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आईएफएस में मृत्युंजय को मिली 36वीं रैंक
झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Fri, 12 Feb 2016 01:58 AM IST
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मेन बाजार निवासी एयरो स्पेश इंजीनियर मृत्युंजय बंसल अब 36वीं रैंक लेकर आईएफएस (इंडियन फोरेस्ट सर्विस) ऑफिसर बन गया है। उसने आईएएस के लिए भी परीक्षा दी है, जिसका रिजल्ट अभी आना है। परिवार में खुशी का माहौल है।
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अपनी सफलता पर मृत्युंजय ने विद्यार्थियों को संदेश दिया है कि वे एक बार मिली असफलता से हताश न हों, बल्कि दोगुनी मेहनत से पढ़ाई करें।
मृत्युंजय बंसल परिवार का इकलौता बेटा है। उसके पिता महेंद्र बंसल की झज्जर के मेन बाजार में परचून की दुकान है। मृत्युंजय ने कक्षा दसवीं केएसएम स्कूल झज्जर से और कक्षा 12 डीएस लॉरेंस स्कूल से पास की। इसके बाद उसने आईआईटी खड़गपुर में एयरो स्पेस इंजीनियर की पढ़ाई की।
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इसके बाद उसका चयन वर्ष 2011 में इसरो में वैज्ञानिक के तौर पर हुआ, लेकिन उसने आईएएस की तैयारी के लिए आठ महीने बाद ही इसरो वैज्ञानिक की नौकरी छोड़ दी। आईएएस की परीक्षा दी, लेकिन प्रथम बार चूक गया। आईएफएस में भी चयन नहीं हो पाया था।
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बहुत निराशा हुई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी
मृत्युंजय बंसल ने बताया कि प्रथम प्रयास में न तो आईएएस बना और न ही आईएफएस, इससे बहुत निराशा हुई। कुछ दिन टेंशन में भी रहा, लेकिन इसके बाद उसने सब कुछ भुलाकर फिर से पढ़ाई आरंभ की।
आईएएस का रिजल्ट अभी आना है, लेकिन वीरवार को आईएफएस का रिजल्ट आया तो 36वीं रैंक पाकर खुशी हुई।
वह इंजीनियर के बाद अब वन अधिकारी बन गया है। उम्मीद है कि आईएएस का रिजल्ट भी उम्मीद के अनुसार ही रहेगा।
सिर्फ मेहनत पर विश्वास करें
मृत्युंजय बंसल का कहना है कि माता-पिता का मार्गदर्शन एवं अच्छे मित्रों का साथ व्यक्ति को जीवन की ऊंचाइयों पर ले जाता है। विद्यार्थी कभी भी हताश न हों, बल्कि मेहनत पर भरोसा करें। जरूरी नहीं कि एक बार में ही सफलता हाथ लगे। असफल होने पर अपने प्रयास जारी रखें।