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Jhajjar-Bahadurgarh News: लंगड़ा बुखार की चपेट में पशुधन, 15 दिन में 11 की हो चुकी मौत
Thu, 07 Dec 2023 01:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 07 Dec 2023 01:26 AM IST
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पशु चिकित्सकों की टीम ने किया गांव का दौरा, टीकाकरण जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। जिले का गांव दादनपुर पिछले दो सप्ताह से लंगड़ा बुखार की चपेट में है। इसका असर सीधा पशु धन पर पड़ा है। अब तक इसके चलते लगभग 10 से 11 पशुओं की मौत हो चुकी है। लंगड़ा बुखार की सूचना मिलने पर बुधवार को पशु चिकित्सकों की टीम ने गांव का दौरा किया और पशुओं की जांच भी की।
डॉक्टरों ने पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए दवाई देने के साथ टीकाकरण भी शुरू किया है। गांव निवासी नंबरदार देवी दयाल ने बताया कि करीब दो सप्ताह से पशुओं में लंगड़ा बुखार रोग आया हुआ है, लेकिन पशुपालन विभाग की ओर से कोई सुध नहीं ली जा रही। इसके चलते गांव में काफी कट्डे व बछड़े काल के ग्रास में समा गए हैं। लंगड़ा रोग से पशुओं के खुर बुरी तरह से प्रभावित हो जाते हैं, इससे पशु लंगड़ा कर चलते हैं और चलने में भी उनको परेशानी होती है। लंगड़ा बुखार की सूचना मिलने पर बुधवार को पशु चिकित्सकों की टीम ने गांव का दौरा भी किया और पशुओं की जांच भी की है। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले ही पशु चिकित्सालय में डॉक्टर आए थे। इससे पहले कंपाउंडर ही पशुओं का इलाज करते थे, लेकिन अब पशु चिकित्सक व सहायक पशुओं के इलाज कर रहे हैं। पशु चिकित्सक डॉ. अमन शर्मा ने बताया कि सर्दी के दौरान यह बीमारी आ जाती है। चिंता की कोई बात नहीं है। सभी प्रभावित पशुओं को दवाई दे दी गई है और टीकाकरण किया गया है। उन्होंने बताया कि पशुपालकों को भी पशुओं का ध्यान रखने की आवश्यकता है।
ऐसे रखें पशुओं का ध्यान
पशु चिकित्सक डॉ. अमन शर्मा ने बताया कि पशुओं को ज्यादा ठंडा पानी न पिलाएं। उनको सूखे स्थान पर रखें व ठंड से पशु को बचाएं। यह एक खतरनाक रोग है, जो अमूमन दुधारू पशुओं को होता है। इनमें भी सबसे अधिक खतरा गाय को होता है। लंगड़े बुखार को कुछ लोग ब्लैक क्वार्टर के नाम से भी जानते हैं।
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कब होता है लंगड़ा बुखार
पशुओं में होने वाले ज्यादातर रोग अकसर बारिश के दिनों में ही होते हैं। इसके पीछे की वजह है बारिश के दिनों में जीवाणुओं का पनपना और उनका सक्रिय हो जाना। ब्लैक क्वार्टर या लंगड़ा बुखार भी इन्ही रोगों में से एक है। यह भी बारिश के दिनों में ही अक्सर गाय या अन्य पशु को होता है।
किस आयु के पशु को है खतरा
अमूमन यह रोग हर क्षेत्र में पाया जाता है, लेकिन इसके होने की सबसे अधिक संभावना पशु को तब होती है जब वह छोटा होता है। बताया जाता है कि गाय या भैंस को यह रोग 6 महीने की आयु से लेकर 3 साल की आयु तक हो सकता है। एक बार पशु अगर इस आयु को लांघ जाए तो फिर लंगड़े बुखार होने की संभावना बेहद कम रह जाती है।
रोग का कारण
लंगड़ा बुखार मिट्टी में पैदा होने वाले एक जीवाणु से होता है। जीवाणु बीजाणु को पैदा करता है और सालों तक मिट्टी में जीवित रहता है। इसके अलावा अगर कोई पशु इस रोग से संक्रमित हो तो उसके संपर्क में आने से यह दूसरे पशुओं को भी प्रभावित कर सकता है। पशु को बारिश में गीली मिट्टी के संपर्क में आने से रोकना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। जिले का गांव दादनपुर पिछले दो सप्ताह से लंगड़ा बुखार की चपेट में है। इसका असर सीधा पशु धन पर पड़ा है। अब तक इसके चलते लगभग 10 से 11 पशुओं की मौत हो चुकी है। लंगड़ा बुखार की सूचना मिलने पर बुधवार को पशु चिकित्सकों की टीम ने गांव का दौरा किया और पशुओं की जांच भी की।
डॉक्टरों ने पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए दवाई देने के साथ टीकाकरण भी शुरू किया है। गांव निवासी नंबरदार देवी दयाल ने बताया कि करीब दो सप्ताह से पशुओं में लंगड़ा बुखार रोग आया हुआ है, लेकिन पशुपालन विभाग की ओर से कोई सुध नहीं ली जा रही। इसके चलते गांव में काफी कट्डे व बछड़े काल के ग्रास में समा गए हैं। लंगड़ा रोग से पशुओं के खुर बुरी तरह से प्रभावित हो जाते हैं, इससे पशु लंगड़ा कर चलते हैं और चलने में भी उनको परेशानी होती है। लंगड़ा बुखार की सूचना मिलने पर बुधवार को पशु चिकित्सकों की टीम ने गांव का दौरा भी किया और पशुओं की जांच भी की है। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले ही पशु चिकित्सालय में डॉक्टर आए थे। इससे पहले कंपाउंडर ही पशुओं का इलाज करते थे, लेकिन अब पशु चिकित्सक व सहायक पशुओं के इलाज कर रहे हैं। पशु चिकित्सक डॉ. अमन शर्मा ने बताया कि सर्दी के दौरान यह बीमारी आ जाती है। चिंता की कोई बात नहीं है। सभी प्रभावित पशुओं को दवाई दे दी गई है और टीकाकरण किया गया है। उन्होंने बताया कि पशुपालकों को भी पशुओं का ध्यान रखने की आवश्यकता है।
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ऐसे रखें पशुओं का ध्यान
पशु चिकित्सक डॉ. अमन शर्मा ने बताया कि पशुओं को ज्यादा ठंडा पानी न पिलाएं। उनको सूखे स्थान पर रखें व ठंड से पशु को बचाएं। यह एक खतरनाक रोग है, जो अमूमन दुधारू पशुओं को होता है। इनमें भी सबसे अधिक खतरा गाय को होता है। लंगड़े बुखार को कुछ लोग ब्लैक क्वार्टर के नाम से भी जानते हैं।
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कब होता है लंगड़ा बुखार
पशुओं में होने वाले ज्यादातर रोग अकसर बारिश के दिनों में ही होते हैं। इसके पीछे की वजह है बारिश के दिनों में जीवाणुओं का पनपना और उनका सक्रिय हो जाना। ब्लैक क्वार्टर या लंगड़ा बुखार भी इन्ही रोगों में से एक है। यह भी बारिश के दिनों में ही अक्सर गाय या अन्य पशु को होता है।
किस आयु के पशु को है खतरा
अमूमन यह रोग हर क्षेत्र में पाया जाता है, लेकिन इसके होने की सबसे अधिक संभावना पशु को तब होती है जब वह छोटा होता है। बताया जाता है कि गाय या भैंस को यह रोग 6 महीने की आयु से लेकर 3 साल की आयु तक हो सकता है। एक बार पशु अगर इस आयु को लांघ जाए तो फिर लंगड़े बुखार होने की संभावना बेहद कम रह जाती है।
रोग का कारण
लंगड़ा बुखार मिट्टी में पैदा होने वाले एक जीवाणु से होता है। जीवाणु बीजाणु को पैदा करता है और सालों तक मिट्टी में जीवित रहता है। इसके अलावा अगर कोई पशु इस रोग से संक्रमित हो तो उसके संपर्क में आने से यह दूसरे पशुओं को भी प्रभावित कर सकता है। पशु को बारिश में गीली मिट्टी के संपर्क में आने से रोकना चाहिए।