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संडे को बैंक बंद, एटीएम कैशलेस, लोग परेशान

Mon, 05 Dec 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बहादुरगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, बहादुरगढ़ Updated Mon, 05 Dec 2016 01:02 AM IST
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New currency, cash not found in  ATM, Jhajjar-Bahadurgarh
बहादुरगढ़ - फोटो : bureau

रविवार को अवकाश के कारण बैंक तो बंद रहे ही, कई एटीएम बूथों के शटर भी बंद रहे। कुछेक को छोड़ दें तो खुले हुए अधिकांश एटीएम बूथों में कैश नहीं था। रुपये निकालने को लेकर लोग दिनभर भटकते रहे।

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शहर में विभिन्न बैंकों के 50 से अधिक एटीएम हैं। नोटबंदी के बाद इनमें से अधिकांश एटीएम केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। रविवार को भी एटीएम के यही हालात बने रहे। बैंक तो बंद थे ही, कई एटीएम बूथ भी बंद पड़े थे।
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शहर में सबसे अधिक एटीएम बूथ रेलवे रोड, रोहतक-दिल्ली रोड और कमेटी चौक पर हैं। दिनभर लोग इन स्थानों पर चक्कर लगाते रहे, लेकिन मशीनों में रुपये न होने के चलते लोगों को बेहद दिक्कतें हुईं।
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अन्य स्थानों पर स्थित कुछेक मशीनों में कैश था तो भीड़ के कारण जल्दी खत्म हो गया। कैश आने के इंतजार में कई बूथों पर लोग खड़े रहे। शहर के निवासी विकास ने कहा कि नोटबंदी को पूरा एक महीना होने को है, लेकिन व्यवस्था सुधारने पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।

शहर में संख्या के मामले में तो एटीएम बहुत हैं, लेकिन कैश किसी में नहीं मिलता। शहर के निवासी अभिलाश ने बताया कि बीती रात वह दिल्ली से बहादुरगढ़ आ रहे थे। करीब साढ़े 12 बजे सदर थाने के सामने एक एटीएम के बाहर लोग कंबल ओढ़कर लेटे हुए थे। शायद वे एटीएम में कैश डलने का इंतजार कर रहे थे।

सैलरी में दिए जा रहे पुराने नोट
जैसे-जैसे ही महीने की तारीख आगे बढ़ रही हैं, मजदूरों की व्यथा बढ़ रही है। बहादुरगढ़ में स्थित करीब ढाई हजार औद्योगिक इकाइयों में हजारों श्रमिक काम करते हैं। अब सैलरी का वक्त आ गया है और इनके सामने नई समस्या आ गई है।


रविवार को बाजार में आए श्रमिक रामशरण ने बताया कि पहले तो फैक्टरी में हमेशा 10 तारीख के बाद ही वेतन दिया जाता था। अबकी बार तो मालिक अभी से ही सैलरी देे रहे हैं। सैलरी में पुराने नोट देने की कोशिश की जा रही है, जिसका कुछ फायदा नहीं। आलोक का कहना है कि उसका तो किसी बैंक में खाता भी नहीं है। मालिक कहता है कि नए नोट है नहीं, पुराने ले लो। पुराने नोट बदले नहीं जा सकते और बैंक में उसका खाता नहीं। फिर उसे इस सैलरी का क्या फायदा।
 

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