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मेट्रो में सफर करना है तो ध्यान करके निकलें घरों से
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बहादुरगढ़। इस सप्ताह भी मेट्रो से सुखदायक यात्रा की उम्मीद रखने वाले यात्री घरों से थोड़ा पहले निकले। मेट्रो स्टेशनों के बाहर भीड़ और लाइनों में लगकर घंटों इंतजार की परेशानी इस हफ्ते भी दूर नहीं होगी। इस हफ्ते भी गाड़ियों में 50 फीसदी सीटिंग क्षमता के साथ ही मेट्रो चलेंगी। मेट्रो में खड़े होकर सफर करने की अनुमति नहीं दी गई है।
मेट्रो पूरी क्षमता के साथ न चलने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मेट्रो यात्रियों को चल रही परेशानियां अभी अगले सप्ताह तक कम नहीं होंगी। लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने की कोशिश कर रहे दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा इस सप्ताह के लिए जारी की गई गाइड लाइन के अनुसार भी मेट्रो में यात्रियों की क्षमता बढ़ाने के संबंध में कोई फेरबदल नहीं किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए कोई नई छूट नहीं मिली है और 50 प्रतिशत सीटों पर बैठकर ही यात्रा की जा सकेगी। चालू सप्ताह में भी मेट्रो में खड़े होकर सफर करने पर रोक रहेगी। इस तरह घर से निकलने से पहले यह हिसाब जरूर लगा लें कि गंतव्य तक पहुंचने के लिए कितना समय लेगा। मेट्रो स्टेशन के बाहर लाइन में लगने वाले समय का भी ध्यान रखें और पर्याप्त समय पहले घर से निकले।
दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने तो चंद रोज पहले दिल्ली के मंडल आयुक्त को पत्र लिख मेट्रो में अधिक यात्री सवार करने की अनुमति मांगी थी। पत्र में कहा गया था कि केवल आधी सीटिंग क्षमता के आदेश होने के कारण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए कुछ यात्री खड़े होने की छूट दी जाए। एक मेट्रो अधिकारी ने बताया कि मंडल आयुक्त ने डीएमआरसी के इस निवेदन को रद्द कर दिया और कोरोना संक्रमण पर काबू पाए रखने की दृष्टि से अभी मेट्रो सेवा की गाइडलाइन में किसी तरह की फेरबदल नहीं किया है। इस तरह फिलहाल सुबह शाम मेट्रो में क्षमता बढ़ाने जैसी कोई राहत नहीं दी गई है।
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मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वारों पर भीड़ लगने का प्रमुख यह है कि कुछ बड़े स्टेशनों को छोड़कर बाकी लगभग हरेक स्टेशन का एक ही गेट खोला जा रहा है। जिस कारण दोनों दरवाजों की भीड़ का बोझ एक ही दरवाजे पर हो जाता है। भीड़ को कम करने के लिए दूसरे गेट भीड़ के अनियंत्रित होने की आशंका के चलते नहीं खोले जा रहे। अधिकारी ने कहा कि दोनों गेट खोल दिए तो भीड़ को गाड़ी के अंदर तक जाने से रोकना असंभव हो जाएगा। प्रवेश द्वार पर ही यात्रियों को अंदर जाने से रोका जा सकता है।
उधर, दैनिक यात्री अशोक कुमार ने कहा कि मेट्रो में सवार होने के लिए 30 से 60 मिनट तक लाइन में लगकर प्रतीक्षा करनी पड़ती है। कई बार देर से आफिस पहुंच पाते हैं। सरकार ने बसों पूरी यात्री क्षमता के साथ चलने की छूट दी है तो मेट्रो की क्षमता कुछ तो बढ़ानी ही चाहिए।
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मेट्रो पूरी क्षमता के साथ न चलने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मेट्रो यात्रियों को चल रही परेशानियां अभी अगले सप्ताह तक कम नहीं होंगी। लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने की कोशिश कर रहे दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा इस सप्ताह के लिए जारी की गई गाइड लाइन के अनुसार भी मेट्रो में यात्रियों की क्षमता बढ़ाने के संबंध में कोई फेरबदल नहीं किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए कोई नई छूट नहीं मिली है और 50 प्रतिशत सीटों पर बैठकर ही यात्रा की जा सकेगी। चालू सप्ताह में भी मेट्रो में खड़े होकर सफर करने पर रोक रहेगी। इस तरह घर से निकलने से पहले यह हिसाब जरूर लगा लें कि गंतव्य तक पहुंचने के लिए कितना समय लेगा। मेट्रो स्टेशन के बाहर लाइन में लगने वाले समय का भी ध्यान रखें और पर्याप्त समय पहले घर से निकले।
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दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने तो चंद रोज पहले दिल्ली के मंडल आयुक्त को पत्र लिख मेट्रो में अधिक यात्री सवार करने की अनुमति मांगी थी। पत्र में कहा गया था कि केवल आधी सीटिंग क्षमता के आदेश होने के कारण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए कुछ यात्री खड़े होने की छूट दी जाए। एक मेट्रो अधिकारी ने बताया कि मंडल आयुक्त ने डीएमआरसी के इस निवेदन को रद्द कर दिया और कोरोना संक्रमण पर काबू पाए रखने की दृष्टि से अभी मेट्रो सेवा की गाइडलाइन में किसी तरह की फेरबदल नहीं किया है। इस तरह फिलहाल सुबह शाम मेट्रो में क्षमता बढ़ाने जैसी कोई राहत नहीं दी गई है।
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मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वारों पर भीड़ लगने का प्रमुख यह है कि कुछ बड़े स्टेशनों को छोड़कर बाकी लगभग हरेक स्टेशन का एक ही गेट खोला जा रहा है। जिस कारण दोनों दरवाजों की भीड़ का बोझ एक ही दरवाजे पर हो जाता है। भीड़ को कम करने के लिए दूसरे गेट भीड़ के अनियंत्रित होने की आशंका के चलते नहीं खोले जा रहे। अधिकारी ने कहा कि दोनों गेट खोल दिए तो भीड़ को गाड़ी के अंदर तक जाने से रोकना असंभव हो जाएगा। प्रवेश द्वार पर ही यात्रियों को अंदर जाने से रोका जा सकता है।
उधर, दैनिक यात्री अशोक कुमार ने कहा कि मेट्रो में सवार होने के लिए 30 से 60 मिनट तक लाइन में लगकर प्रतीक्षा करनी पड़ती है। कई बार देर से आफिस पहुंच पाते हैं। सरकार ने बसों पूरी यात्री क्षमता के साथ चलने की छूट दी है तो मेट्रो की क्षमता कुछ तो बढ़ानी ही चाहिए।