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कंवर ग्रेवाल, सोनिया मान और राजवीर जवंदा ने चलाया सफाई अभियान
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टीकरी बॉर्डर पर किसानों के पड़ाव में झाड़ू से सफाई करते मशहूर पंजाबी गायक कंवर ग्रेवाल। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। पंजाब से टीकरी बॉर्डर पर मंगलवार को किसान आंदोलनकारियों का आना जारी रहा। पंजाब और हरियाणा के 12 किसान नेता अनशन पर रहे। मशहूर पंजाबी गायक कलाकार कंवर ग्रेवाल, सोनिया मान और राजवीर जवंदा ने किसानों के करीब एक किलोमीटर लंबे पड़ाव में घंटों तक सफाई अभियान चलाया। इलाके में तीनों हाइवे चारों टोल नाकों पर टोल फ्री रहे। धरने पर सभा में मौजूद किसानों को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश से आए भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने बिल वापस नहीं लिए तो किसान घर नहीं जाएंगे।
यूपी से किसान नेता रजनीश भारती, बिहार से विजयकांत, केरल से मनोज विषम और महिला जाट सभा गुरुग्राम की सुदेश डबास ने भी टीकरी बार्डर पर किसानों की सभा को संबोधित किया। उन्होंने झाड़ू लगाई और इकट्ठे हुए कूड़े को भी बड़े पॉलिथीन बैग्स में इकट्ठा करके ठिकाने लगाया गया। ग्रेवाल ने किसानों के पड़ाव में से ढूंढ़-ढूंढ़कर कूड़ा निकाला। ग्रेवाल ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं, किसानों को परेशानी होती है तो मुझे भी दर्द होता है। पंजाब स्टूडेंट यूनियन से जुड़े रहे पूर्व छात्रों भी ग्रेवाल के साथ अभियान में हिस्सा लिया। मोगा से आए छात्र अमरदीप ने कहा कि ग्रेवाल के आने से किसान आंदोलन को मजबूती मिली हैै।
मंगलवार को टीकरी बॉर्डर पर 12 किसान नेता अनशन पर रहे। अनशन करने वालों में मिथला कलां से आए मेदो सिंह, भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के जगमेल सिंह, उग्र सिंह मानसा, सिलरा सिंह कादया, कुल हिंद किसान सभा से गुरप्रीत सिंह, हरजिंद्र सिंह, गुरप्रीत सिंह संगरूर, पृथ्वी सिंह, ओमप्रकाश, अनिल साहू, नरेंद्र साहू और रामबीर खरक शामिल रहे।
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तीनों हाइवे के चारों टोल नाकों पर वाहन चालकों से टोल की वसूली मंगलवार को भी नहीं हो पाई। एनएच-9 के रोहद टोल प्लाजा, एनएच-334बी के छारा और केएमपी के आसौदा व बादली टोल प्लाजा पर किसानों का कब्जा रहा। इन चारों जगह किसानों ने टोल वसूली नहीं होने दी। सभी वाहन टोल दिए बिना ही निकलते रहे। चारों टोल प्लाजा का मिलाकर कंपनियां करीब 25 लाख रुपये टोल संग्रह करने से वंचित रहीं।
किसान आंदोलन के समर्थन में पद्मश्री अवार्ड लौटा चुके खडूर साहिब कार सेवा समिति तरनतारन के बाबा सेवा सिंह भी टीकरी बॉर्डर पहुंचे। उन्होंने बाइपास स्थित नए बस स्टैंड (निर्माणाधीन) परिसर में पीपल के पांच पौधे लगाए। बाबा ने कहा कि संतों और किसानों का काम भलाई करना होता है। किसान दूसरों के लिए अन्न उपजाता है और संत सन्मार्ग दिखाते हैं। ये पीपल के पौधे भी बहादुरगढ़ बस स्टैंड के वातावण को शुद्ध रखने में मदद करेंगे। समिति से जुड़े देवेंद्र सिंह और गुरप्रीत सिंह भी इस मौके पर मौजूद थे।
यूपी से आए भाकियू नेता राकेश टिकेत ने टीकरी बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान 32 साल में दोबारा अपने मुद्दे को लेकर दिल्ली आए हैं। पहले किसान दिल्ली में 1988 में आए थे। उस वक्त किसान दिल्ली के अंदर तक आए थे, लेकिन अब दिल्ली को चारों तरफ से घेरा हुआ है। सरकार इस गलतफहमी में न रहे कि किसान इस बिल को रद्द नहीं करवा पाएंगे। बिल रदद् नहीं हुए तो हम अपने घर नहीं लौटेंगे। धरनों पर किसानों की तादाद बढ़ रही है। पंजाब के किसान गेहूं की बिजाई करके आंदोलन में आ गए हैं। अब उतर प्रदेश से भी किसान 2-3 दिन में गन्ने की कटाई करके इस आंदोलन के आ जाएंगे। सरकार किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी और पाकिस्तानी कह रही है, किसानों को तोड़ने में लगी है, सरकार को इसका जवाब देना पड़ेगा। सरकार को ये बिल रद्द करने ही पड़ेंगे। स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करना पड़ेगा। विदेश में नौकरी कर रहे या कारोबार कर रहे हमारे बच्चे हमारे लिए पैसा भेजते हैं उसको सरकार विदेशी फंडिंग बता रही है। सरकार की या बात गलत है।
पूरा देश किसानों के साथ जुड़ चुका है। टिकैत ने कहा कि सरकार किसानों को जातपात में बांटने की कोशिश कर रही है। सरकार किसानों पर गोली भी चलाती है तो कोई बात नहीं, यह महीना शहीद दिवस के रूप में चल रहा है। हमारे 40 किसान शहीद हो चुके हैं। अब किसान दबने वाले नहीं हैं। कर्नाटक और तमिलनाडु से किसान ट्रैक्टर पर आ रहे हैं, जल्दी ही दिल्ली आने वाले हैं। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी की परेड में हमें अपने ट्रैक्टरों पर बड़े-बड़े तिरंगे झंडे लगाकर दिल्ली चलना है। उस दिन पता चलेगा देशद्रोही कौन है, पाकिस्तानी या खालिस्तानी कौन है। टिकैत ने कहा कि पलवल बॉर्डर और राजस्थान बॉर्डर पर भी अब हमारा कब्जा हो चुका है। हमने दिल्ली को चारों तरफ से घेर लिया है अब दिल्ली को हमारी बात सुननी पड़ेगी।
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यूपी से किसान नेता रजनीश भारती, बिहार से विजयकांत, केरल से मनोज विषम और महिला जाट सभा गुरुग्राम की सुदेश डबास ने भी टीकरी बार्डर पर किसानों की सभा को संबोधित किया। उन्होंने झाड़ू लगाई और इकट्ठे हुए कूड़े को भी बड़े पॉलिथीन बैग्स में इकट्ठा करके ठिकाने लगाया गया। ग्रेवाल ने किसानों के पड़ाव में से ढूंढ़-ढूंढ़कर कूड़ा निकाला। ग्रेवाल ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं, किसानों को परेशानी होती है तो मुझे भी दर्द होता है। पंजाब स्टूडेंट यूनियन से जुड़े रहे पूर्व छात्रों भी ग्रेवाल के साथ अभियान में हिस्सा लिया। मोगा से आए छात्र अमरदीप ने कहा कि ग्रेवाल के आने से किसान आंदोलन को मजबूती मिली हैै।
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मंगलवार को टीकरी बॉर्डर पर 12 किसान नेता अनशन पर रहे। अनशन करने वालों में मिथला कलां से आए मेदो सिंह, भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के जगमेल सिंह, उग्र सिंह मानसा, सिलरा सिंह कादया, कुल हिंद किसान सभा से गुरप्रीत सिंह, हरजिंद्र सिंह, गुरप्रीत सिंह संगरूर, पृथ्वी सिंह, ओमप्रकाश, अनिल साहू, नरेंद्र साहू और रामबीर खरक शामिल रहे।
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तीनों हाइवे के चारों टोल नाकों पर वाहन चालकों से टोल की वसूली मंगलवार को भी नहीं हो पाई। एनएच-9 के रोहद टोल प्लाजा, एनएच-334बी के छारा और केएमपी के आसौदा व बादली टोल प्लाजा पर किसानों का कब्जा रहा। इन चारों जगह किसानों ने टोल वसूली नहीं होने दी। सभी वाहन टोल दिए बिना ही निकलते रहे। चारों टोल प्लाजा का मिलाकर कंपनियां करीब 25 लाख रुपये टोल संग्रह करने से वंचित रहीं।
किसान आंदोलन के समर्थन में पद्मश्री अवार्ड लौटा चुके खडूर साहिब कार सेवा समिति तरनतारन के बाबा सेवा सिंह भी टीकरी बॉर्डर पहुंचे। उन्होंने बाइपास स्थित नए बस स्टैंड (निर्माणाधीन) परिसर में पीपल के पांच पौधे लगाए। बाबा ने कहा कि संतों और किसानों का काम भलाई करना होता है। किसान दूसरों के लिए अन्न उपजाता है और संत सन्मार्ग दिखाते हैं। ये पीपल के पौधे भी बहादुरगढ़ बस स्टैंड के वातावण को शुद्ध रखने में मदद करेंगे। समिति से जुड़े देवेंद्र सिंह और गुरप्रीत सिंह भी इस मौके पर मौजूद थे।
यूपी से आए भाकियू नेता राकेश टिकेत ने टीकरी बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान 32 साल में दोबारा अपने मुद्दे को लेकर दिल्ली आए हैं। पहले किसान दिल्ली में 1988 में आए थे। उस वक्त किसान दिल्ली के अंदर तक आए थे, लेकिन अब दिल्ली को चारों तरफ से घेरा हुआ है। सरकार इस गलतफहमी में न रहे कि किसान इस बिल को रद्द नहीं करवा पाएंगे। बिल रदद् नहीं हुए तो हम अपने घर नहीं लौटेंगे। धरनों पर किसानों की तादाद बढ़ रही है। पंजाब के किसान गेहूं की बिजाई करके आंदोलन में आ गए हैं। अब उतर प्रदेश से भी किसान 2-3 दिन में गन्ने की कटाई करके इस आंदोलन के आ जाएंगे। सरकार किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी और पाकिस्तानी कह रही है, किसानों को तोड़ने में लगी है, सरकार को इसका जवाब देना पड़ेगा। सरकार को ये बिल रद्द करने ही पड़ेंगे। स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करना पड़ेगा। विदेश में नौकरी कर रहे या कारोबार कर रहे हमारे बच्चे हमारे लिए पैसा भेजते हैं उसको सरकार विदेशी फंडिंग बता रही है। सरकार की या बात गलत है।
पूरा देश किसानों के साथ जुड़ चुका है। टिकैत ने कहा कि सरकार किसानों को जातपात में बांटने की कोशिश कर रही है। सरकार किसानों पर गोली भी चलाती है तो कोई बात नहीं, यह महीना शहीद दिवस के रूप में चल रहा है। हमारे 40 किसान शहीद हो चुके हैं। अब किसान दबने वाले नहीं हैं। कर्नाटक और तमिलनाडु से किसान ट्रैक्टर पर आ रहे हैं, जल्दी ही दिल्ली आने वाले हैं। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी की परेड में हमें अपने ट्रैक्टरों पर बड़े-बड़े तिरंगे झंडे लगाकर दिल्ली चलना है। उस दिन पता चलेगा देशद्रोही कौन है, पाकिस्तानी या खालिस्तानी कौन है। टिकैत ने कहा कि पलवल बॉर्डर और राजस्थान बॉर्डर पर भी अब हमारा कब्जा हो चुका है। हमने दिल्ली को चारों तरफ से घेर लिया है अब दिल्ली को हमारी बात सुननी पड़ेगी।