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Jhajjar-Bahadurgarh News: मिनी फॉरेस्ट बना वन्य जीवों और पक्षियों का नया आशियाना

Thu, 21 May 2026 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Thu, 21 May 2026 11:59 PM IST
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Mini forest becomes a new home for wild animals and birds
फोटो-58: बहादुरगढ़ के मिनी जंगल में बनी छोटी झील में पानी पीते मोर। स्रोत समिति
बहादुरगढ़। शहर की सामाजिक संस्थाओं और पर्यावरण प्रेमियों की मेहनत से एक बेकार और प्रदूषित जमीन आज जैव विविधता का सुंदर केंद्र बन गई है। दिल्ली-रोहतक रोड स्थित गौरैया टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स के पास कभी कूड़े-कचरे और गंदे पानी से भरा रहने वाला क्षेत्र अब मिनी फॉरेस्ट के रूप में विकसित हो चुका है। यहां लगाए गए हजारों पेड़-पौधे अब केवल हरियाली ही नहीं बढ़ा रहे बल्कि वन्य जीवों और पक्षियों का नया आशियाना भी बन गया है।
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जैव विविधता दिवस की इस साल की थीम वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना को बहादुरगढ़ की कई संस्थाओं ने जमीन पर उतारकर दिखाया है। संघर्षशील जनकल्याण सेवा समिति, क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट, सार्थक सेवा समिति, संत निरंकारी दल, रॉबिन हुड आर्मी, उड़ान सेवा समिति, ब्रह्म सेवा समिति, जनता जनार्दन समिति, नीमा व अन्य सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर इस क्षेत्र को नया जीवन दिया। पहले यह इलाका कचरा डालने और फैक्ट्री के गंदे पानी का केंद्र बन चुका था। यहां झुग्गियां थीं और आसपास के लोग भी कूड़ा फेंकते थे, जिससे पर्यावरण लगातार खराब हो रहा था।
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मई 2024 में सफाई अभियान शुरू किया गया। झुग्गियों को हटाकर पूरे क्षेत्र को साफ किया गया और फिर यहां चरणबद्ध तरीके से करीब 1800 पौधे लगाए गए। इनमें फलदार, औषधीय, बांस, बेल, फूलदार और छायादार पौधे शामिल हैं। अब इनमें से लगभग 1200 पौधे तेजी से बढ़ रहे हैं और पूरा क्षेत्र छोटे जंगल जैसा दिखाई देने लगा है।
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इन पेड़-पौधों के कारण यहां का वातावरण पूरी तरह बदल गया है। अब यहां कई प्रकार के पक्षी, तितलियां और छोटे वन्य जीव नजर आने लगे हैं। राष्ट्रीय पक्षी मोर के लिए विशेष रूप से पानी के होद बनाए गए हैं ताकि गर्मी में उन्हें पानी मिल सके। इसके साथ ही दो मिनी पौंड भी तैयार किए गए हैं, जिससे भूजल स्तर बढ़ाने और जीव-जंतुओं को प्राकृतिक वातावरण देने में मदद मिल रही है।



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यह पहल एक संदेश भी देती है कि यदि समाज मिलकर प्रयास करे तो कोई भी बेकार पड़ी जमीन पर्यावरण और जैव विविधता के लिए वरदान बन सकती है।-राजकुमार अरोड़ा, अध्यक्ष, जनजागरण सेवा समिति
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यहां पर भारी मात्रा में कबाड़ पड़ा था। इससे शहर की सुंदरता भी बिगड़ रही थी। लोगों व विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ मिलकर इसे मिनी जंगल के रूप में विकसित किया है। -प्रदीप रेढू, सदस्य, क्लीन एंड ग्रीन संस्था, बहादुरगढ़।



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मिनी जंगल में लगाए गए सभी पौधों की हर रविवार को देखभाल की जाती है। अब यहां पर हरियाली छाई हुई है और यह कबाड़ का केंद्र अब जीव-जंतुओं के लिए नया आशियाना बन गया है। -मनीष चाहार, सदस्य, संघर्षशील जनकल्याण सेवा समिति, बहादुरगढ़।

फोटो-58: बहादुरगढ़ के मिनी जंगल में बनी छोटी झील में पानी पीते मोर। स्रोत समिति

फोटो-58: बहादुरगढ़ के मिनी जंगल में बनी छोटी झील में पानी पीते मोर। स्रोत समिति

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