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नेताजी जयंती: ताउम्र देशभक्ति का चोला ओढ़े रहे ललती राम, सिंगापुर और हांगकांग की जेल में भी रहे

Sun, 23 Jan 2022 02:30 AM IST
भूपेंद्र सिंह विपिन कुमार बांगा, बेरी झज्जर (हरियाणा)।
विपिन कुमार बांगा, बेरी झज्जर (हरियाणा)। Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 23 Jan 2022 02:30 AM IST
सार

सिंगापुर में जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन किया और सैनिकों में जोश भरा तो वह नेताजी की फौज में शामिल हो गए।

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Lalati Ram of Jhajjar was in Azad Hind Fauj
स्वतंत्रता सेनानी ललती राम से मुलाकात करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के झज्जर जिले के दूबलधन गांव के स्वतंत्रता सेनानी ललती राम देशभक्ति का चोला ताउम्र ओढ़े रहे। उन्होंने न सिर्फ नेताजी सुभाष चंद्र बोस का साथ दिया, बल्कि देश की आजादी के बाद सेनानियों के हक की भी लड़ाई लड़ते रहे। विश्व युद्ध के दौरान ललती राम ब्रिटिश सेना में भी थे। सिंगापुर में जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन किया और सैनिकों में जोश भरा तो वह नेताजी की फौज में शामिल हो गए। 

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उनके पोते वीपक कुमार ने बताया कि ललती राम के बीमार होने से करीब एक सप्ताह पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल से मिलने का समय हुआ तय हुआ था, लेकिन बीमार होने के कारण मिल नहीं पाए। 9 मई 2021 को बीमारी से निधन हो गया था। उन्होंने नेता जी सुभाष चंद्र बोस की फौज में रहकर कई देशों में युद्ध किया।
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स्वतंत्रता सेनानी ललती राम को सम्मानित करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद। फाइल फोटो

ललती राम के देशप्रेम को देखते हुए ही प्रदेश सरकार ने हरियाणा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति का चेयरमैन 13 जनवरी 2017 को बनाया गया था।  दादाजी ने रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में फ्रीडम फाइटर मेमोरियल हॉल बनवाया था। वे स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार की बेटियों को विवाह में मिलने वाली राशि को जल्द से जल्द दिलवाने का कार्य करते थे।
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तात्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के स्वतंत्रता सेनानी ललती राम व अन्य। फाइल फोटो

20 साल तक कोआपरेटिव सोसाइटी के प्रधान रहे। ललती राम का सपना तब साकार हुआ। जब घर आने के लगभग एक साल बाद ही देश आजाद हुआ।  पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से दो बार, प्रणब मुखर्जी से एक बार और वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी ललती राम दो बार सम्मानित हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी उन्हें विशेष सम्मान मिल चुका है। वीपक कुमार ने बताया कि गांव की पंचायत सरकार से मांग कर रही है कि गांव में जो सरकारी कॉलेज है उसका नाम बदलकर ललती राम कर दिया जाए।


सिंगापुर और हांगकांग की जेल में भी रहे

दुबलधन गांव निवासी आजाद हिंद फौज के सिपाही रहे ललती राम को आइएनए में रहते हुए बहादुरी के लिए 3 मेडल मिले हैं। वह अंबाला, सिंगापुर, हांगकांग, थाईलैंड, जापान, कोलकाता (जगरकचा) जेल में भी रहे हैं। पांचों बेटे पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए सेना में भर्ती हुए। 5 पौत्र फौज में है व एक पोती पुलिस में है। 

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