी नजर नहीं आते हैं और ऊंचाई भी दोगुनी से अधिक होती है। जो शहर में बिजली की तारों को छूकर निकलते हैं। कई बार इसके चपेट में आने से तार टूट भी जाते हैं।
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इंसेट
बिना नंबर के चलते हैं काफी ओवरलोड वाहन
अधिकतर ओवरलोड वाहनों पर रिफ्लेक्टर नहीं लगे होते हैं। इससे रात के समय यह नजर नहीं आते हैं। कई वाहनों तो बगैर नंबर के ही चल रहे हैं। रात को इन वाहनों के चालक हेडलाइट बंद करके चलते हैं। सामने से वाहन आता तो अचानक डिपर देते हैं, जिससे अचानक आंखों में लाइट पड़ने से चालक असमंजस में पड़ जाता है और दुर्घटनाएं होती हैं।
वर्जन
यातायात नियमों की अवहेलना करने वाले वाहन चालकों के चालान काटे जा रहे हैं। ओवरलोड वाहन शहर में प्रवेश न कर सकें इसके लिए शहर में अंदर आने वाली सड़कों पर बैरिकेडस लगाए गए हैं। पुलिस व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुस्तैद है।- दिलावर सिंह, यातायात पुलिस प्रभारी, शहर झज्जर।
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जिले में ओवरलोड वाहन न केवल सड़कों को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं बल्कि लोगों के जीवन के लिए भी खतरा बने हैं। सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ भी बढ़ रहा है साथ ही शहर की सड़कें भी जर्जर हालत हो गई है। खास बात यह है कि प्रशासन की ओर से प्रत्येक माह होने वाली रोड सेफ्टी की बैठक में ओवरलोड वाहनों पर शिकंजा कसने के निर्देश दिए जाते हैं और कार्रवाई के नाम पर जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है। वहीं रोड सेफ्टी बैठक में ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की समीक्षा भी होती है। जिला पुलिस की ओर से हर माह नाइट डोमिनेशन अभियान भी चलाया जाता है। इसके बावजूद इस सब कार्रवाई का उन पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं पड़ता है।
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झज्जर बादली, झज्जर-छुछकवास, झज्जर- गुढ़ा, झज्जर-गुरुग्राम, झज्जर-कोसली, झज्जर-सांपला, झज्जर-बहादुरगढ़ के अलावा अन्य सड़क मार्गों पर ओवरलोड वाहन धडल्ले से बेरोकटोक चल रहे हैं। इसके बावजूद ओवरलोड वाहन बड़ी आसानी से शहर से हाईवे नबंर 71 तक पहुंच रहे हैं। जिला प्रशासन ने रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक भारी वाहनों को शहर से निकलने का समय निर्धारित कर रखा है। वहीं शाम ढलते ही ओवरलोड वाहन अपने गंतव्य की ओर बढ़ना शुरू हो जाते हैं। ओवरलोडिंग के कारण इन वाहनों के टायर भी नजर नहीं आते हैं और ऊंचाई भी दोगुनी से अधिक होती है। जो शहर में बिजली की तारों को छूकर निकलते हैं। कई बार इसके चपेट में आने से तार टूट भी जाते हैं।
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बिना नंबर के चलते हैं काफी ओवरलोड वाहन
अधिकतर ओवरलोड वाहनों पर रिफ्लेक्टर नहीं लगे होते हैं। इससे रात के समय यह नजर नहीं आते हैं। कई वाहनों तो बगैर नंबर के ही चल रहे हैं। रात को इन वाहनों के चालक हेडलाइट बंद करके चलते हैं। सामने से वाहन आता तो अचानक डिपर देते हैं, जिससे अचानक आंखों में लाइट पड़ने से चालक असमंजस में पड़ जाता है और दुर्घटनाएं होती हैं।
वर्जन
यातायात नियमों की अवहेलना करने वाले वाहन चालकों के चालान काटे जा रहे हैं। ओवरलोड वाहन शहर में प्रवेश न कर सकें इसके लिए शहर में अंदर आने वाली सड़कों पर बैरिकेडस लगाए गए हैं। पुलिस व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुस्तैद है।- दिलावर सिंह, यातायात पुलिस प्रभारी, शहर झज्जर।