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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद और 30 हजार रुपये जुर्माना
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नाबालिग को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले दुष्कर्मी को एडिशनल सेशन जज सुधीर जीवन की कोर्ट ने उम्रकैद की सजा तथा 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
सिटी पुलिस थाना बहादुरगढ़ में दर्ज मामले के अनुसार 23 अगस्त को मूल रूप से यूपी के रहने वाले एक परिवार ने बताया कि वह मजदूरी के लिए बहादुरगढ़ शहर में रह रहे हैं। उनकी छह साल की बेटी के साथ रात के समय नवल किशोर ने दुष्कर्म किया है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर यूपी के ही रहने वाले ही नवल किशोर के खिलाफ पास्को तथा एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। करीब 11 माह में ही एडिशनल सेशन जज सुधीर जीवन की कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ अंडर सेक्शन 376(2) के तहत सश्रम उम्रकैद की सजा तथा 10 हजार रुपये जुर्माना, अंडर सेक्शन पॉक्सो एक्ट के तहत सश्रम उम्रकैद, 10 हजार रुपये जुर्माना व एससी-एसटी एक्ट के अंडर सेक्शन 3(2) के तहत सश्रम उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
पुलिस ने छह दिन में पेश कर दिया था चालान: वर्तमान में डीसीपी हेडक्वाटर गुरुग्राम आईपीएस शशांक कुमार सावन ने उस समय बतौर एडिशनल एसपी मामले की जांच खुद की थी। चार दिन में पूरे मामले की इन्वेस्टिगेशन व गहनता से तहकीकात करके छह दिन में चालान अदालत में पेश कर दिया था। चालान के साथ ही एफएसएल रिपोर्ट भी कोर्ट में जमा करवा दी थी। इसी के चलते पीड़िता को मात्र 11 माह में ही परिवार को न्याय मिल गया।
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परिवार बोला : फांसी मिलती तो और अच्छा होता
पीड़िता के पिता ने कोर्ट से आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे कोर्ट का सम्मान करते हैं। लेकिन अगर दोषी को फांसी की सजा मिलती तो और अच्छा होता। पीड़ित परिवार ने कहा कि फांसी से दूसरे लोगों को भी सबक मिलता, जो किसी की बच्ची के साथ ऐसा करने से पहले जरूर सोचेते।
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सिटी पुलिस थाना बहादुरगढ़ में दर्ज मामले के अनुसार 23 अगस्त को मूल रूप से यूपी के रहने वाले एक परिवार ने बताया कि वह मजदूरी के लिए बहादुरगढ़ शहर में रह रहे हैं। उनकी छह साल की बेटी के साथ रात के समय नवल किशोर ने दुष्कर्म किया है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर यूपी के ही रहने वाले ही नवल किशोर के खिलाफ पास्को तथा एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। करीब 11 माह में ही एडिशनल सेशन जज सुधीर जीवन की कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ अंडर सेक्शन 376(2) के तहत सश्रम उम्रकैद की सजा तथा 10 हजार रुपये जुर्माना, अंडर सेक्शन पॉक्सो एक्ट के तहत सश्रम उम्रकैद, 10 हजार रुपये जुर्माना व एससी-एसटी एक्ट के अंडर सेक्शन 3(2) के तहत सश्रम उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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पुलिस ने छह दिन में पेश कर दिया था चालान: वर्तमान में डीसीपी हेडक्वाटर गुरुग्राम आईपीएस शशांक कुमार सावन ने उस समय बतौर एडिशनल एसपी मामले की जांच खुद की थी। चार दिन में पूरे मामले की इन्वेस्टिगेशन व गहनता से तहकीकात करके छह दिन में चालान अदालत में पेश कर दिया था। चालान के साथ ही एफएसएल रिपोर्ट भी कोर्ट में जमा करवा दी थी। इसी के चलते पीड़िता को मात्र 11 माह में ही परिवार को न्याय मिल गया।
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परिवार बोला : फांसी मिलती तो और अच्छा होता
पीड़िता के पिता ने कोर्ट से आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे कोर्ट का सम्मान करते हैं। लेकिन अगर दोषी को फांसी की सजा मिलती तो और अच्छा होता। पीड़ित परिवार ने कहा कि फांसी से दूसरे लोगों को भी सबक मिलता, जो किसी की बच्ची के साथ ऐसा करने से पहले जरूर सोचेते।