Jhajjar: 10 दिन बाद बीकानेर होनी थी बदली, उससे पहले ही लांस नायक लीलाराम देश के लिए हो गए शहीद
वीर सपूत लीलाराम ने 29 वर्षीय पत्नी तारावती को खत लिखते हुए कहा था कि 10 दिन बाद उनकी बदली बीकानेर हो जाएगी। उससे पहले ही वह कारगिल युद्ध में शहीद हो गए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
(नरेश दहिया) क्षेत्र के गांव जटवाड़ा निवासी 33 वर्षीय शहीद लांस नायक लीलाराम जम्मू के राजौरी सेक्टर में तैनात थे। कारगिल युद्ध शुरू हो चुका था। वीर सपूत लीलाराम ने 29 वर्षीय पत्नी तारावती को खत लिखते हुए कहा था कि 10 दिन बाद उनकी बदली बीकानेर हो जाएगी।
बदली होने के बाद मुझे और बच्चों को बीकानेर घुमाने का वादा किया था लेकिन उससे पहले वह युद्ध में शहीद हो गए। उनका वादा बेटों ने पूरा किया है। खत में उन्होंने माता-पिता व बच्चों का भी ख्याल रखने के लिए कहा था। शहीद के पिता रिजतराम का देहांत एक साल बाद ही हो गया था जबकि मां कलावती अभी परिवार के साथ ही रहती हैं। लीलाराम 25 जून 1999 को विरोधियों का मुकाबला करते हुए शहीद हो गए थे। 27 जून को उनका पार्थिव शरीर गांव आया तो आसपास के गांवों के लोग भी अंतिम सलामी देने आ पहुंचे थे। गमगीन माहौल में गांव जटवाड़ा में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया था। 9 अक्टूबर 2000 को तत्कालीन रोहतक के सांसद कैप्टन इंद्र सिंह ने उनकी मूर्ति का अनावरण किया था।
परिवार को बखूबी संभाला
शहीद लीलाराम की शहादत के तीन महीने बाद ही वीरांगना ने आईटीआई झज्जर में क्लर्क की नौकरी शुरू की और साथ ही अपने आठ वर्षीय बेटे राजेश और पांच वर्षीय बेटे राकेश का पालन पोषण किया। पति के निधन के 3 वर्ष बाद ही तत्कालीन सरकार की ओर से उन्हें गैस एजेंसी उनके पति शहीद लीलाराम के नाम से मातनहेल में मंजूर हुई। इसके बाद उन्होंने क्लर्क की नौकरी छोड़ दी और गैस एजेंसी के माध्यम से अपना जीवन यापन किया। उन्होंने बताया कि बड़ा बेटा राजेश गैस एजेंसी संभाल रहा है। छोटे बेटा राकेश लोक निर्माण विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत है।