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नवरात्र : चंद्र घंटा माता की हुई पूजा, घरोबौर मंदिरों में गूंज रहे माता के जयकारे
Thu, 11 Apr 2024 08:39 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 11 Apr 2024 08:39 PM IST
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बहादुरगढ़। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप माता चंद्रघंटा की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। घरों-मंदिरों में माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। भक्तों ने माता रानी के दरबार में माथा टेक आशीर्वाद लिया। नवरात्र में रोजाना काफी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा के विविध स्वरूपों के दर्शन और पूजा अर्चना के लिए मंदिर जाते हैं।
आदि शक्ति मां दुर्गा की आराधना के लिए झज्जर रोड स्थित देवी शक्ति पीठ, शिव-हनुमान मंदिर काठ मंडी, अनाज मंडी स्थित शिव मंदिर, मेन बाजार स्थित मुरली मनोहर मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में भक्तों ने पूजा अर्चना कर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। इसके बाद शाम को घरों व मंदिरों में दुर्गा चालीसा और दुर्गा आरती की गई। माता चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अदर्धचंद्र बना हुआ है। जिस वजह से भक्त मां को चंद्रघंटा कहते हैं। ऐसा माना जाता है मां ने अपने भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए हाथों में त्रिशूल, तलवार और गदा रखा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता चंद्रघंटा को राक्षसों का वध करने वाला कहा जाता है। नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को सिंदूर, अक्षत, गंध, धूप, पुष्प अर्पित किए गए।
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आदि शक्ति मां दुर्गा की आराधना के लिए झज्जर रोड स्थित देवी शक्ति पीठ, शिव-हनुमान मंदिर काठ मंडी, अनाज मंडी स्थित शिव मंदिर, मेन बाजार स्थित मुरली मनोहर मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में भक्तों ने पूजा अर्चना कर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। इसके बाद शाम को घरों व मंदिरों में दुर्गा चालीसा और दुर्गा आरती की गई। माता चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अदर्धचंद्र बना हुआ है। जिस वजह से भक्त मां को चंद्रघंटा कहते हैं। ऐसा माना जाता है मां ने अपने भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए हाथों में त्रिशूल, तलवार और गदा रखा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता चंद्रघंटा को राक्षसों का वध करने वाला कहा जाता है। नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को सिंदूर, अक्षत, गंध, धूप, पुष्प अर्पित किए गए।
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