{"_id":"655feeac956cc17f386a89a8e94804d6","slug":"meeting-of-deembandhu-sir-chhoturam-mission-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चौ. छोटूराम जहां पढ़े, वहीं उनकी स्मृति के लिए जगह नहीं ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चौ. छोटूराम जहां पढ़े, वहीं उनकी स्मृति के लिए जगह नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
Updated Wed, 09 Dec 2015 01:54 AM IST
विज्ञापन
दीनबंधू चौ. छोटूराम तीन साल तक शहर के जिस राजकीय स्कूल में पढ़े, राजनीतिक चालों ने उन्हें उसी स्कूल से दूर कर रखा है।
विज्ञापन
उनकी छह फुट की प्रतिमा, जो कि अढ़ाई लाख रुपये की लागत से रातों रात तैयार हुई पिछले साढ़े तीन साल से यहां बंद कमरे में रखी है।
कई बार उसकी स्थापना के प्रयास हुए, लेकिन हर बार राजनीति बीच में आ गयी।ं चौ. छोटूराम की मूर्ति का जिन एक बार फिर बाहर आ गया है।
इसकी स्थापना के प्रयासों में बार बार मात खा रही समिति ने एलान किया है, कि 12 दिसंबर को बाढ़सा में कैंसर संस्थान के भूमि पूजन के लिए आ रहे सीएम के सामने मामला रखा जाएगा।
विज्ञापन
वर्तमान सरकार में भी अड़चन डालने का प्रयास हुआ तो, आगामी 9 जनवरी को यहां चौ. छोटूराम के समर्थकों की भीड़ जुटाकर उनके सबसे बुजुर्ग प्रशंसक के हाथों मूर्ति का अनावरण करा दिया जाएगा। सोमवार को इसको लेकर दीनबंधु चौ.सर छोटूराम मिशन की बैठक में रणनीति तैयार की गई।
विज्ञापन
ये है मामला
गढ़ी सांपला में जन्में चौ. छोटूराम का झज्जर से जुड़ाव रहा है। वे कक्षा 6 से 8 तक यहां राजकीय ब्वॉयज स्कूल में पढ़े हैं। शहर व स्कूल में किसानों के मसीहा रहे छोटूराम की स्मृति धूमिल न हो इसके लिए प्रो. हरि सिंह ने स्कूल के पास उनकी प्रतिमा लगाने की ठानी।
इसके लिए 9 अप्रैल, 2012 का दिन चुना गया। इस दिन छोटूराम को वर्ष 1944 में रहबरे आजम का खिताब दिया गया था।
इसके लिए तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कार्यक्रम में शामिल होने की स्वीकृति मिली तो कार्यक्रम से मात्र 3 दिन पहले जयपुर से 2.50 लाख रुपये की लागत से चौ. छोटूराम की 6 फुट की प्रतिमा रातोंरात तैयार कराई गई। लेकिन कार्यक्रम से एक दिन पहले ही सीएम का कार्यक्रम टल गया।
बाद में कई बार छोटूराम की प्रतिमा की स्थापना के प्रयास हुए, लेकिन सिरे नहीं चढ़े। साढ़े 3 साल से ज्यादा समय से दीनबंधु की प्रतिमा यहां स्कूल के कमरे में ताले के भीतर रखी है। उनकी प्रतिमा की स्थापना कराने के प्रयासों में लगे प्रो. हरिसिंह का भी 7 अक्तूबर 2013 को निधन हो गया। अब उनके इस सपने को दीनबंधु चौ.सर छोटूराम मिशन पूरा करने के प्रयास में लगा है।
बैठक में अब लिया ये फैसला
दीनबंधु चौ.सर छोटूराम मिशन के तत्वावधान में सोमवार को सिलानी गेट पर मल्हान मार्केट में हुई प्रबुद्ध लोगों की बैठक में प्रतिमा की स्थापना को लेकर अहम फैसला लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता 360 झज्जर खाप के प्रधान गजराज पहलवान ने की, जबकि संचालन गुलिया खाप के प्रवक्ता एवं मिशन के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र गुलिया ने किया। बैठक में कहा गया कि 9 जनवरी, 2016 को सर छोटूराम की पुण्यतिथि के अवसर पर राजकीय स्कूल में उनकी प्रतिमा की स्थापना की जाएगी।
कार्यक्रम में कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ को मुख्यातिथि के तौर पर आमंत्रित किया जाएगा। बैठक में किसान यूनियन प्रधान जगदीश, रमेश, राजेंद्र नंबरदार, राव ओमप्रकाश, साहब सिंह धनखड़, राव बलजीत, कंवरभान यादव, जयसिंह, रामबीर ने विचार रखे।
सरकार मानी तो ठीक, नहीं तो खुद लगा लेंगे
दीनबंधू चौ. छोटूराम की प्रतिमा लगाने में बार-बार आ रही अड़चन से आहत मिशन प्रधान डॉ. जितेंद्र गुलिया ने कहा कि 9 जनवरी को चौधरी साहब की प्रतिमा स्थापित हो के रहेगी। कृषि मंत्री मंगलवार को अमर शहीद राव तुलाराम की जयंती कार्यक्रम में शरीक होंगे।
उनसे वहीं इस बारे में बात कर उनका पक्ष जाना जाएगा। तैयार हैं तो ठीक, नहीं 12 दिसंबर को पूरी भाजपा सरकार सीएम मनोहर लाल के साथ बाढ़सा में राष्ट्रीय कैंसर इंस्टीच्यूट के भूमि पूजन में जुटेगी। सीएम से वहीं बात कर समय मांगा जाएगा।
भाजपा सरकार भी इस मसले में आनाकानी करती है तो फिर 9 जनवरी को लोगों की भीड़ जुटाकर खुद ही चौ. छोटूराम की प्रतिमा सबसे बुजुर्ग व्यक्ति के हाथों स्थापित करा देंगे। यह समिति का अंतिम फैसला है।
2012 से अब तक ये हुआ
मिशन से जुड़े गणमान्य व्यक्ति बताते हैं कि 9 अप्रैल, 2012 को चौ. छोटूराम की प्रतिमा राजकीय स्कूल के सामने पार्क में लगाने का फैसला हुआ था। प्रशासन ने सीएम को गुमराह कर दिया कि प्रतिमा की स्थापना को लेकर रेजुलेशन नहीं हो पाया है।
असल में कारण राजनीतिक था और तत्कालीन नेता नहीं चाहते थे कि चौ. छोटूराम को यहां जमीन मिले। इसके बाद पार्क के आगे दुकानों का निर्माण करा दिया गया। बाद में फैसला हुआ कि प्रतिमा स्कूल के अंदर लगाई जाए। इसके लिए प्रिंसिपल तैयार हुए, लेकिन प्रशासन ने इजाजत नहीं दी।
तभी से प्रतिमा ताला बंद कमरे में रखी है। हर साल प्रयास हो रहे हैं, लेकिन प्रतिमा की स्थापना में आया रोड़ा नहीं हट रहा। इस बार समिति ने इसे सहन नहीं करने की ठान ली है।